अमरावती. एनडीए के सबसे प्रमुख और पुराने सहयोगी और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर बड़ा बयान दिया है. नायडू ने 2029 के सियासी भविष्य को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिसने पूरे देश के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है. नायडू ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि बिना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के विज़न की कल्पना भी नहीं की जा सकती. नायडू के इस बेबाक रुख और ‘मोदी फॉर 2029’ के अप्रत्यक्ष संदेश के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या बीजेपी के लिए दक्षिण भारत का दुर्ग भेदना और आसान होने जा रहा है.
शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भोगापुरम में नवनिर्मित अल्लूरी सीताराम राजू इंटरनेशनल एयरपोर्ट को देश को समर्पित किया.पीएम मोदी ने शनिवार को आंध्र प्रदेश के लिए सड़क संपर्क और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी 18,000 करोड़ रुपये की कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास किया. इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि स्वर्ण आंध्र प्रदेश के विजन के लिए यह एक शुभ दिन है. पीएम मोदी ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को उनके विजन के लिए बधाई दी. उन्होंने कहा कि भोगापुरम एयरपोर्ट उत्तर आंध्र के विकास के लिए एक नए रनवे का काम करेगा. यह एयरपोर्ट आंध्र के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक नए लॉन्चपैड का काम करेगा.
क्या पीएम मोदी के लिए 2029 की ल़ड़ाई आसान?
इस मौके पर चंद्रबाबू नायडू ने प्रधानमंत्री मोदी की वैश्विक साख और विजन की जमकर सराहना की. नायडू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास देश को आगे ले जाने की स्पष्ट दृष्टि है और वे दुनिया के सबसे शक्तिशाली व सम्मानित नेताओं में से एक हैं. आज यदि हम दुनिया के किसी भी देश में जाते हैं, तो हर जगह भारत और पीएम मोदी को अभूतपूर्व सम्मान मिलता है. यह वह गौरव है जो उन्होंने राष्ट्र के लिए हासिल किया है. ऐऐसे में पूरे देश को केवल एक बात सोचनी चाहिए, राष्ट्र को उनके नेतृत्व का आशीर्वाद मिला है. बिना पीएम मोदी के हम 2047 तक भारत को वैश्विक नंबर वन बनाने के लक्ष्य की कल्पना नहीं कर सकते.’
पीएम मोदी और चंद्रबाबू नायडू की जुगलबंदी के मायने
नायडू ने पीएम मोदी के आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग उनकी आलोचना करते हैं, उन्हें पहले यह सोचना चाहिए कि उन्होंने देश के विकास में क्या योगदान दिया है. चंद्रबाबू नायडू का यह बयान केवल एक गठबंधन सहयोगी की तारीफ भर नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा सियासी गणित छिपा हुआ है.
‘विज़न 2047’ और मोदी-नायडू की साझा सोच
चंद्रबाबू नायडू ने अपने भाषण में कहा कि विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं मंदी और चुनौतियों से जूझ रही हैं, वहीं भारत पीएम मोदी के आर्थिक सुधारों के कारण सबसे तेज गति से आगे बढ़ रहा है. नायडू खुद आईटी और टेक्नोलॉजी आधारित शासन के समर्थक रहे हैं और वे मानते हैं कि मोदी सरकार की ‘डिजिटल इंडिया’, ‘यूपीआई’ और इंफ्रास्ट्रक्चर नीतियों ने भारत को 21वीं सदी की महाशक्ति बनने की राह पर ला खड़ा किया है. उन्होंने पी-4 मॉडल पब्लिक, प्राइवेट, पीपल पार्टनरशिप की वकालत करते हुए कहा कि पीएम मोदी के साथ मिलकर देश से गरीबी और असमानता को हमेशा के लिए समाप्त किया जा सकता है.
क्या 2029 में खुलेगा दक्षिण भारत का दरवाजा?
दक्षिण भारत के राज्यों तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भारतीय जनता पार्टी को उत्तर भारत की तुलना में कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनावों में आंध्र प्रदेश में टीडीपी-बीजेपी-जनसेना गठबंधन की शानदार जीत के बाद समीकरण बदल गए हैं. चंद्रबाबू नायडू दक्षिण भारत के सबसे वरिष्ठ और अनुभवी मुख्यमंत्रियों में से एक हैं. जब वे खुले मंच से नरेंद्र मोदी को 2029 और 2047 के लिए देश का एकमात्र विकल्प बताते हैं, तो इसका सीधा असर दक्षिण के मतदाताओं की सोच पर पड़ता है. यह बयान दक्षिण भारत में भाजपा के विस्तार और स्वीकार्यता को कई गुना बढ़ा सकता है.
चंद्रबाबू नायडू का “मोदी फॉर 2029” का यह हुंकार विपक्ष के उन दावों को करारा जवाब है जो एनडीए में दरार की उम्मीद लगाए बैठे थे. 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के मोदी के विज़न में नायडू का यह पूर्ण समर्थन न केवल केंद्र सरकार की स्थिरता को मजबूती देता है, बल्कि यह संकेत भी देता है कि आने वाले सालों में दक्षिण भारत की राजनीति में बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है.