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NEET UG 2026 Topper Hiya Jasmin Story: 10वीं में 99%, नीट में...


नई दिल्ली (NEET UG 2026 Topper Hiya). नीट यूजी देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में शामिल है. हर साल 20-22 लाख स्टूडेंट्स 1.38 लाख एमबीबीएस सीटों पर एडमिशन के लिए किस्मत आजमाते हैं. इसमें टॉप रैंक हासिल करने वाला लगभग हर स्टूडेंट एम्स दिल्ली में एडमिशन का सपना देखता है. एम्स दिल्ली देश का नंबर 1 मेडिकल कॉलेज है. लेकिन गुजरात की नीट यूजी गर्ल्स टॉपर रहीं हिया जैस्मिन वसावड़ा ने एम्स दिल्ली की एमबीबीएस सीट लेने से साफ इनकार कर दिया.

हिया ने नीट में 720 में से 697 अंकों (99.9978499 पर्सेंटाइल) के साथ राज्य में चौथी और लड़कियों में पहली स्थान हासिल की थी. उनके पास एम्स दिल्ली या किसी भी टॉप सेंट्रल मेडिकल कॉलेज में जाने का अवसर था. लेकिन उन्होंने दिल्ली के बजाय अपने ही शहर अहमदाबाद में स्थित बीजे मेडिकल कॉलेज (BJMC) चुना. जहां एम्स दिल्ली NIRF रैंकिंग में नंबर 1 पर है, वहीं बीजे मेडिकल कॉलेज 45वें पायदान पर है. हिया ने ब्रांड टैग के बजाय अपने शहर को प्राथमिकता दी. पढ़िए नीट सक्सेस स्टोरी.

नीट यूजी टॉपर ने देश के नंबर 1 मेडिकल कॉलेज में एडमिशन क्यों नहीं लिया?

हिया से पूछा गया कि उन्होंने एम्स दिल्ली जाने से मना क्यों किया तो उनका जवाब बेहद प्रैक्टिकल और स्पष्ट था. हिया अपने परिवार के साथ अहमदाबाद में ही रहकर डॉक्टरी की पढ़ाई करना चाहती हैं. उनका मानना है कि एमबीबीएस की पढ़ाई बहुत कठिन और थकाऊ होती है. दिल्ली जाने पर बार-बार ट्रैवल करने में समय और एनर्जी बर्बाद होती. अहमदाबाद में उनका पूरा परिवार रहता है. इसलिए घर के सुकून, अपनों के साथ और मानसिक शांति के बीच रहकर पढ़ाई करना उन्हें किसी भी बड़े टैग से ज्यादा सही लगा.

बचपन से ही होनहार हैं हिया

हिया जैस्मिन वसावड़ा बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रही हैं. 10वीं बोर्ड परीक्षा में 99 फीसदी अंक लाकर वे अहमदाबाद में दूसरे स्थान पर रही थीं. उनकी इस शानदार सफलता की नींव दूसरी कक्षा से ही पड़नी शुरू हो गई थी. वे तब से ही लगातार गणित, विज्ञान और अंग्रेजी के ओलंपियाड (IMO, NSO) दे रही थीं. इससे उन्हें ओएमआर सीट भरने और तेज स्पीड से एमसीक्यू (MCQ) हल करने की प्रैक्टिस हो गई. नीट जैसी टाइम-बाउंड परीक्षा में यही सबसे ज्यादा काम आई.

डॉक्टर पिता और बायोलॉजी टीचर नानी का मजबूत सपोर्ट

हिया डॉक्टर परिवार से ताल्लुक रखती हैं. उनके पिता डॉक्टर हैं, जिन्होंने बचपन से ही उनके बेसिक्स मजबूत कराए. वहीं उनकी नानी बायोलॉजी की टीचर थीं, जिन्होंने एनसीईआरटी बायोलॉजी को पूरी तरह रटाने और समझाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई. परिवार में कभी भी पढ़ाई का गैर-जरूरी दबाव नहीं बनाया गया. जब भी पढ़ाई का तनाव होता, हिया अपनी मां से खुलकर बातें करती थीं. उनके माता-पिता ने हमेशा सिखाया कि खुशमिजाज और रिलैक्स रहकर पढ़ाई करने से ही असली नतीजे मिलते हैं.

9वीं से कोचिंग और 12 घंटे की सेल्फ स्टडी

हिया जैस्मिन वसावड़ा ने 9वीं क्लास से ही नीट का फाउंडेशन कोर्स शुरू कर दिया था. 11वीं और 12वीं में वे कोचिंग के अलावा रोजाना 5 से 6 घंटे सेल्फ स्टडी करती थीं. आखिरी के 6 महीनों में ये घंटे बढ़कर 12 से 14 हो गए थे. उन्होंने अपनी नींद से कभी समझौता नहीं किया और रोज 7-8 घंटे सोती थीं. पढ़ाई के बीच थकान या नींद आने पर 10-15 मिनट की झपकी ले लेती थीं. तनाव दूर करने के लिए वे एरोबिक्स करती थीं, मां के साथ डांस करती थीं, पेंटिंग बनाती थीं और मर्डर मिस्ट्री नॉवेल्स पढ़ती थीं.



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