नई दिल्ली (NEET UG 2026 Topper Hiya). नीट यूजी देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में शामिल है. हर साल 20-22 लाख स्टूडेंट्स 1.38 लाख एमबीबीएस सीटों पर एडमिशन के लिए किस्मत आजमाते हैं. इसमें टॉप रैंक हासिल करने वाला लगभग हर स्टूडेंट एम्स दिल्ली में एडमिशन का सपना देखता है. एम्स दिल्ली देश का नंबर 1 मेडिकल कॉलेज है. लेकिन गुजरात की नीट यूजी गर्ल्स टॉपर रहीं हिया जैस्मिन वसावड़ा ने एम्स दिल्ली की एमबीबीएस सीट लेने से साफ इनकार कर दिया.
नीट यूजी टॉपर ने देश के नंबर 1 मेडिकल कॉलेज में एडमिशन क्यों नहीं लिया?
बचपन से ही होनहार हैं हिया
हिया जैस्मिन वसावड़ा बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रही हैं. 10वीं बोर्ड परीक्षा में 99 फीसदी अंक लाकर वे अहमदाबाद में दूसरे स्थान पर रही थीं. उनकी इस शानदार सफलता की नींव दूसरी कक्षा से ही पड़नी शुरू हो गई थी. वे तब से ही लगातार गणित, विज्ञान और अंग्रेजी के ओलंपियाड (IMO, NSO) दे रही थीं. इससे उन्हें ओएमआर सीट भरने और तेज स्पीड से एमसीक्यू (MCQ) हल करने की प्रैक्टिस हो गई. नीट जैसी टाइम-बाउंड परीक्षा में यही सबसे ज्यादा काम आई.
डॉक्टर पिता और बायोलॉजी टीचर नानी का मजबूत सपोर्ट
हिया डॉक्टर परिवार से ताल्लुक रखती हैं. उनके पिता डॉक्टर हैं, जिन्होंने बचपन से ही उनके बेसिक्स मजबूत कराए. वहीं उनकी नानी बायोलॉजी की टीचर थीं, जिन्होंने एनसीईआरटी बायोलॉजी को पूरी तरह रटाने और समझाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई. परिवार में कभी भी पढ़ाई का गैर-जरूरी दबाव नहीं बनाया गया. जब भी पढ़ाई का तनाव होता, हिया अपनी मां से खुलकर बातें करती थीं. उनके माता-पिता ने हमेशा सिखाया कि खुशमिजाज और रिलैक्स रहकर पढ़ाई करने से ही असली नतीजे मिलते हैं.
9वीं से कोचिंग और 12 घंटे की सेल्फ स्टडी
हिया जैस्मिन वसावड़ा ने 9वीं क्लास से ही नीट का फाउंडेशन कोर्स शुरू कर दिया था. 11वीं और 12वीं में वे कोचिंग के अलावा रोजाना 5 से 6 घंटे सेल्फ स्टडी करती थीं. आखिरी के 6 महीनों में ये घंटे बढ़कर 12 से 14 हो गए थे. उन्होंने अपनी नींद से कभी समझौता नहीं किया और रोज 7-8 घंटे सोती थीं. पढ़ाई के बीच थकान या नींद आने पर 10-15 मिनट की झपकी ले लेती थीं. तनाव दूर करने के लिए वे एरोबिक्स करती थीं, मां के साथ डांस करती थीं, पेंटिंग बनाती थीं और मर्डर मिस्ट्री नॉवेल्स पढ़ती थीं.