रांची1 दिन पहले
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14 महीने से लंबित वेतन के भुगतान की मांग को लेकर शनिवार को झारखंड के 2,000 से अधिक वोकेशनल टीचर मुख्यमंत्री आवास घेरने पहुंचे। राज्य के विभिन्न जिलों से आए शिक्षकों ने सीएम आवास के पास सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। कहा- लंबे समय से मानदेय नहीं मिलने के कारण उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सीधे मुलाकात कर अपनी समस्याओं से अवगत कराने और जल्द समाधान की मांग की। शिक्षकों का कहना है कि वेतन के अभाव में उनके बच्चों की पढ़ाई, घर का किराया, इलाज और अन्य जरूरी खर्चों को पूरा करने में परेशानी हो रही है।
कई बार संबंधित विभाग और अधिकारियों के समक्ष अपनी मांगें रखीं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। इसी कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री आवास के आसपास सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। मौके पर एसडीएम कुमार रजत, जिला शिक्षा अधीक्षक बादल राज और झारखंड एजुकेशन प्रोजेक्ट काउंसिल (जेईपीसी) के अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। अधिकारियों ने शिक्षकों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक पहल की जाएगी।
आउटसोर्सिंग कंपनियों के भरोसे शिक्षा
राज्य में युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए वर्ष 2014-15 में माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम शुरू किया गया था। इसके तहत कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को आईटी, हेल्थकेयर, रिटेल, एग्रीकल्चर समेत विभिन्न रोजगारोन्मुखी विषय पढ़ाए जाते हैं। सरकार ने इस योजना के संचालन की जिम्मेदारी आउटसोर्सिंग कंपनियों को सौंप रखी है, जिनके माध्यम से ये टीचर नियुक्त हुए हैं। अब कंपनियां और विभाग एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ रहे हैं।
10 वर्षों से समय पर वेतन नहीं मिला
झारखंड व्यावसायिक प्रशिक्षक संघ के प्रदेश सचिव विक्रम महतो ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में कभी भी समय पर मानदेय का भुगतान नहीं हुआ। हर बार आंदोलन या हड़ताल के बाद ही वेतन जारी किया जाता है। उन्होंने कहा कि 2019 के बाद से मानदेय में कोई वृद्धि नहीं हुई है, जबकि महंगाई लगातार बढ़ रही है। प्रदेश सचिव ने चेतावनी दी कि जब तक बकाया वेतन का भुगतान नहीं किया जाता, तब तक वोकेशनल टीचर स्कूलों में पढ़ाने नहीं जाएंगे।
