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OPINION: कंटेंट क्रिएटर्स की वो चमकती दुनिया, जिसे हर कोई चाहता है…...


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OPINION: कंटेंट क्रिएटर्स की वो चमकती दुनिया, जिसे हर कोई चाहता है…

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Content Creators: भारत का क्रिएटर इकोनॉमी इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रहा है. लाखों युवा कंटेंट क्रिएटर बनने का सपना देख रहे हैं. लेकिन सच्चाई थोड़ी अलग है. AI बैन, टैक्स का दबाव और कम कमाई ने इस इंडस्ट्री को हिला दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक 2.5 मिलियन क्रिएटर्स में से बहुत कम लोग ही अच्छी इनकम कमा पा रहे हैं. कई लोगों के अकाउंट बिना चेतावनी बंद हो रहे हैं. वहीं ब्रांड डील्स भी सभी को नहीं मिल रही. धीरे-धीरे यह सपना अब आसान नहीं लग रहा है.

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फोटो- कंटेट क्रियेटर AI इमेज

पहले जब बच्चों से पूछा जाता था कि बड़े होकर क्या बनना है, तो जवाब होता था डॉक्टर, इंजीनियर या टीचर. ये एक तय और सुरक्षित रास्ता माना जाता था. लेकिन आज हालात बदल चुके हैं. अब यही सवाल पूछो, तो जवाब मिलता है ‘यूट्यूबर बनना है… कंटेंट क्रिएटर बनना है.’ हर दूसरा बच्चा आज कैमरे के सामने अपनी दुनिया बना रहा है. हर कोई वायरल होने का सपना देख रहा है. लेकिन असली सवाल यही है
क्या यह सपना उतना आसान है जितना दिखता है? या इसके पीछे एक ऐसी सच्चाई छिपी है, जो कोई खुलकर नहीं बताता?

क्रिएटर्स की भीड़, कमाई की कमी

आज देश में करीब 2.5 मिलियन कंटेंट क्रिएटर्स हैं. लेकिन सच्चाई यह है कि इनमें से 10% से भी कम लोग ही स्थिर या अच्छी कमाई कर पा रहे हैं. बाकी लोग लगातार वीडियो बना रहे हैं, ऑडियंस भी बढ़ा रहे हैं, लेकिन कमाई अभी भी कमजोर है.

रिपोर्ट क्या कहती है?

यूट्यूब चैनल @MobileAppDaily के अनुसार, भारत की क्रिएटर इकोनॉमी तेजी से बढ़ जरूर रही है, लेकिन इसके पीछे एक कड़वी सच्चाई भी छिपी है कि ज्यादातर क्रिएटर्स स्थिर इनकम नहीं कमा पा रहे हैं और सिर्फ एक छोटे हिस्से को ही इसका असली फायदा मिल रहा है.

ये हैं 4 बड़े कारण जो भारत की क्रिएटर इकोनॉमी को हिला रहे

    • सबसे बड़ा बदलाव सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की पॉलिसी में देखने को मिल रहा है. Meta और Instagram जैसे प्लेटफॉर्म्स ने AI मॉडरेशन को काफी सख्त कर दिया है. इसके चलते कई क्रिएटर्स के अकाउंट बिना किसी चेतावनी के बंद हो रहे हैं. और कई बार वजह भी साफ नहीं बताई जाती.क्रिएटर्स का कहना है कि सालों की मेहनत, फॉलोअर्स और कंटेंट एक झटके में खत्म हो जाता है और अपील सिस्टम भी इतना आसान नहीं है, कई बार जवाब तक नहीं मिलता.
    • दूसरी बड़ी चुनौती टैक्स सिस्टम है. सरकार ने क्रिएटर्स को प्रोफेशनल पहचान तो दी है. लेकिन GST, TDS और अन्य टैक्स नियमों ने कमाई पर दबाव बढ़ा दिया है. 20 लाख से ज्यादा इनकम पर GST लगता है. ब्रांड डील्स पर TDS कटता है और गिफ्टेड प्रोडक्ट्स भी टैक्स के दायरे में आ गए हैं. इस वजह से नेट इनकम काफी कम हो जाती है.
    • ब्रांड डील्स को लेकर भी स्थिति आसान नहीं है. बड़े क्रिएटर्स को तो अच्छे ऑफर मिल जाते हैं. लेकिन छोटे और मिड-लेवल क्रिएटर्स को अक्सर ब्रांड्स से जवाब ही नहीं मिलता.असल में यह इंडस्ट्री बहुत अनस्ट्रक्चर्ड है. कुछ लोग करोड़ों कमा रहे हैं. लेकिन बहुत बड़ी संख्या में लोग बहुत कम कमाई कर रहे हैं या पार्ट-टाइम जॉब कर रहे हैं.कई क्रिएटर्स तो दिन में कॉरपोरेट जॉब करते हैं और रात में कंटेंट बनाते हैं.
    • सबसे बड़ी कमी यहां सेफ्टी नेट की है. न पेंशन है, न इंश्योरेंस, न कोई वेलफेयर सिस्टम. अगर कोई कुछ समय काम न करे, तो उसकी इनकम तुरंत रुक जाती है.सोशल तौर पर भी यह करियर अभी पूरी तरह स्वीकार नहीं किया गया है.कई परिवार आज भी इसे स्थिर करियर नहीं मानते.

टॉप 1% की अलग दुनिया

हालांकि दूसरी तरफ टॉप 1% क्रिएटर्स तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. वे ब्रांड्स, OTT और बड़े बिजनेस तक पहुंच बना रहे हैं. लेकिन असली दबाव मिड और लो-टियर क्रिएटर्स पर है. जो इस पूरे सिस्टम को चलाते हैं. कुल मिलाकर तस्वीर मिली-जुली है. कहीं बड़ा मौका है, तो कहीं बड़ा रिस्क भी. और यही सबसे बड़ा सवाल है क्या भारत की क्रिएटर इकोनॉमी आगे और मजबूत होगी, या धीरे-धीरे कमजोर पड़ती जाएगी?

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Harshita Patel

Harshita Patel is working with News18 Hindi (hindi.news18.com) Central Desk since 2025. She has a good understanding of national, international, and local news, along with current affairs, gold rates, and resea…और पढ़ें



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