मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के पक्ष में ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है. इसे लेकर AIMIM के चीफ उद्दीन ओवैसी ने निराशा व्यक्त की और सुप्रीम कोर्ट जाने की बात की. वहीं, विधायक टाइगर राजा सिंह ने इसे सत्य की विजय और हिंदुओं की प्रचंड जीत बताया. राजा सिंह ने कहा कि भोजशाला के लिए हिंदुओं का 124 साल का लंबा संघर्ष आज सार्थक हुआ है.
हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ की दलीलों को स्वीकार करते हुए मुस्लिम पक्ष के दावों को खारिज कर दिया. हाईकोर्ट ने अपने निष्कर्ष में ऐतिहासिक साक्ष्यों, 1904 के गजेटियर और ASI सर्वेक्षण रिपोर्ट पर भरोसा जताते हुए कहा कि यह परिसर मूल रूप से राजा भोज द्वारा स्थापित ‘वाग्देवी सरस्वती मंदिर’ और संस्कृत शिक्षा का केंद्र रहा है. अदालत ने अयोध्या मामले की कानूनी मिसालों का उल्लेख करते हुए हिंदुओं को यहां पूजा-अर्चना का पूर्ण अधिकार प्रदान कर दिया है.
· असदउद्दीन ओवैसी (AIMIM): उन्होंने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई और इसकी तुलना बाबरी मस्जिद के फैसले से की. ओवैसी ने कहा कि इस आदेश में गंभीर समानताएं हैं और उन्हें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इस गलती को सुधारते हुए हाईकोर्ट के आदेश को पलट देगा.
· टाइगर राजा सिंह (विधायक): उन्होंने इसे सत्य की विजय और हिंदुओं की प्रचंड जीत बताया. राजा सिंह ने कहा कि भोजशाला के लिए हिंदुओं का 124 साल का लंबा संघर्ष आज सार्थक हुआ है. उन्होंने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए पूरे देश के हिंदुओं को बधाई दी.
मुख्य प्वाइंट्स
· हिंदू पक्ष की जीत: कोर्ट ने भोजशाला परिसर में हिंदुओं को पूजा-अर्चना का पूर्ण अधिकार दिया है.
· साक्ष्यों पर भरोसा: अदालत ने 1904 के ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स और ASI की वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट को आधार माना.
· ऐतिहासिक स्वरूप: फैसले में स्पष्ट किया गया कि यह स्थान मूल रूप से राजा भोज द्वारा स्थापित वाग्देवी सरस्वती मंदिर और संस्कृत शिक्षा का केंद्र था.
· कानूनी मिसाल: कोर्ट ने अपने निर्णय में अयोध्या मामले के कानूनी सिद्धांतों और निरंतरता के तर्क को लागू किया.
यह फैसला न केवल एक धार्मिक स्थल के स्वामित्व को तय करता है बल्कि भारतीय न्यायिक व्यवस्था में निरंतरता के सिद्धांत को भी मजबूत करता है. हाईकोर्ट ने माना कि मुस्लिम पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि वहां हिंदू परंपरा कभी पूरी तरह समाप्त हुई थी. एएसआई की रिपोर्ट ने इस दावे को वैज्ञानिक आधार दिया कि संरचना के नीचे एक प्राचीन मंदिर के अवशेष मौजूद हैं. राजनीतिक रूप से इस फैसले ने ‘बाबरी’ और ‘ज्ञानवापी’ जैसे विवादों की बहस को फिर से जिंदा कर दिया है.
भोजशाला विवाद सवाल-जवाब
असदउद्दीन ओवैसी ने इस फैसले की तुलना किससे की है?
ओवैसी ने इस फैसले की तुलना बाबरी मस्जिद के फैसले से की है. उन्होंने ट्वीट किया कि इसमें ‘चौंकाने वाली समानताएं’ हैं और उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट इसे पलटकर न्याय बहाल करेगा.
टाइगर राजा सिंह ने इस निर्णय को किस रूप में देखा?
फायरब्रांड नेता राजा सिंह ने इसे हिंदुओं की प्रचंड विजय बताया. उन्होंने कहा कि यह 124 साल के लंबे संघर्ष का परिणाम है और इससे करोड़ों हिंदुओं की आस्था को सम्मान मिला है.
हाईकोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की दलीलों को क्यों खारिज किया?
कोर्ट ने माना कि ऐतिहासिक साहित्य, एएसआई की अधिसूचनाएं और पुरातात्विक साक्ष्य यह प्रमाणित करते हैं कि यह स्थान मूल रूप से भोजशाला ही था. कोर्ट के अनुसार हिंदू पूजा की परंपरा यहां कभी खत्म नहीं हुई थी.