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Sanjeet Kumar NEET Success Story: 2 साल की उम्र में छूटा पिता...


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Sanjeet Kumar NEET Success Story: मात्र 2 साल की उम्र में पिता का साया उठा तो मां ने घरों और यूनिवर्सिटी में झाड़ू-पोंछा करके पाला. झारखंड में स्थित हजारीबाग के रहने वाले संजीत कुमार ने गरीबी को हराकर नीट यूजी 2026 में इतिहास रच दिया. पढ़िए एक मजबूर मां के बेटे की कहानी.

2 साल की उम्र में छूटा पिता का साया, मां लगाती थीं झाड़ू, बेटा बन गया नीट टॉपरZoom

Sanjeet Kumar NEET Success Story: संजीत कुमार ने बचपन से मां को संघर्ष करते देखा (फोटो में संजीत कुमार का घर)

नई दिल्ली (Sanjeet Kumar NEET Success Story). हौसले बुलंद हों और मन में कुछ कर गुजरने की चाह हो तो गरीबी और तंगहाली भी रास्ते का रोड़ा नहीं बन सकती. झारखंड के हजारीबाग के रहने वाले संजीत कुमार की कहानी इस बात की जीती-जागती मिसाल है. महज 2 साल की उम्र में संजीत के सिर से पिता का साया उठ गया था. घर में चूल्हा जलता रहे, इसके लिए उनकी मां ने यूनिवर्सिटी और लोगों के घरों में झाड़ू-पोंछा करने का काम शुरू किया. महीने में मुश्किल से 6,000 रुपये कमाने वाली मां की मेहनत देखकर पले-बढ़े संजीत ने हमेशा मुश्किलों से लड़ना सीखा.

12वीं में 94.4 फीसदी अंक हासिल करने वाले संजीत कुमार बचपन से ही डॉक्टर बनना चाहते थे. उन्होंने इसके अलावा कोई और सपना देखा ही नहीं. बिना पैसों के मेडिकल जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी करना किसी नामुमकिन सपने जैसा था. लेकिन तंगहाली का दबाव और संसाधनों की कमी भी संजीत के इरादों को डिगा नहीं पाई. आखिरकार अपनी लगन और ‘जिंदगी फाउंडेशन’ के गाइडेंस से संजीत ने नीट यूजी 2026 परीक्षा पास कर सरकारी मेडिकल कॉलेज में अपनी सीट पक्की कर ली. जानिए एक मजबूर मां के बेटे के डॉक्टर बनने का इमोशनल सफर.

जब बिना इलाज के तड़पते देखा, तभी ठान लिया था डॉक्टर बनना

संजीत कुमार का बचपन अभावों के बीच बीता. लेकिन एक घटना ने उनकी जिंदगी का मकसद तय कर दिया. उनकी मां को मलेरिया हुआ तो घर में सही इलाज कराने तक के पैसे नहीं थे. उन्होंने मां को दर्द से तड़पते देखा. उनके इलाके में एक व्यक्ति को सही समय पर मेडिकल मदद नहीं मिल पाई थी, जिससे उसकी मौत हो गई थी. इन दोनों कड़वे अनुभवों ने संजीत के दिल पर गहरी छाप छोड़ी. उन्होंने उसी दिन खुद से वादा किया कि वे डॉक्टर बनेंगे, ताकि किसी गरीब को इलाज के अभाव में जान न गंवानी पड़े.

खुद से की तैयारी, ‘जिंदगी फाउंडेशन’ का मिला सहारा

12वीं के बाद संजीत ने पहले साल खुद से नीट यूजी की तैयारी की. मेहनत पूरी थी, लेकिन सही गाइडेंस न मिलने से अच्छे कॉलेज में दाखिला नहीं हो पाया. इसके बावजूद संजीत ने हार नहीं मानी. ‘जिंदगी फाउंडेशन’ से जुड़कर उनकी जिंदगी में नया मोड़ आया. संस्थापक अजय बहादुर सिंह ने संजीत की प्रतिभा और लगन को पहचाना. फाउंडेशन ने उन्हें मुफ्त कोचिंग, रहने-खाने की व्यवस्था और किताबें मुहैया कराईं. अजय सर ने न सिर्फ संजीत को पढ़ाया, बल्कि हर मुश्किल मोड़ पर उनका मानसिक हौसला भी बढ़ाया.

जब टूटने लगता था हौसला, याद आ जाता था मां का चेहरा

नीट यूजी की तैयारी के दौरान जब भी पढ़ाई का तनाव बढ़ता या घर की माली हालत का ख्याल आता, संजीत की आंखों के सामने अपनी मां का चेहरा घूम जाता. वे याद करते कि कैसे उनकी मां सुबह अंधेरे में ही दूसरों के घरों में सफाई करने निकल जाती थीं, जिससे वे पढ़ाई कर सकें. मां का यही त्याग संजीत के लिए सबसे बड़ी ताकत बन गया. संजीत का मानना है कि अपनी विपरीत परिस्थितियों को कमजोरी बनाने के बजाय उन्हें अपनी ढाल बनाना चाहिए.

टॉपर लिस्ट में शामिल है संजीत का नाम

संजीत कुमार ने नीट यूजी 2026 में 720 में से 666 अंक हासिल किए हैं. ओबीसी वर्ग में उनकी रैंक 197 और जनरल में 644 है. साथ ही वह झारखंड के सेकंड टॉपर भी बने हैं. संजीत कुमार की कामयाबी पर ‘जिंदगी फाउंडेशन’ के संस्थापक अजय बहादुर सिंह कहते हैं कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या पैसों की मोहताज नहीं होती. प्रतिभा का कोई पिनकोड नहीं होता. संजीत जैसे बच्चे साबित करते हैं कि सही गाइडेंस मिले तो मिट्टी से भी सोना तराशा जा सकता है.

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Deepali PorwalSenior Sub Editor

Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is kno…

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