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Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ में सामाजिक कार्यकर्ता रूपनारायण एक्का के फेसबुक पोस्ट से जुड़े मामले में एफआईआर दर्ज करने पर सवाल उठाए. पोस्ट में महिलाओं के स्तन ढकने पर लगाए गए कथित ऐतिहासिक टैक्स का जिक्र था. एक्का पर धार्मिक भावनाएं आहत करने और समुदायों के बीच नफरत फैलाने से जुड़ी धाराओं में मामला दर्ज है. अदालत ने सुनवाई 4 दिसंबर तक टालते हुए अंतरिम राहत जारी रखी.
कोर्ट ने पुलिस से कड़े सवाल पूछे. (File Photo)
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के एक सोशल वर्कर रूपनारायण एक्का के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर पर सख्त सवाल उठाए हैं. सोशल मीडिया पर स्तन टैक्स (Breast Tax) और हिंदू महिलाओं को लेकर किए गए एक फेसबुक पोस्ट को लेकर यह पूरा विवाद खड़ा हुआ है. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत खारिज किए जाने के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां जस्टिस बीवी नागरथना और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने इस कार्रवाई पर तीखी टिप्पणी की.
‘यह कोई अपराध नहीं है, इतिहास पर राय रखना सबका अधिकार’
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता रूपनारायण एक्का की तरफ से पेश हुए देश के जाने-माने वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि फेसबुक पोस्ट में ऐसा कुछ भी नहीं था जो कोई संज्ञेय अपराध बनता हो. पोस्ट में केवल इतना कहा गया था कि महिलाओं के स्तन ढकने पर कर औरंगजेब ने नहीं बल्कि किसी ब्राह्मण ने लगाया था, जाकर हिंदुओं को यह सिखाओ. प्रशांत भूषण ने इसे पूरी तरह से एक फर्जी और तुच्छ मामला करार दिया. इस पर जस्टिस नागरथना ने टिप्पणी करते हुए कहा, “यही वजह है कि हमने इस अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करना उचित समझा.” वकील ने आगे तर्क दिया कि यह इतिहास पर उनका व्यक्तिगत दृष्टिकोण हो सकता है, जो गलत भी हो सकता है, लेकिन यह कोई जुर्म नहीं है. इस पर जस्टिस नागरथना ने तंज कसते हुए कहा, “इसका मतलब लोगों के पास बर्बाद करने के लिए बहुत समय है.”
क्या बोले सुप्रीम कोर्ट के जज?
यह पूरा विवाद छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के कुंकुरी पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 और 353(2) के तहत दर्ज एफआईआर से जुड़ा है. अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 13 अप्रैल 2025 को सोशल मीडिया पर हिंदू महिलाओं से जुड़ी कथित अपमानजनक सामग्री पोस्ट की गई थी, जिसके बाद ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष दीपक मिश्रा ने इसकी शिकायत दर्ज कराई थी. छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दिसंबर 2025 और फिर जुलाई 2026 में उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस महादेवन ने साफ शब्दों में कहा, “FIR दर्ज करने के लिए इसमें रखा क्या है? पुलिस बड़े मामलों पर ध्यान दे, ऐसे मामलों पर नहीं.” फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 4 दिसंबर तक के लिए टाल दी है और तब तक आरोपी को गिरफ्तारी से राहत जारी रखी है.
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पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त…