देश की सियासत में भूचाल आने की पूरी संभावनाएं दिख रही हैं. एक तरफ पीएम मोदी विदेशी दौरे निपटा कर लौट चुके हैं. उधर नेता विपक्ष भी विदेश यात्रा वाले अज्ञात वास से लौट आए हैं और तीसरा ये कि संसद का मानसून सत्र शुरु होने जा रहा है यानि सियासी बिजलिया कड़कने वाली हैं बॉस और उनकी गरज अभी से सुनाई भी दे रही है. पीएम मोदी इस बार के संसद सत्र के लिए मेगा प्लान तैयार किए बैठे हैं जो काम इंडी वालों ने मिलकर तीन महीने पहले मिलकर रोक दिया था. मोदी-शाह ने मिलकर तीन महीने में पूरा गेम ही पलट दिया है. बड़ी खबर ये है कि इंडी गठबंधन के बड़े बड़े प्लेयर्स राहुल गांधी को गच्चा देने के लिए तैयार हैं.
– पीएम मोदी का ये मेगा काम है महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल.
– खबर है कि 21 जुलाई से शुरू हो रहे मानसूत्र सत्र में सरकार ये बिल फिर संसद में ला सकती है.
– पीएम मोदी के मेगा बिल को रोकने के लिए इंडी गठबंधन फिर से पूरा जोर लगाएगा.
– लेकिन संसद में इस मुकाबले से पहले ही राहुल गांधी को बड़ा झटका लग गया है.
– इंडी गठबंधन के सबसे अनुभवी प्लेयर शरद पवार. इस मुद्दे पर राहुल गांधी का साथ छोड़ सकते हैं और नरेंद्र मोदी के बिल को सपोर्ट कर सकते हैं.
अब रातोंरात क्या हुआ कि लोग कहने लगे कि शरद पवार टीम मोदी का हिस्सा बनने को तैयार हो गए. नंबर गेम क्या कहता है और आखिर पीएम मोदी के लिए ये दो बिल इतने इम्पॉर्टेंट हैं क्यों आज आपको विस्तार से बताउंगा. लेकिन खेल सिर्फ संसद में ही नहीं होनेवाला. यूपी और पंजाब जैसे अहम राज्यों के चुनाव में भी खेला हो सकता है क्योंकि आप देखिए कि यूपी को लेकर कल ही अमित शाह और सीएम योगी की मुलाकात हुई है, उधर पीएम मोदी पंजाब दौरे पर जाने वाले हैं. यानी संसद से राज्यों तक सब सेट किया जा रहा है. उधर इंडी वाले अपने ही झगड़ों में उलझे हुए हैं.
– राहुल गांधी पंजाब कांग्रेस का विवाद सुलझाने में लगे हैं
– ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत की नई खेप आ गई है
– उद्धव ठाकरे से बागी होकर आए सांसद अमित शाह से मिल रहे हैं
– कांग्रेस को डर है कि कहीं DMK भी पीएम मोदी के साथ ना चले जाए
यानि सीधे सीधे कहूं तो कुर्सी की पेटी बांध लीजिए बॉस. देश की पॉलिटिक्स में आए इस लेटेस्ट तूफान का अध्याय खुलने जा रहा है लेकिन पहले इस तूफान का एक ट्रेलर देख लीजिए.
जो लोग बीते दो साल से ये माहौल बना रहे हैं कि नरेंद्र मोदी कमजोर हो गए. 2024 के नतीजों से और उनकी कुर्सी अब गई कि तब गई. आज की डेट में ये माहौल बनाने वालों का हाल ये है कि उनकी पार्टी आज गई कि कल गई वाली हालत हो गई है और पीएम मोदी ने अपने मिशन के लिए ऐसी ताकत झोंक रखी है कि बड़े बड़े दिग्गज धराशाई हो रहे हैं. इंडी गठबंधन संसद में चढ़ावा चोरी, पेपर लीक से लेकर ऐथनॉल पर मोदी सरकार को घेरने की तैयारी में लगा है, उधर इंडी गठबंधन में शामिल शरद पवार ने पूरे विपक्ष को नया करंट दे दिया.
शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने आज परिसीमन बिल पर मोदी सरकार का साथ देने के संकेत दे दिए हैं.
– सुप्रिया सुले ने सीधे सीधे परिसीमन बिल का विरोध नहीं किया.
– शर्तों के साथ समर्थन के संकेत दिए हैं.
– सुप्रिया ने कहा कि अगर सरकार परिसीमन बिल पर 50 प्रतिशत वाला फॉर्मूला लाती है तो पार्टी इस पर विचार करेगी.
परिसीमन बिल को लेकर सुप्रिया सुले का वो बयान जिससे इंडी में हड़कंप मचा हुआ है. शरद पवार की पार्टी ने पिछली बार परिसीमन बिल के विरोध में वोट किया था लेकिन अब सुप्रिया सुले इस पर विचार करने की बात कह रहे हैं इसी को समर्थन का संकेत माना जा रहा.
– क्योंकि जिस 50 प्रतिशत फॉर्मूले की बात वो कह रही हैं.
– उसी फॉर्मूले पर पिछली बार मोदी सरकार परिसीमन बिल लेकर आई थी.
– जिसमें ये प्रावधान था कि हर राज्य में आबादी के हिसाब से नहीं बल्कि
– सीधे 50 प्रतिशत सीटें लोकसभा की सीटें बढ़ जाएगी.
– सुप्रिया सुले ये ये भी संकेत दिए हैं कि सरकार 50 प्रतिशत वाली बात लिखित में दें.
– जबकि अमित शाह ने संसद में विपक्ष को तब ही कह दिया था कि लिखित में देने को तैयार हैं.
यानि सुप्रिया सुले जो कह रही है उसके लिए तो सरकार पहले से ही तैयार है अब शरद पवार की पार्टी को फैसला लेना है, और जिस तरह से सुप्रिया सुले बात कर रही हैं उसे ये संकेत माना जा रहा है कि पवार की पार्टी ने बिल का समर्थन कर सकती है. परिसीमन बिल पर शरद पवार की पार्टी के नरम रुख के बीच की कहानी भी आपको बताता हूं, क्योंकि कल शाम से लेकर रात में जो खेला हुआ है, उसके बाद से बदली हुई तस्वीर नजर आ रही है
– दरअसल, कल रात शरद पवार गुट के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस से मिले
– दूसरी ओर सत्ता में शामिल एनसीपी के नेता प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे ने भी सीएम फडणवीस से अलग बैठक की
– यानी सीएम आवास पर NCP के दोनों गुटों के नेता आए और मुख्यमंत्री से मुलाकात की
– इधर मुंबई में ये बैठकें चल रही थी, उधर दिल्ली में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे अमित शाह से मिल रहे.
– अमित शाह और एकनाथ शिंदे की मीटिंग में उद्धव गुट के 6 बागी सांसद भी मौजूद रहे.
– सूत्रों से खबर है कि अमित शाह से मुलाकात में बागी सांसदों को उनके राजनीतिक भविष्य, पार्टी बदलने पर कानूनी मदद और उनकी सीट को लेकर आश्वासन दिया गया है.
यानि दिल्ली से लेकर मुंबई तक मीटिंग पर मीटिंग चल रही थी और आज सुप्रिया सुले ने परिसीमन पर बड़ी बात कह दी. आप सुनिए एकनाथ शिंदे सुप्रिया सुले को लेकर क्या कह रहे हैं. कल अमित शाह से मिलने के बाद एकनाथ शिंदे ने इशारों में बता दिया कि मॉनसून सत्र में क्या खेला होगा..लेकिन सुप्रिया सुले ने अपने बयान पर ये सफाई दे रही हैं कि
– मीडिया में परिसीमन बिल को लेकर उनकी पार्टी का स्टैंड पर अंदाजा लगाया जा रहा है वो गलत है
– कोई भी फैसला पार्टी के अंदर गहन चर्चा और गठबंधन से चर्चा के बाद ही लिया जाएगा
– सरकार अभी कोई revised परिसीमन बिल नहीं लाई है इसलिए इस पर अंदाजा लगाना बेकार है
– अपनी पार्टी के नेता जयंत पाटिल की सीएम से मुलाकात को भी शरद पवार की पार्टी ये कहकर खारिज कर रही है कि ये मुलाकात राजनीतिक नहीं थी
– जयंत पाटिल कह रहे हैं कि वो एक प्रशासनिक काम से सीएम से मिलने गए थे कोई राजनीतिक मुलाकात नहीं हुई
सुप्रिया सुले और जयंत पाटिल के बयानों से तो यही लगेगा कि सब Speculation है..लेकिन सबको ये भी पता है कि शरद पवार इतनी आसानी से अपने पत्ते नहीं खोलते. वो इंडी गठबंधन को भी उलझाकर रखे हुए हैं और NDA को भी..क्योंकि उनकी पार्टी की कांग्रेस में विलय की चर्चा उड़ती है, कभी ये चर्चा होती है कि शरद पवार तो NDA में शामिल हो जाएंगे. बीच में ये चर्चा भी थी कि पवार की पार्टी के सांसद, विधायक NDA में जाने के पक्ष में हैं…इसलिए कुछ लोग ये भी कह रहे हैं कि पवार इंडी गठबंधन में रखकर…संसद में पीएम मोदी को सपोर्ट कर सकते हैं..जिससे उनकी पार्टी में टूट का खतरा भी कम हो जाए और वो इंडी के साथ भी बने रहे
सुप्रिया सुले…परिसीमन बिल पर समर्थन से भले भी पल्ला झाड़ ले..लेकिन खुद सुप्रिया सुले ने भी माना है कि पिछली बार जब इस बिल को लेकर सरकार से बात हुई थी तो उनकी पार्टी, अखिलेश यादव की पार्टी और DMK का रुख 50 प्रतिशत फॉर्मूले को लेकर पॉजिटिव था. सुप्रिया सुले कह रही है उनकी पार्टी और DMK का तब पॉजिटिव रुख था लेकिन उस वक्त DMK ने बिल का कड़ा विरोध किया था. तब तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव भी होने थे. अब चुनाव हो चुके हैं. DMK और कांग्रेस का झगड़ा हो गया है. DMK ने इंडी गठबंधन ने दूरी बना ली, इसलिए कांग्रेस इस टेंशन में है कि कहीं आने वाले सत्र में DMK मोदी सरकार का साथ ना दे दें.
इसे लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ये कह रहे हैं कि
– बीजेपी संसद में फिर से महिला आरक्षण को लागू करने वाला बिल लाने वाली है
– पी चिदंबरम कह रहे हैं कि TMC को तोड़ने के बाद BJP…शरद पवार की NCP (SP) और DMK को अपने पाले में करने की कोशिश कर रही है.
– पी चिदंबरम का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि NCP(SP) और DMK अपने स्टैंड पर पहले की तरह कायम रहेंगे.
– अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में पी चिदंबरम ने एम के स्टालिन और सुप्रिया सुले को भी टैग किया.
यानि कांग्रेस में ये घबराहट है कि कहीं ये दोनों पार्टियां नरेंद्र मोदी के साथ ना चलीं जाए, इसलिए आज सुप्रिया सुले की प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले कल रात को ही पी चिदंबरम ने सुप्रिया सुले को टैग करते हुए सोशल मीडिया पोस्ट की. आप देखिए कि कांग्रेस इतनी टेंशन है कि उसके नेता अब ये माहौल बना रहे हैं कि नरेंद्र मोदी तो संसद में दो तिहाई बहुमत इसलिए जुटा रहे हैं ताकी को संविधान बदल सकें.
कांग्रेस वाले माहौल बना रहे हैं कि संविधान बदलने की तैयारी है. क्योंकि अब इन्हें खुद इंडी से सपोर्ट नहीं मिल रहा है. लेकिन परिसीमन जरूरी है इसको इंडी के अंदर ही बाकी पार्टियां समझ रही हैं. अब कांग्रेस टेंशन में है कि परिसीमन बिल को कैसे रोका जाए. क्योंकि पिछली बार तो इंडी वालों ने नंबर गेम में बाजी मार ली थी अब हालात बदले हुए हैं, नंबर गेम बदल गया है. परिसीमन बिल को पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत चाहिए…यानी 360 सांसदों की जरूरत है.
अब जो समीकरण बदले हैं उसके हिसाब से देखें तो
NDA – 292 (68 वोट कम)
TMC के बागी – 20
उद्धव के बागी- 6
DMK – 22
पवार की पार्टी- 8
कुल- 348
यानि अभी भी 12 वोट कम है…इसके लिए छोटे दलों को साथ लाने की कोशिश की जाएगी जिसमें YSRCP, VCK, RLP, अकाली दल, निर्दलीयों से बात हो सकती है. आप देखिए कि इधर ये सब चल रहा है, उधर पीएम मोदी बड़े प्लान पर काम कर रहे हैं.
– आज पीएम मोदी के आवास पर बड़ी मीटिंग हुई है
– मीटिंग में अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष मौजूद हैं
– इसके अलावा बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष भी मौजूद रहे
इस मीटिंग के मायने निकाले जा रहे हैं कि क्या कुछ बड़ा होने वाला है.
पीएम मोदी की बैठक
क्या बड़ा होने वाला है?
जिस परिसीमन की बात हो रही है, वो क्या होता है, ये भी समझ लीजिए.
– परिसीमन से लोकसभा के इलाके को Redraw किया जाएगा
– यानी नए सिरे से लोकसभा क्षेत्र की बॉऊंड्री तय की जाएगी
– नए सिरे ये तय किया जाएगा कि एक लोकसभा में कितनी और कौन सी विधानसभाएं होंगी
– ये तय किया जाएगा कि कौन सी नई लोकसभा सीट बनेंगी
– आबादी के हिसाब से तय किया जाएगा कि कौन सा वोटर किस लोकसभा क्षेत्र में आएगा और कहां वोट करेगा
अब ये समझिए कि पीएम मोदी जो परिसीमन का बिल ला रहे हैं उससे क्या होगा, क्यों पीएम मोदी इस बिल को पास कराने के लिए इतना जोर लगा रहे हैं.
– परिसीमन बिल से लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ेगी
– अभी 543 सीटें हैं इसे बढ़ाकर 815 से 850 किया जाएगा
– जब नए परिसीमन से सीटों की संख्या बढ़ जाएगी
– उसके बाद बढ़ी हुई सीटों में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू किया जाएगा
लेकिन विपक्ष इस बात पर अड़ा है कि महिला आरक्षण को परिसीमन में मत जोड़ो…मौजूदा सीटों में ही आरक्षण लागू कर दो. लेकिन सरकार कह रही है कि आज नहीं तो कल परिसीमन होगा, बढ़ी हुई आबादी के हिसाब से सीटें बढ़ेगी ही…तो क्या फिर से आरक्षण के ढांचे को बदला जाए. अब आप ये भी समझिए कि परिसीमन की प्रक्रिया की जरूरत क्यों महसूस की जा रही है, क्यों सीटों की संख्या को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.
– साल 1971
– आबादी – 55 करोड़
– लोकसभा सीटें – 550 अधिकतम
– तब 1 सांसद पर – 10 लाख आबादी
– साल 2026
– आबादी – 145 करोड़ (172% आबादी बढ़ी)
– लोकसभा सीट- 550 (उतनी ही)
– अब 1 सांसद पर – 26 लाख आबादी
इसलिए मोदी सरकार ये कह रही है कि सीटों की संख्या को बढ़ाया जाना जरूरी है क्योंकि अभी क्या हो रहा है कि कुछ इलाकों में एक-एक सांसद 26 लाख लोगों का प्रतिनिधित्व कर रहा है. साउथ के राज्यों में ये आंकड़ां कम हो सकता है लेकिन बिहार और यूपी में 25 से 26 लाख आबादी पर 1 सांसद है…ये मोटा मोटा Estimate है. डिलिमिटेशन इसलिए भी जरूरी है क्योंकि ये मामला डेमोग्राफी से भी जुड़ा हुआ है. देश के कई हिस्सों में वोटबैंक पॉलिटिक्स की वजह से डेमोग्राफी चेंज हुआ है. खासतौर पर बॉर्डर के इलाके में, जिससे ये नेशनल सिक्योरिटी का मुद्दा भी है. जो डेमोग्राफी चेंज हुई है, उसे लेकर नरेंद्र मोदी लगातार बड़े मिशन में लगे हैं.
– अमित शाह ने हाल ही में डेमोग्राफी चेंज पर बनी हाई लेवल कमेटी के साथ मीटिंग की थी
– फिर उन्होंने बॉर्डर जिलों के पुलिस अधिकारियों के साथ भी बड़ी मीटिंग की मोदी ने गुगली डाली है
पिछले सत्र में बंगाल चुनाव से पहले विपक्ष ने बिल के विरोध में वोट करके
खुद को महिला विरोधी साबित करवा लिया
इस बार उसे डबल ठप्पा लगने वाला है
महिला रिजर्वेशन के साथ भ्रष्टाचार विरोधी कानून भी आ रहा है
विपक्ष इसका विरोध करती है तो फिर उनपर महिला विरोधी के साथ साथ भ्रष्टाचार समर्थक होने भी ठप्पा, आगामी बड़े चुनावों से पहले लग जाएगा.
दो प्रमुख बिल
130वां संशोधन बिल: अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री 30 दिन से ज्यादा जेल में रहे (केवल आरोप लगने पर भी), तो उन्हें हटाने का प्रावधान.
131वां संशोधन बिल: पहले पास हो चुके 33% महिला आरक्षण को Delimitation (सीटों के पुनर्निर्धारण) से जोड़ना, जिससे लोकसभा की सीटों में बड़ी बढ़ोतरी होगी.