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Tamilnadu Government Formation: क्या AIADMK का होगा शिवसेना जैसा हाल? पुडुचेरी पहुंचे...


Tamilnadu Government Formation: तमिलनाडु की राजनीति एक बार फिर उस मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है, जहां संख्या से ज्यादा महत्व भरोसे और पार्टी की अंदरूनी एकजुटता का हो जाता है. कभी जयललिता के दम पर तमिल राजनीति की सबसे ताकतवर पार्टी मानी जाने वाली AIADMK अब चुनावी नतीजों के बाद नए संकट के संकेत दे रही है. पार्टी के विधायकों को पुडुचेरी भेजे जाने की खबर ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है. यह तस्वीर लोगों को 2022 की महाराष्ट्र राजनीति की याद दिला रही है, जब उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने अपने विधायकों को बचाने की कोशिश की थी, लेकिन एकनाथ शिंदे की बगावत ने पूरी पार्टी की दिशा बदल दी. अब सवाल यही उठ रहा है कि क्या AIADMK भी उसी रास्ते पर बढ़ रही है? EPS यानी एडप्पादी पलानीस्वामी फिलहाल पार्टी को संभालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन TVK चीफ विजय की बढ़ती सक्रियता और सरकार बनाने की कोशिशों ने AIADMK के भीतर बेचैनी बढ़ा दी है. राजनीति में अक्सर होटल, रिसॉर्ट और दूसरे राज्यों में शिफ्ट किए गए विधायक सिर्फ सुरक्षा का संकेत नहीं होते, बल्कि अंदरूनी अविश्वास की कहानी भी बयान करते हैं. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. कांग्रेस का समर्थन मिलने के बाद भी विजय बहुमत से कुछ सीटें दूर हैं.

ऐसे में AIADMK के 47 विधायक अचानक बेहद अहम हो गए हैं. इसी बीच यह खबर आई कि कुछ विधायकों को पुडुचेरी ले जाया गया है. हालांकि पार्टी ने इसे अफवाह बताते हुए साफ किया कि सभी विधायक EPS से मिले हैं और पार्टी पूरी तरह एकजुट है. लेकिन राजनीति में सिर्फ बयान काफी नहीं होते. उद्धव ठाकरे की शिवसेना में भी शुरुआत में यही कहा गया था कि सब कुछ नियंत्रण में है. बाद में वही मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और सत्ता हाथ से निकल गई. यही वजह है कि अब AIADMK के हर कदम को शक की नजर से देखा जा रहा है. क्या यह सिर्फ एहतियाती रणनीति है या फिर पार्टी के भीतर कुछ बड़ा पक रहा है? फिलहाल यही चर्चा तमिलनाडु की राजनीति का सबसे बड़ा सवाल बन चुकी है.

फिलहाल पार्टी ने किसी भी तरह की टूट से इनकार किया है. (फाइल फोटो PTI)

AIADMK ने अफवाहों को बताया बेबुनियाद

  • AIADMK की तरफ से आधिकारिक बयान जारी कर कहा गया कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और सभी नवनिर्वाचित विधायक EPS के संपर्क में हैं. पार्टी प्रवक्ताओं ने मीडिया में चल रही उन खबरों को गलत बताया, जिनमें कहा गया कि MLAs को बिना जानकारी पुडुचेरी ले जाया गया.
  • पार्टी नेतृत्व का कहना है कि विरोधी दल जानबूझकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब भी किसी पार्टी को अपने विधायकों को एक जगह इकट्ठा रखना पड़ता है, तब अंदरूनी असुरक्षा की चर्चा तेज हो जाती है.
  • TVK के उभार ने AIADMK की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. विजय लगातार राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश कर रहे हैं. कांग्रेस पहले ही उनका समर्थन कर चुकी है और अब उनकी नजर अन्य दलों तथा निर्दलीय विधायकों पर है.
  • इसी वजह से AIADMK के 47 विधायक बेहद अहम हो गए हैं. अगर पार्टी में थोड़ी भी टूट होती है तो तमिलनाडु की पूरी राजनीति बदल सकती है. यही कारण है कि EPS फिलहाल किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रहे.

TVK को समर्थन नहीं, साफ संदेश

AIADMK के डिप्टी जनरल सेक्रेटरी केपी मुनुसामी ने साफ कहा कि पार्टी किसी भी हालत में TVK को समर्थन नहीं देगी. उन्होंने कहा कि यह फैसला EPS के निर्देश पर लिया गया है और पार्टी अपनी अलग पहचान बनाए रखेगी. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि AIADMK फिलहाल विपक्ष में रहकर खुद को मजबूत करना चाहती है. पार्टी को डर है कि अगर उसने TVK को समर्थन दिया तो उसकी राजनीतिक जमीन और कमजोर हो सकती है. जयललिता की विरासत वाली पार्टी के लिए यह अस्तित्व की लड़ाई भी बन चुकी है.

अगर TVK बहुमत जुटाने में सफल रहती है तो राज्य में नई सरकार बन सकती है.

क्या दोहराई जाएगी शिवसेना वाली कहानी?

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे ने भी अपने विधायकों को बचाने की कोशिश की थी लेकिन अंत में शिंदे गुट अलग हो गया. AIADMK के सामने भी फिलहाल वैसा ही खतरा दिख रहा है. हालांकि अभी पार्टी में खुलकर बगावत सामने नहीं आई है, लेकिन MLAs को लेकर चल रही खबरों ने शक जरूर पैदा कर दिया है.

EPS के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को एकजुट रखना है. अगर वे सभी गुटों को संतुष्ट रखने में सफल रहे तो पार्टी संकट से बाहर निकल सकती है. लेकिन अगर अंदरूनी असंतोष बढ़ा, तो तमिलनाडु में भी महाराष्ट्र जैसा राजनीतिक भूचाल देखने को मिल सकता है.

क्या AIADMK सच में टूट के खतरे से गुजर रही है?

फिलहाल पार्टी ने किसी भी तरह की टूट से इनकार किया है, लेकिन राजनीतिक संकेत चिंता बढ़ाने वाले हैं. विधायकों को पुडुचेरी शिफ्ट किए जाने की खबरों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कहीं पार्टी नेतृत्व को अपने ही MLAs पर भरोसा कम तो नहीं हो रहा. हालांकि अभी तक कोई खुली बगावत सामने नहीं आई है, इसलिए स्थिति पूरी तरह शिवसेना जैसी नहीं कही जा सकती.

AIADMK TVK को समर्थन क्यों नहीं देना चाहती?

AIADMK का मानना है कि TVK को समर्थन देने से उसकी खुद की राजनीतिक पहचान कमजोर पड़ सकती है. पार्टी फिलहाल खुद को एक मजबूत विपक्ष के रूप में स्थापित करना चाहती है. EPS नहीं चाहते कि विजय की लोकप्रियता के सामने AIADMK की जमीन और खिसके. यही वजह है कि पार्टी ने साफ संदेश दिया है कि TVK को किसी भी हाल में समर्थन नहीं मिलेगा.

तमिलनाडु की राजनीति में आगे क्या हो सकता है?

अगर TVK बहुमत जुटाने में सफल रहती है तो राज्य में नई सरकार बन सकती है. लेकिन अगर संख्या पूरी नहीं हुई तो राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है. AIADMK के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण है. पार्टी अगर एकजुट रहती है तो भविष्य में किंगमेकर की भूमिका निभा सकती है. लेकिन अगर अंदरूनी खींचतान बढ़ी तो महाराष्ट्र जैसी स्थिति बनने से इनकार नहीं किया जा सकता.



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