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Jamshedpur 60 Year Old Lock-Key Shop: जमशेदपुर के बिष्टुपुर बाजार में ताले-चाबी की एक दुकान है जो करीब 60 साल पुरानी है और अब इसे परिवार की तीसरी पीढ़ी चला रही है. जिस ताले की चाबी कहीं न बने, वो यहां बन जाती है. इतना ही नहीं इनके पास 40 किलो का एक ताला भी है जो आज भी लोगों के लिए किसी अजूबे से कम नहीं.
जमशेदपुर. जमशेदपुर यूं तो अपनी औद्योगिक पहचान और आधुनिक विकास के लिए जाना जाता है, लेकिन इस शहर की पहचान उसकी पुरानी विरासत और वर्षों से चली आ रही दुकानों से भी जुड़ी हुई है. शहर के बीचों-बीच बिष्टुपुर बाजार में स्थित एक ऐसी ही खास दुकान है – द की वर्ल्ड, जिसने पिछले करीब 60 वर्षों से लोगों के भरोसे को बनाए रखा है. यहां सिर्फ साधारण ताले ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के कई तरह के खोए हुए तालों की चाबी भी तैयार की जाती है.
60 साल पहले शुरुआत
इस दुकान की शुरुआत करीब 60 साल पहले मोहम्मद गुलाम रब्बानी ने की थी. उस समय चाबी बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह हाथों से की जाती थी. एक छोटी धातु की पट्टी को घंटों तक फाइल से घिसकर और आकार देकर चाबी तैयार की जाती थी. उस दौर में यह काम काफी मेहनत और अनुभव का माना जाता था. धीरे-धीरे लोगों का भरोसा बढ़ता गया और यह दुकान जमशेदपुर में अपनी अलग पहचान बनाती चली गई.
तीसरी पीढ़ी आगे बढ़ा रही है
आज इस विरासत को उनकी तीसरी पीढ़ी आगे बढ़ा रही है. दुकान का संचालन अब उनके पोते वसीम कर रहे हैं. वसीम बताते हैं कि समय के साथ तकनीक बदल गई है और अब चाबी बनाने का तरीका भी काफी आधुनिक हो चुका है. पहले जहां एक चाबी बनाने में काफी समय लगता था, वहीं अब नई ऑटोमेटिक मशीनों की मदद से अधिक सटीक और बेहतर तरीके से काम किया जा रहा है.
विरासत में मिला हुनर
वसीम के अनुसार, यहां कार, बाइक, घर, ऑफिस से लेकर तिजोरी तक की चाबियां बनाई जाती हैं. कई बार ऐसे ताले भी आते हैं, जिनकी चाबी कहीं और नहीं बन पाती, लेकिन वर्षों के अनुभव और नई तकनीक के सहारे यहां उनका समाधान निकल जाता है. उनका कहना है कि यह हुनर उन्हें विरासत में मिला है और वे इसे एक जिम्मेदारी की तरह आगे बढ़ा रहे हैं.
40 किलो का ताला
दुकान की एक और खास पहचान वह विशाल ताला है, जो आज भी यहां सुरक्षित रखा गया है. बताया जाता है कि इसे वसीम के दादा ने करीब 40 किलो वजन का ताला बनाकर तैयार किया था. आज भी उसकी चाबी मौजूद है और वह दुकान की पुरानी पहचान और कारीगरी की मिसाल बना हुआ है.
वसीम कहते हैं कि जमशेदपुरवासियों का प्यार और भरोसा ही उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है. बदलते समय में मशीनें जरूर आ गई हैं, लेकिन मेहनत, अनुभव और विरासत की पहचान आज भी उसी तरह कायम है.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें