भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

अर्नब तूफान से फीकी होगी कुम्हारों की दिवाली!:बारिश के अलर्ट ने बढ़ाई...




पश्चिमी सिंहभूम जिले में अर्णव चक्रवात के कारण ऑरेंज अलर्ट जारी हुआ है। 28 और 29 अक्टूबर को मूसलाधार बारिश की संभावना है। साथ ही दीपावली के आसपास भी बारिश होने की आशंका बनी हुई है। ऐसे में दिवाली से पहले मौसम बिगड़ने से दीये बनाने वाले कुम्हारों की चिंता बढ़ गई है। उन्हें अपनी मेहनत और कारोबार पर असर पड़ने का डर है। दीये बनाने का काम कई चरणों में होता है। मिट्टी तैयार कर चाक पर दीये बनते हैं, फिर धूप में सुखाकर पकाए जाते हैं। दीयों को सुखाना मुश्किल इस पूरी प्रक्रिया में समय और लागत लगती है। लगातार बारिश होने पर खुले में रखे दीयों को सुखाना और तैयार माल को बचाना मुश्किल होगा। इससे दिवाली की बिक्री पर असर पड़ सकता है। कुम्हार मोहन लाल प्रजापति ने बताया कि मौसम को देखते हुए इस बार वे पिछले साल से कम दीये बना रहे हैं। उन्हें डर है कि बारिश हुई तो दीयों को सुखाने और सुरक्षित रखने में दिक्कत होगी। इससे माल खराब होने और आर्थिक नुकसान का खतरा है। व्यवसाय को जारी रखना चुनौतीपूर्ण दिवाली में ही कुम्हारों को ज्यादा आय होती है पर इस बार उसपर भी चक्रवात की वजह से ग्रहण लग गया है। कुम्हार टोली, चाईबासा के कुम्हार विजय कुमार ने बताया कि मिट्टी के दीये बनाने के काम में काफी मेहनत लगती है। मिट्टी तैयार करने से लेकर दीये बनाने, सुखाने और बिक्री के लिए तैयार करने तक कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। उन्होंने चिंता जताई कि उनकी अगली पीढ़ी इस पारंपरिक काम को आगे बढ़ाने में रुचि नहीं दिखा रही है। ऐसे में भविष्य में इस व्यवसाय को जारी रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। महिला कुम्हार शोभा देवी ने बताया कि मिट्टी के दीये-बर्तन बनाना उनके परिवार का मुख्य पेशा है और इसी से घर का खर्च चलता है। उन्होंने कहा कि अगर बारिश होती है, तो उनका काम पूरी तरह बंद हो सकता है। इससे परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा होने की आशंका है। दीये बनाने, सुखाने या बाजार तक पहुंचाने में बाधा दिवाली कुम्हारों के लिए साल के महत्वपूर्ण कारोबारी अवसरों में से एक है। इसी दौरान मिट्टी के दीयों की मांग बढ़ती है और बिक्री से होने वाली कमाई परिवारों को आर्थिक सहारा देती है। बारिश के कारण दीये बनाने, सुखाने या बाजार तक पहुंचाने में बाधा आती है तो इसका असर उनकी आय पर पड़ सकता है। पर्याप्त शेड और सुरक्षित जगह की कमी होने पर परेशानी और बढ़ सकती है।



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top