आनंद मार्ग प्रचारक संघ के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय आनंद मार्ग धर्म महा सम्मेलन का शुभारंभ प्रभात संगीत, कीर्तन और सामूहिक ध्यान के साथ हुआ। देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने इस आध्यात्मिक आयोजन में भाग लिया। मुख्य वक्ता आचार्य विकासानंद अवधूत ने संघ के संस्थापक श्री आनंदमूर्ति के विचारों और मानव कल्याण में उनके योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ईश्वर की प्राप्ति कठिन साधना से नहीं, बल्कि सच्चे, सरल और निर्मल भाव से संभव है। उन्होंने कहा कि ईश्वर और मनुष्य का संबंध माता-पिता और संतान जैसा आत्मीय होता है, जिसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं है। आचार्य ने बताया कि अहंकार ईश्वर की कृपा प्राप्त करने में सबसे बड़ी बाधा है, जबकि विनम्रता और समर्पण साधना की सफलता का आधार हैं। महा सम्मेलन के दौरान रेनासा के सदस्यों ने रंगारंग कार्यक्रम की प्रस्तुति दी।
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