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आम की बागवानी करने वाले हो जाएं सावधान, मई में होने वाली...


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मई में होने वाली बारिश से आम की फसल हो सकती है बर्बाद, तुरंत करें ये उपाय

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मई में होने वाली असमय बारिश और बदलते मौसम ने आम की बागवानी करने वाले किसानों की चिंता बढ़ा दी है. नमी और तेज हवाओं के कारण बौर झड़ने, रोग और कीटों का खतरा बढ़ जाता है, जिससे फसल को भारी नुकसान हो सकता है. ऐसे में समय रहते सही उपाय और कीट प्रबंधन अपनाना बेहद जरूरी है.

आजमगढ़ समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों में मई महीने में हो रही असमय बारिश और अचानक मौसम में बदलाव फसलों के लिए घातक साबित हो रहा है. खासकर अमरूद और आम की बागवानी पर इसका बुरा असर पड़ रहा है. इस तरह के मौसम के कारण फसलों में विभिन्न प्रकार के रोगों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे में फसल को बचाने के लिए किसानों को तुरंत जरूरी उपाय करने चाहिए. प्रभावित हिस्सों को तुरंत पेड़ से काटकर अलग कर दें और उन्हें इकट्ठा करके जमीन में गड्ढा खोदकर दबा दें. कटाई करते समय यह ध्यान रखें कि केवल प्रभावित हिस्सा ही हटाया जाए, ताकि बाकी फसल को नुकसान न हो.

मई की शुरुआत में आंधी-तूफान और बेमौसम बारिश का असर खेतों में लगी फसलों पर अलग-अलग तरह से पड़ता है. कुछ फसलों के लिए यह लाभकारी हो सकता है, लेकिन अधिकांश बागवानी फसलों के लिए यह हानिकारक साबित होता है.

बदलते मौसम और बारिश के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है. तेज हवाओं और आंधी से आम के पेड़ों पर लगे बौर झड़ रहे हैं. वहीं, अधिक नमी के कारण मिट्टी में रोगों का खतरा भी बढ़ गया है.

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फलों को सुरक्षित रखने के लिए कीटनाशकों का छिड़काव बेहद जरूरी है. किसानों को नियमित रूप से स्प्रे करना चाहिए, जिससे कीट और रोगों का प्रभाव कम हो सके और दोबारा संक्रमण का खतरा घटे.

अधिक नमी और बदलते मौसम के कारण आम के पेड़ों में ‘गुम्मा’ रोग का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा मैंगो हॉपर जैसे कीट भी फसल को नुकसान पहुंचाते हैं. कृषि विशेषज्ञ डॉ. विजय विमल के अनुसार, किसानों को समय रहते इन रोगों की पहचान कर प्रभावित हिस्सों को हटाने और उचित प्रबंधन करने की आवश्यकता है.

ये रोग आम के पत्तों और फूलों को बुरी तरह प्रभावित करते हैं. नमी के कारण आम के फूलों में फुदका (मैंगो हॉपर) छिपने लगते हैं, जिससे पूरा फल खराब हो सकता है.

जहां एक ओर तापमान में वृद्धि से फसलों की बढ़वार को लाभ मिलता है, वहीं दूसरी ओर असमय बारिश से रोगों का खतरा बढ़ जाता है, जो बागवानी करने वाले किसानों के लिए नुकसानदायक है. ऐसे में फसल को सुरक्षित रखने के लिए समय पर कीट प्रबंधन और रोग नियंत्रण बेहद जरूरी है.

यदि किसान समय रहते सही उपाय अपनाएं, तो फसलों को खराब होने से बचाया जा सकता है और उत्पादन पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकता है, जिससे आर्थिक नुकसान से भी बचाव संभव है.



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