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इधर, बगोदर में दो घंटे तक मूसलाधार बारिश, सड़कों पर जमा पानी




भास्कर न्यूज |गिरिडीह बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ के प्रभाव से राज्य समेत गिरिडीह जिले के मौसम का मिजाज बदल गया है। नवंबर की शुरुआत के साथ ही सोमवार सुबह हल्का से मध्यम कोहरा छाया रहा, जबकि दिनभर बादलों की आवाजाही बनी रही। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार जिले में 4 नवंबर तक गरज के साथ हल्की से मध्यम बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है।इस मौसमी बदलाव से तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव बना रहेगा। पूर्वानुमान के मुताबिक 5 नवंबर से आसमान साफ होने लगेगा। इसके बाद 6 नवंबर से न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे सुबह और रात के समय ठंड का असर बढ़ जाएगा। वहीं नवंबर के दूसरे पखवाड़े से जिले में कनकनी में और इजाफा होने की संभावना है। भास्कर न्यूज | बगोदर बगोदर और आसपास के इलाकों में सोमवार की शाम मौसम ने अचानक करवट ले ली। शाम करीब 4 बजे शुरू हुई तेज मूसलाधार बारिश लगातार दो घंटे तक होती रही। तेज बारिश के चलते मुख्य सड़कों पर तेज बहाव के साथ पानी बहने लगा, जिससे सड़कें नदी जैसी नजर आने लगीं। अचानक हुई इस झमाझम बारिश से आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। शाम के वक्त हाट-बाजार में खरीदारी करने पहुंचे लोगों, राहगीरों और दुकानदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। दुकानदारों को अपनी खुली दुकानों से सामान समेटने और बचाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। सड़कों पर जलजमाव और तेज बहाव के कारण वाहनों की रफ्तार थम गई। बारिश रुकने के काफी देर बाद तक कई निचले इलाकों और सड़कों पर पानी भरा रहा, जिससे आवागमन में लोगों को फजीहत झेलनी पड़ी। मौसम विभाग के अनुसार गंभीर चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ रहा है। हालांकि, बगोदर में हुई इस मूसलाधार बारिश का चक्रवात से सीधा संबंध होने को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। खेतों में जलनिकासी रखें दुरुस्त, नमी से रोग की आशंका : मधुकर मौसम सह कृषि सलाहकार मधुकर कुमार ने कहा कि चक्रवाती तूफान के असर से होने वाली बारिश और बादलों से तापमान में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। 4 नवंबर के बाद मौसम साफ होते ही ठंड बढ़ेगी। किसान बारिश और बढ़ती नमी को देखते हुए खेतों में जलनिकासी की मुकम्मल व्यवस्था रखें और फसलों की लगातार निगरानी करें, क्योंकि अधिक नमी से फसलों में फफूंद व कीट जनित रोग लगने का खतरा बढ़ जाता है।



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