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देशभर में नदियों की सफाई पर करोड़ों खर्च हो रहे हैं, लेकिन उज्जैन की क्षिप्रा पर बिना अतिरिक्त बजट एक अनोखी पहल मिसाल बन रही है.श्रीराम घाट की संध्या आरती में रोज हजारों श्रद्धालु संकल्प ले रहे हैं कि पूजा सामग्री नदियों में प्रवाहित नहीं करेंगे 50 दिनों में ढाई लाख लोग जुड़ चुके हैं, और क्षिप्रा में इसका सकारात्मक असर भी दिखने लगा है.
धार्मिक नगरी उज्जैन मे रोजाना लाखो की संख्या मे श्रद्धांलु का आगमन होता है. यहां मोक्षदयनी दायनी माँ शिप्रा का वास है. जो खास महत्व रखती है. यहां होने वाली आरती अपने एक अलग ही अनुभव के लिए पहचानी जाती है. देखा जा रहा है कि देशभर में नदियों की सफाई पर करोड़ों खर्च हो रहे हैं, लेकिन उज्जैन का एक अनोखा मॉडल बिना अतिरिक्त बजट के मिसाल बन रहा है. मां क्षिप्रा की संध्या आरती अब पर्यावरण संरक्षण का अभियान बन चुकी है. श्रद्धालुओं को संकल्प दिलाया जा रहा है कि वे पूजन सामग्री नदियों में प्रवाहित नहीं करेंगे. 50 दिनों में ढाई लाख से अधिक लोग इस मुहिम से जुड़ चुके हैं. इसका सकारात्मक असर क्षिप्रा घाटों पर साफ दिखाई देने लगा है.
पंडा समिति के अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी ने बताया कि उज्जैन के श्रीराम घाट पर हर शाम होने वाली क्षिप्रा आरती अब पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रही है. तीर्थ पुरोहित श्रद्धालुओं से संकल्प कराते हैं कि पूजा के बाद बची सामग्री नदी में प्रवाहित नहीं करेंगे. फूल-पत्तियों जैसी जैविक सामग्री को गमलों या बगीचों में उपयोग करने और अन्य कचरे का उचित निपटान करने की सीख दी जाती है. लोगों की सोच बदलने वाली यह पहल देश के लिए प्रेरणादायक मिसाल बन रही है.
जानिए कब से शुरू हुई अनोखी अपील
पंडा समिति के अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी के अनुसार, 25 अप्रैल 2026 से शुरू हुए इस जनजागरण अभियान से 15 जून तक करीब ढाई लाख श्रद्धालु जुड़ चुके हैं. संध्या आरती में प्रतिदिन आने वाले लगभग 15 हजार श्रद्धालुओं को नदी-तालाब संरक्षण का संकल्प दिलाया जाता है. पंडे-पुजारी, नगर निगम और होमगार्ड भी लोगों को जल स्रोतों को प्रदूषित न करने के लिए जागरूक कर रहे हैं, जिसका सकारात्मक असर अब घाटों पर साफ नजर आने लगा है. हमने देश के विभिन्न राज्यों से उज्जैन पहुंचे श्रद्धालुओं से बातचीत की. हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से आए श्रद्धालुओं का कहना था कि यदि लोग अपनी धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी भी निभाएं, तो नदियों और तालाबों को प्रदूषण से बचाने की दिशा में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है.
लोगो ने लिया संकल्प
उज्जैन की पावन क्षिप्रा आरती अब सिर्फ आस्था का नहीं, बल्कि जनजागरण का भी माध्यम बन गई है. हरियाणा, राजस्थान और बुंदेलखंड व अन्य राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने संकल्प लिया कि वे नदियों में पूजा सामग्री, कचरा और खंडित वस्तुएं प्रवाहित नहीं करेंगे तथा दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे. नदी विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी योजनाओं के साथ जनभागीदारी जुड़ जाए तो नदी संरक्षण का लक्ष्य तेजी से हासिल किया जा सकता है. पंडा समिति के अनुसार, संध्याकालीन आरती में लिया गया यह संकल्प नदियों के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी का संदेश देता है, जो देशभर में मिसाल बन सकता है.