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जेएसएससी द्वारा अप्रैल 2026 में आयोजित उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में कथित पेपर लीक मामले में अंतरराज्यीय सिंडिकेट के खिलाफ रांची पुलिस ने कोर्ट में 2400 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर दी है। तमाड़ थाना (कांड संख्या 21/2026) से जुड़े इस मामले में पुलिस ने साक्ष्यों को आधार बनाते हुए 179 आरोपियों को नामजद किया है। इस मामले में रांची पुलिस ने कुल 169 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनमें 159 अभ्यर्थी भी शामिल थे। हालांकि इन सभी अभ्यर्थियों को कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। चार्जशीट में पुलिस की ओर से यह जानकारी दी गई है कि गिरोह के पास कोई असली प्रश्नपत्र लीक होकर नहीं आया था। शातिरों ने पिछले 10 साल की प्रतियोगी परीक्षाओं के पुराने पर्चों को मिला कर गेस वर्क के आधार पर एक फर्जी सेट तैयार किया और परीक्षा कंडक्टिंग एजेंसी से लीक होने की अफवाह फैलाकर बेरोजगार युवाओं से पैसों की डील कर ली। मास्टरमाइंड्स: किस आरोपी का क्या था रोल विकास कुमार… परीक्षा की रात उत्तर रटवाने का था जिम्मा: आरोपी विकास कुमार बिहार पटना के माल सलामी का रहने वाला है। उसने पुलिस पूछताछ में बताया है कि अपने सहयोगी चुनचुन कुमार के माध्यम से परीक्षा संचालन एजेंसी से चुराया गया प्रश्नपत्र और उत्तर व्हाट्सएप पर प्राप्त किया था। आरोप है कि अन्य 4 साथियों के साथ मिलकर परीक्षा से ठीक एक रात पहले (11 अप्रैल को) छात्रों को उत्तर रटवा रहा था। मुकेश कुमार उर्फ शेर सिंह… रांची का मुख्य व्यवस्थापक: मुकेश कुमार उर्फ शेर सिंह बिहार के पूर्वी चंपारण का रहने वाला है। उस पर आरोप है कि गिरोह के मुख्य सदस्य क्रिस्टोफर को रड़गांव में लॉजिस्टिक्स और ठहरने की सारी व्यवस्थाएं इसी ने मुहैया कराई थी। उसने साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से क्रिस्टोफर का नंबर डिलीट करने और नए मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने की कोशिश की थी। -शेष पेज 9 पर आशीष कुमार… कैंडिडेट जुटाने वाला मुख्य एजेंट: आशीष कुमार रामगढ़ मांडू का निवासी है। आरोप है कि वह गिरोह के प्रमुख एजेंटों में से एक है। उसने गुलाब यादव, योगेश यादव और अतुल वत्स की मदद से छात्रों को सरकारी नौकरी का झांसा देकर फंसाया। उनका एडमिट कार्ड व्हाट्सएप के माध्यम से सिंडिकेट तक पहुंचाया। उसकी कार (जेएच-02एए 8001) का इस्तेमाल छात्रों को लाने-ले जाने में हुआ था। अतुल वत्स… जयपुर से रांची तक पेपर लीक मामले का पुराना खिलाड़ी: मुख्य आरोपी अतुल वत्स मूल रूप से जहानाबाद का है, जो पटना के बोरिंग रोड नेहरू नगर में रहता है। वह इस सिंडिकेट का पुराना खिलाड़ी है। आरोप है कि उसने व्हाट्सएप के जरिए सैकड़ों छात्रों को लीक प्रश्नपत्र का लालच देकर फंसाया। उनके एडमिट कार्ड लिए और उन्हें रांची के रड़गांव बुलाया। वह पूर्व में भी जयपुर में पेपर लीक (एसओजी थाना कांड सं. 04/2018) और झारखंड सीजीएल परीक्षा (2024) पेपर लीक मामले में शामिल रहा है।
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