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एक साल के भीतर उठा पिता, पति और ससुर का साया, पेट...


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Ranchi Women Struggle Story: रांची के अंगढ़ा ब्लॉक की उजाला देवी के जीवन में इस कदर परेशानियां आयी कि एक साल के अंदर उनके पिता, पति और ससुर की मौत हो गई. वो पेट पालने के लिए मजदूरी करने को मजबूर हो गईं लेकिन इससे काम नहीं चल रहा था. फिर वे स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं और आज महीने के 40 से 50 हजार तक कमा रही हैं.

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रांची. रांची के अंगढ़ा ब्लॉक की रहने वाली उजाला देवी को सरकार की तरफ से भी कई सम्मान मिल चुके हैं. बेस्ट सेल्फ हेल्प ग्रुप समेत कई पुरस्कार उन्होंने अपने नाम किए हैं. उजाला बताती हैं कि एक साल के अंदर उनके ससुर, पति और पिता, तीनों का निधन हो जाना बहुत बड़ा सदमा था. इसके बाद उन्होंने घर चलाने के लिए मजदूरी की, राजमिस्त्री का काम किया. फिर वह स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं और वहां से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी बदलनी शुरू हुई.

उन्होंने बताया कि उन्होंने मड़वा के लड्डू, शहद, तरह-तरह के अचार, पापड़ और तेल बनाना शुरू किया और उनकी पैकेजिंग भी शुरू की. आज आलम यह है कि वह फार्मर प्रोड्यूस ऑर्गेनाइजेशन के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की मेंबर भी हैं. आज उनकी कमाई आराम से 40 से 50 हजार रुपये महीने तक पहुंच जाती है.

स्वयं सहायता समूह ने बदल दी जिंदगी
उजाला देवी बताती हैं, मेरे समूह का नाम नीम फूल फार्मर प्रोड्यूस कंपनी है. इसके तहत हम लोग कई तरह की चीजें बनाने का काम करते हैं. इसके लिए हमें सरकार की तरफ से ट्रेनिंग भी मिली है और समय-समय पर मिलती भी रहती है. हमें मार्केटिंग के लिए इंडियामार्ट जैसी वेबसाइट और सरकारी मेलों में भी मुफ्त में जाने का अवसर मिलता है. इसी बहाने मुंबई और दिल्ली घूमना भी हो जाता है.

उन्होंने बताया कि खासतौर पर हम लोग मड़वा का आटा और मड़वा से लड्डू बनाने का काम करते हैं. हमारे पास आपको जामुन का सिरका, शुद्ध सरसों का तेल और ऑर्गेनिक तिल का तेल भी देखने को मिलेगा. इन सभी चीजों की पैकेजिंग भी हम अपने हाथों से एकदम ब्रांडेड की तरह करते हैं. हमारा तो एक ही मेले में कई बार लाख रुपये तक की बिक्री हो जाती है.

कभी एक दिन की मजदूरी में मिलते थे 100-200 रुपये
कभी ऐसा था कि एक दिन की मजदूरी में 100-200 रुपये मिलते थे. लेकिन मैंने भी हार नहीं मानी. घर चलाना और पापी पेट का सवाल था, जो मिलता उसी में रूखा-सूखा नमक-भात खाकर गुजारा करते थे. आज आलम यह है कि मेरा एक बेटा है, जिसे मैं अकेले पालती हूं. वह प्राइवेट स्कूल में पढ़ता है और आज खाने में हर तरह के व्यंजन थाली में देखने को मिलते हैं.

About the Author

Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें



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