केतार| निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर शनिवार को केतार प्रखंड के सभागार कक्ष में विशेष प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रशांत कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस प्रशिक्षण में अतिरिक्त रूप से लगाए गए कर्मियों, कनीय अभियंता, जेएसएलपीएस कार्यक्रम पदाधिकारी, पंचायत सहायक एवं सीएससी वीएलई को कार्य प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई। इस मौके पर प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी मुकेश मेहता ने बताया कि प्रखंड क्षेत्र में इन्यूमरेशन फॉर्म के वितरण और संग्रहण का कार्य तेज़ी से चल रहा है। अभियान के तहत सभी बीएलओ और बीएलओ सुपरवाइजर अपने-अपने बूथ क्षेत्रों में घर-घर जाकर मतदाताओं को फॉर्म उपलब्ध करा रहे हैं और भरे हुए फॉर्म हस्ताक्षर के साथ वापस भी ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस विशेष अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन, शुद्ध और त्रुटिरहित बनाना है, ताकि कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न रहे। बीएलओ द्वारा मतदाताओं को फॉर्म भरने की प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेजों और निर्धारित समय सीमा की भी जानकारी दी जा रही है। केतार| प्रखंड के सिंहपुर मध्य विद्यालय में शनिवार को पंचायत के मुखिया मूंगा साह ने औचक निरीक्षण कर शैक्षणिक व प्रशासनिक व्यवस्था की पड़ताल की। इस दौरान छात्र एवं शिक्षक उपस्थिति पंजी के साथ-साथ मध्याह्न भोजन (एमडीएम) से जुड़े अभिलेखों की जांच की गई। निरीक्षण में विद्यालय के 140 नामांकित छात्रों में से मात्र 11 छात्र उपस्थित मिले, जबकि उपस्थिति पंजी में करीब 70 छात्रों की हाजिरी दर्ज पाई गई। इस गंभीर अंतर को लेकर मुखिया ने कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे बड़ी अनियमितता बताया। उन्होंने कहा कि स्थानीय ग्रामीणों से लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर यह जांच की गई, जिसमें कई खामियां सामने आई हैं। मामले की शिकायत वरीय पदाधिकारियों से किए जाने की बात भी उन्होंने कही। वहीं प्रभारी शिक्षक राम कुमार राम ने पास के गांव में आयोजित यज्ञ को कम उपस्थिति का कारण बताया। मौके पर मौजूद वार्ड सदस्य संतोष पासवान ने भी इस बात का समर्थन करते हुए कहा कि सामान्य दिनों में विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति बेहतर रहती है। केतार| प्रखंड की चर्चित पंडा नदी में आखिरकार पानी आने से इलाके में खुशी का माहौल है। कभी सालों भर बहने वाली यह नदी पिछले कई महीनों से सूखी पड़ी रहती थी। लेकिन जून बीतने के बाद जुलाई में पानी का बहाव शुरू हुआ है। नदी किनारे बसे ग्रामीणों का कहना है कि पहले पंडा नदी से सिंचाई और पशुपालन दोनों को भरपूर सहारा मिलता था, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। वर्तमान में नदी में सिर्फ 5–6 महीने ही पानी टिक पाता है। इस साल मानसून में देरी के बावजूद नदी में पानी आने से किसानों में उम्मीद जगी है। हालांकि सिंहपुर गांव के आगे अब भी नदी का पानी नहीं पहुंच सका है, जिससे वहां के लोग अभी भी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
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