Last Updated:
केतन मर्डर केस की जांच में महाराष्ट्र पुलिस अब सीआईए की ‘गेट एनालिसिस’ टेक्निक का सहारा लेगी. दरअसल, सीसीटीवी फुटेज में आरोपी चेतन चौधरी का चेहरा हुडी से ढका होने के कारण उसकी पहचान सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है. इसी चुनौती से निपटने के लिए महाराष्ट्र पुलिस अब सीआईए वाली ट्रिक का इस्तेमाल करने जा रही है.
केतन हत्याकांड में पुणे पुलिस ने आरोपी चेतन चौधरी का गेट एनालिसिस कराने का फैसला किया है.
Ketan Murder Case: पाकिस्तान में छिपे अंतर्राष्ट्रीय आतंकी ओसामा बिन लादेन की पहचान सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने एक खास ट्रिक का इस्तेमाल किया था. अब सीआईए की इसी ट्रिक का इस्तेमाल महाराष्ट्र पुलिस केतन हत्याकांड में करने जा रही है. दरअसल, केतन हत्याकांड की जांच कर रही महाराष्ट्र पुलिस ने सबूत के तौर पर जो भी सीसीटीवी फुटेज इकट्ठा किए हैं, उन सभी में आरोपी चेतन चौधरी हुडी पहने हुए नजर आ रहा है. हुडी के चलते चेतन चौधरी का चेहरा ढका हुआ है. ऐसे में, महाराष्ट्र पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह साबित करना है कि हुडी के अंदर मौजूद शख्स आरोपी चेतन चौधरी ही है.
इस चुनौती से निपटने के लिए महाराष्ट्र पुलिस ने सीआईए वाली ट्रिक को अपनाने का फैसला किया है. जी हां, सीआईए की इस ट्रिक का नाम ‘गेट एनालिसिस’ है. सीआईए ने इसी गेट एनालिसिस के जरिए यह सुनिश्चित किया था कि पाकिस्तान के एबटाबाद स्थिति ठिकाने पर मौजूद शख्स ओसामा बिन लादेन ही है. गेट एनालिसिस से पुख्ता होने के बाद अमेरिकी सेना ने उसे ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था. अब केतन हत्याकांड के आरोपी चेतन चौधरी की पहचान सुनिश्चित करने के लिए गेट एनालिसिस कराने का फैसला किया गया है. ऐसे में, अब बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि गेट एनालिसिस क्या है और उससे चेतन की पहचान कैसे सुनिश्चित होगी.
क्या है गेट एनालिसिस और कैसे होती है जांच?
- गेट एनालिसिस का मतलब किसी इंसान के चलने के तरीके का साइंटिफिक स्टडी करना होता है. इस स्टडी में एक्सपर्ट्स यह देखते हैं कि कोई व्यक्ति कैसे चलता है, कितनी स्पीड से चलता है, उसके कदम कितनी दूरी पर पड़ते हैं, शरीर का बैलेंस कैसा रहता है और चलते समय हाथ-पैर किस तरह मूव करते हैं.
- एक्सपर्ट्स के अनुसार, हर इंसान की चाल अलग होती है. किसी की चाल तेज होती है, कोई धीरे चलता है, कोई चलते समय थोड़ा झुक जाता है, तो कोई एक पैर पर ज्यादा वजन डालता है. उम्र, शरीर की बनावट, पुरानी चोट, जूते और रोजमर्रा की आदतें भी चाल को बदल देती हैं.
- एनालिसिस के दौरान एक्सपर्ट्स यह देखते हैं कि आरोपी चलते समय कंधे कैसे हिलाता है, शरीर कितना आगे या पीछे झुकता है, हाथ कितनी तेजी से स्विंग करते हैं और किसी एक पैर पर ज्यादा वजन तो नहीं डालता. यह ऐसी चीजें हैं जिन्हें कोई इंसान हर समय कंट्रोल नहीं कर पाता.
- एक्सपर्ट्स के अनुसार जब किसी आरोपी का चेहरा साफ दिखाई नहीं देता, फिंगरप्रिंट नहीं मिलते या आवाज से पहचान मुश्किल होती है, तब आरोपी की चाल उसकी पहचान सुनिश्चित करने में काफी मददगार साबित होती है. इस एनालिसिस के जरिए पुलिस यह साबित कर सकती है कि नकाब के पीछे छिपा शख्स वही है.
- वहीं, जांच की बात करें तो गेट एनालिसिस की शुरुआत आमतौर पर सीसीटीवी फुटेज या किसी वीडियो रिकॉर्डिंग से होती है. सबसे पहले एक्सपर्ट्स उस वीडियो को कई बार देखते हैं. जरूरत पड़ने पर वीडियो को स्लो मोशन में चलाया जाता है और फ्रेम-बाय-फ्रेम भी देखा जाता है.
- इससे व्यक्ति के चलने के छोटे-छोटे पैटर्न समझ में आते हैं. अगर पुलिस के पास कोई संदिग्ध होता है, तो उसका भी अलग से वीडियो रिकॉर्ड किया जा सकता है. कई बार उससे वही तरह के कपड़े पहनकर या उसी तरह के जूते पहनकर चलने को कहा जाता है, जैसे वह सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दे रहा हो.
सजा दिलाने में कितनी अहम साबित होगी गेट एनालिसिस
केतन हत्याकांड में फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह साबित करना है कि हुडी में मौजूद शख्स चेतन चौधरी ही है. गेट एनालिसिस के जरिए यह साइंटिफिक तरीके से प्रूफ हो जाएगा कि आरोपी सिया के साथ लोहागढ़ किले में दाखिल होने वाला शख्स कोई और नहीं बल्कि चेतन चौधरी ही है. महाराष्ट्र पुलिस इसी एनालिसिस रिपोर्ट के जरिए यह साबित कर सकती है कि हत्या के वक्त सिया के साथ मौजूद शख्स चेतन चौधरी था और उसके उसकी गुनाह की सही सजा दिलाई जा सकती है.
About the Author
Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें