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कंटीली तारें, लाठीचार्ज, घायल स्टूडेंट, झारखंड की शॉकिंग तस्वीरें… राहुल-कॉकरोच तो फुल...


इस देश में मोदी विरोध के चक्कर में कुछ लोगों की पॉलिटिक्स का लेवल किस कदर नीचे चला गया है इसका सबूत आज झारखंड के छात्र आंदोलन से आया है. आपके बच्चे की शिक्षा, उसकी चोट, उसका दर्द… सब मोदी विरोध के काम आए तो कुछ नेताओं और उनके इकोसिस्टम को दिखता है. वरना सब धृतराष्ट्र बने बैठ जाते हैं. आज झारखंड से जो शॉकिंग तस्वीरें आई हैं, उन तस्वीरों ने मोदी विरोधियों को पूरी तरह से एक्सपोज करके रख दिया है. क्या राहुल गांधी, क्या कॉकरोच पार्टी वाले, क्या डफली गैंग, क्या आंदोलनजीवी और क्या सोशल मीडिया के रीलबाज… ये सारे लोग जंतर मंतर के लिए तो छाती फाड़ आंसू बहा रहे थे. लेकिन आज जब झारखंड के छात्रों पर लाठियां चलीं तो सब सन्नाटे में हैं. इन्हें झारखंड के छात्रों पर पड़ी लाठी नहीं दिख रही. इनके लिए झारखंड के बच्चों पर पुलिस की लाठी के जख्म नहीं दिख रहे.

अब ये लोग नहीं पूछ रहे हैं कि लाठी चलाने का ऑर्डर किसने दिया. आंसू गैस के गोले दागने का ऑर्डर कहां से आ गया. आज झारखंड के बच्चों पर लाठियां चली. उन पर आंसू गैस के गोले चलाए गए. स्टूडेंट्स को मारा गया. लड़कियों को मारा गया. किसी के हाथ में चोट आई, किसी के सिर पर चोट आई. स्टूडेंट्स को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया. ये वो बच्चे हैं, जो ना किसी को गाली दे रहे थे. ना किसी पर पत्थर फेक रहे थे. ना किसी की लिचिंग कर रहे थे. ना पुलिस की गाड़ी तोड़ रहे थे. ना किसी से भिड़ रहे थे. ये चुपचाप शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहे थे. लेकिन फिर भी उन्हें लाठियों से कैसे पीटा गया.

छात्रों के साथ पुलिस की बर्बरता

कैसे इन बच्चों के साथ बर्बरता की गई, उसकी तस्वीरें बहुत ही हैरान करने वाली हैं. क्योंकि पहले तो छात्रों को रोकने के लिए कंटीली तारें लगा दी गई. फिर छात्रों पर लाठी बरसा दी गई. इंडी वाले तो जंतर मंतर की लाठी पर अब तक बवाल काट रहे हैं. अमित शाह से जवाब मांग रहे हैं. लेकिन झारखंड में छात्रों पर पड़ी लाठी का क्या ये जवाब मांगेंगे. क्या ये लोग सीएम आवास के बाहर धरना देंगे. जंतर मंतर के मामले में तो राहुल गांधी पीएम आवास के बाहर जाकर बैठ गए थे. छात्रों को साथ लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे. लेकिन झारखंड के मामले में इनका वो गुस्सा नहीं दिख रहा है. ना कॉकरोच पार्टी वाले दिख रहे हैं. दूर से बैठकर ये सिर्फ ट्वीट कर रहे हैं, या एक बयान जारी कर रहे हैं, और एक तरह से खानापूर्ति कर रहे हैं.

लेकिन आज झारखंड में छात्रों के साथ जो हुआ, उससे इनका छात्र प्रेम एक्सपोज हो गया है. झारखंड में आज जिन छात्रों पर लाठियां बरसाई गईं. वो तो किसी को गाली नहीं दे रहे थे. वो ना ही किसी पर पत्थर फेक रहे थे. ना ही जवानों पर अटैक कर रहे थे. ना ही तोड़फोड़ कर रहे थे. जंतर मंतर से बिल्कुल उलट झारखंड में छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात कह रहे थे. अपनी बात कहने के लिए विधानसभा तक मार्च निकाल रहे थे. लेकिन जिन लोगों को जंतर मंतर पर पुलिस के एक्शन में तानाशाही दिख रही थी, वो आज देख लें कि झारखंड़ में छात्रों को किस तरह से दौड़ा दौड़ा कर पीटा गया.

ये वो बच्चे हैं, जो इतने दिनों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे. शांतिपूर्ण तरीके से विधानसभा तक जा रहे थे. ये ना पुलिसवालों पर कोई रील बना रहे थे. ना उन्हें चिढ़ा रहे थे. ना उन्हें चैलेंज कर रहे थे. ना किसी नेता को गाली दे रहे थे. फिर भी इन्हें पीटा गया, वो आप देख लीजिए. एक बार नहीं दो-दो, तीन-तीन बार लाठीचार्ज हुआ. दोपहर को लाठीचार्ज हुआ. शाम के अंधेरे में लाठीचार्ज हुआ. तस्वीरें बहुत शॉकिंग हैं. ऐसा लग रहा था कि कोई जंग का मैदान है.

पुलिस के खोखले दावे

पुलिस का कहना था कि आंसू गैस के गोले भीड़ के बीच नहीं चलाए. लेकिन ऐसे कई वीडियो आए जिसमें भीड़ के बीच में आंसू गैस के गोले दागे गए. वहां पर भगदड़ होने लगी. दोपहर से लेकर शाम तक यही माहौल रहा. जब छात्र विधानसभा के बाहर डट गए तो उन्हें हटाने के लिए शाम को फिर लाठीचार्ज हुआ. जबकि इंडी वाले ये नैरेटिव बना रहे थे कि झारखंड के छात्रों पर लाठी नहीं चलेगी. आंसू गैस नहीं चलेगी. कोई बर्बरता नहीं होगी. छात्रों की बातों को ध्यान से सुना जाएगा.

आप देखिए रांची में प्रदर्शनकारी छात्रों पर किस तरह का बल प्रयोग किया गया. एक छात्र ने विधानसभा के बाहर धरने पर हटने से इनकार कर दिया तो उसे घसीटकर ले जाया जाने लगे. इस दौरान छात्रा बेहोश हो गई. उसे एंबुलेस से अस्पताल ले जाया गया. जब लाठीचार्ज हो रहा था तो कुछ पुलिसवाले ये कहते हुए सुने गए कि कैमरा बंद कर दीजिए. कई पुलिसवालों ने जैसे ही कैमरा देखा, उन्होंने लाठी चलाना बंद कर दिया. आप तस्वीरें देख लीजिए

राहुल गांधी ने भी बल प्रयोग को बताया गलत

ये सब तब हुआ है जब राहुल गांधी ने पहले ही कह दिया था कि छात्रों पर बल प्रयोग गलत है. झारखंड सरकार छात्रों की सुने. शाम को राहुल गांधी ने ये बयान दिया और उसके कुछ देर बाद छात्रों पर लाठी बरस गई. रांची में छात्रों के मार्च को लेकर राहुल गांधी ने कहा कि झारखंड में विरोध-प्रदर्शन कर रहे छात्रों के ख़िलाफ़ बल का इस्तेमाल ग़लत है. छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है और बातचीत से ही समाधान निकल सकता है. झारखंड सरकार को इन छात्रों की बात सुननी चाहिए और हर समस्या का तुरंत समाधान करना चाहिए.

राहुल गांधी रांची के छात्रों के समर्थन में बोल रहे हैं, लेकिन उनके ये बयान इसलिए खोखले लग रहे हैं, क्योंकि झारखंड में उनकी ही पार्टी गठबंधन में शामिल हैं. राहुल गांधी को अगर इतनी ही फिक्र है छात्रों की, तो वो सीधे हेमंत सोरेन को फोन लगाएं और उन्हें ये बातें सीधे सीधे बोलें. जंतर मंतर के मुद्दे पर तो राहुल गांधी को अमित शाह का इस्तीफा चाहिए. वो बार-बार सवाल कर रहे हैं कि छात्रों पर एक्शन का आर्डर किसने दिया है, लेकिन झारखंड में छात्रों के बल प्रयोग पर वो इस तरह तीखे सवाल नहीं पूछ रहे.

झारखंड में किसने छात्रों पर लाठीचार्ज का ऑर्डर दिया, किसने टीयर गैस चलाई ये सब राहुल गांधी को नहीं जानना है. क्योंकि मामला उनकी ही सरकार का है. इसी तरह अखिलेश यादव भी संसद में यही पूछ रहे थे कि ऑर्डर किसने दिया… लेकिन जब रांची की बात आई तो अखिलेश यादव यहां के छात्र आंदोलन के लिए भी पीएम मोदी को ही कोस रहे हैं.

इनकी सुई नरेंद्र मोदी पर ही अटकी है. इन्हें हर बात के लिए नरेंद्र मोदी को ही दोष देना है. इसी तरह कॉकरोच पार्टी वाले भी जंतर मंतर पर तो नरेंद्र मोदी के खिलाफ डट गए, लेकिन जब रांची जाने की बात आई तो पहले खूब बहाने बनाए. फिर जब ज्यादा सवाल उठे अपनी एक टीम फॉर्मैलिटी के लिए वहां भेज दी. आज छात्रों का इतना अहम मार्च था, उसमें कॉकरोच पार्टी का कोई बड़ा चेहरा नहीं पहुंचा और जब छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ तो अभिजीत दीपके ने एक सोशल मीडिया पोस्ट कर दी और कहा कि झारखंड के छात्रों के खिलाफ इतनी बर्बरता क्यों? जब राजनीतिक दल प्रोटेस्ट करते हैं तो पुलिस इस तरह लाठीचार्ज या टीयर गैस नहीं चलाती. तो फिर छात्रों के खिलाफ इस तरह की फोर्स का इस्तेमाल क्यों?

इंडी वालों की जुबान पर ताले

झारखंड के छात्रों शुरू से ये कह रहे थे कि वो शांतिपूर्ण मार्च करेंगे. पुलिस का सहयोग करेंगे. लेकिन पुलिस ने इन छात्रों को रोकने के लिए बैरिकेट्स पर कटीले तार लगा दिए थे. झारखंड पुलिस तो इसी फिराक में थे कि ये छात्र बैरिकेड्स को छू भी ना पाए, इन कंटीले तार से छात्रों को गंभीर चोटें आ सकती थी. आप सोचिए जब किसान आंदोलन के दौरान बॉर्डर पर ऐसे ही बैरिकेड्स और कीलें लगाई गई थी इंडी वालों ने खूब छाती पीटी थी. ये कहा था कि क्या ये कोई चीन का बॉर्डर है. नरेंद्र मोदी तो तानाशाही कर रहे हैं. लेकिन जब रांची में ये सब हुआ तो इंडी वालों की जुबान पर ताले लग गए. इन तारों को लेकर रांची पुलिस ये तर्क दे रही है कि इसे सिक्योरिटी की वजह से लगाए हैं, क्योंकि स्टूडेंट्स ने खुद बोला है कि कुछ असमाजिक तत्व आ सकते हैं, इसलिए हैवी बैरिकेडिंग कर दी.

झारखंड पुलिस का दावा है कि ‘कोई फोर्स का इस्तेमाल नहीं हुआ. छात्रों पर लाठीचार्ज नहीं किया गया है. भीड़ ज्यादा थी इसलिए छात्रों को खदेड़ा गया है, नहीं तो भगदड़ मच सकती थी. लाठीचार्ज के कोई आदेश नहीं हैं. भीड़ की वजह से किसी को चोट लगी होगी.’ पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया फिर भी पुलिस ने संयम दिखाया

झारखंड पुलिस कह रही है कि थोड़ा बहुत लाठी चलाया है. बहुत कम बल प्रयोग हुआ है, अगर ऐसा ही है तो फिर प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्र घायल कैसे हो गए . झारखंड पुलिस को लाठीचार्ज में घायल छात्रों की तस्वीरें देखनी चाहिए. इन घायल छात्रों का आरोप है कि पुलिस ने पैर पर नहीं बल्कि जानबूझकर सिर पर, मुंह पर, पीठ पर लाठी मारी है छात्रों की आपबीती सुनिए

ग्राउंड से कॉकरोच वाले कहां गायब?

जंतर मंतर पर जब छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ था, तब इस बात पर बहुत हल्ला मचा था कि वहां जो जवान मौजूद हैं उनके नेम प्लेट क्यों नहीं थे. इसे छात्रों के खिलाफ बड़ी साजिश बताया गया है. लेकिन रांची में जो छात्र पहुंचे हैं उन्होंने भी ऐसे वीडियो डाले है जिसमें कुछ जवानों के नेम प्लेट नहीं हैं लेकिन इसे लेकर भी इकोसिस्टम सन्नाटे में है. आप ये भी देखिए कि जंतर मंतर पर कॉकरोच पार्टी के मार्च में और रांची में छात्रों के मार्च में कितना अंतर है. जंतर मंतर पर जब हिंसा हुई तो उस दौरान कॉकरोच पार्टी के नेता ग्राउंड पर नहीं दिखे. उन्हें कोई लाठी नहीं पड़ी. कोई धक्का मुक्की उन्हें नहीं झेलनी पड़ी.

और इधर रांची में 9 दिन से अनशन कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो मार्च में शामिल हुए. लोग उन्हें स्ट्रेचर पर लेकर आए. देवेंद्र नाथ महतो ने ये मैसेज दिया कि अगर मार्च उन जैसे छात्र नेताओं ने बुलाया है तो उसे आगे बढ़कर लीड भी वही करेंगे. अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटेंगे…

जंतर मंतर पर तो कॉकरोच पार्टी अपने ही बुलाए मार्च में भीड़ को संभाल नहीं पाई. ना उसकी जिम्मेदारी ली. लेकिन रांची के छात्रों ने इस बात का पूरा प्रयास किया कि उनके आंदोलन में कोई असमाजिक तत्व ना आए, कोई हुड़दंग ना करे. इसके लिए छात्रों ने वॉलंटियर्स की पूरी टीम बनाई थी. बार बार शांति बनाए रखने की अपील की थी. जबकि जंतर मंतर पर तो दिल्ली पुलिस ही कॉकरोच पार्टी से पूछ रही थी कि आपके वॉलंटियर्स कहां हैं.

झारखंड के छात्रों जो बर्बरता हुई उस पर झारखंड सरकार घिर गई है. लेकिन झारखंड मुक्ति मोर्चा का आरोप है कि बीजेपी के गुंडे इस मार्च में घुस आए थे. उन्होंने पूरा माहौल खराब किया. JMM ने आरोप लगाया कि बीजेपी के गुंडों ने पुलिस पर पथराव किया, उन्हें घायल कर दिया.

इस्तीफे और गिरफ्तारी का दौर

इधर ये बवाल चला, उधर झारखंड लोक सेवा आयोग के पूर्व चेयरमैन एल ख्यांगते को गिरफ्तार कर लिया गया है. CID ने JPSC पेपर लीक मामले में पूर्व चेयरमैन एल. ख्यांगते को गिरफ्तार किया है. एल. ख्यांगते झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव भी रह चुके हैं. रिटायरमेंट के बाद पिछले साल फरवरी, 2025 में इन्हें JPSC का चेयरमैन नियुक्त किया गया था. इनपर JPSC परीक्षाओं खासकर 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में धांधली और गड़बड़ी करने के आरोप लगे हैं. ब्लैकलिस्टेड कंपनी TSR Data Processing Limited यानी TDPL को ठेका देने का आरोप है. आरोप है कि ठेका देने के बदले TDPL से 2 करोड़ रुपये और 20% कमीशन की मांग की गई थी, जिसकी जांच चल रही है. CID ने अभी पुष्टि नहीं की है.

22 जुलाई को JPSC परीक्षा धांधली मामले में CID की छापेमारी के बाद एल. खियांग्ते ने इस्तीफा दे दिया था. एल. खियांग्ते ने कहा था कि निष्पक्ष जांच के लिए इस्तीफा दे रहे हैं. इनसे अबतक 4 बार पूछताछ हो चुकी है. अब CID ने एल खियांग्ते को गिरफ्तार कर लिया है. इस मामले में ये अबतक की 20वीं गिरफ्तारी है.

JPSC पेपर लीक मामले में 3 और सदस्यों ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. इस्तीफा देने वालों में अजीता भट्टाचार्य, अनिमा हंसदा और जमाल अहमद का नाम शामिल है. डॉ. अजीता भट्टाचार्य JMM महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य की पत्नी हैं, जो CM हेमंत के बेहद करीबी और भरोसेमंद बताए जाते हैं.डॉ. अनिमा हांसदा JPSC की पहली आदिवासी महिला सदस्य हैं, जिनका इस्तीफा हो चुका है. डॉ. जमाल अहमद, सेंट कोलंबा कॉलेज में उर्दू विभाग के अध्यक्ष थे. इन्होंने रिजाइन कर दिया है. BJP ने जमाल अहमद पर आय से अधिक संपत्ति जुटाने का आरोप लगाया है.

इधर झारखंड में छात्रों ने मोर्चा संभाला हुआ है. उधर पेपर लीक से जुड़े गैंग की जड़े खोदने के लिए पीएम मोदी लगातार एक्शन ले रहे हैं. NEET पेपर लीक माफिया पर शिकंजा कसने के लिए ED को भी उतार दिया गया है. ED ने पूरे देश में एक्शन भी शुरू कर दिया है. कई राज्यों में ED ने रिपोर्ट दर्ज करना शुरू कर दिया है. इसमें राजस्थान, हरियाणा, बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र, झारखंड, असम शामिल हैं. इन राज्यों में पेपर लीक से जुड़े केस में ED ने जांच शुरू कर दी है. पेपर लीक के मामले में मनी ट्रेल और वित्तीय लेन देन की जांच ED करेगी. यानी अब पेपर लीक करने वाले माफियाओं के आर्थिक नेटवर्क को ध्वस्त किया जाएगा.



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