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बल्लभगढ़ के सिटी पार्क में इन दिनों बंदरों को लेकर लोगों की राय बंटी हुई है. कुछ लोग बच्चों और दुकानदारों के लिए इसे बड़ी समस्या बता रहे हैं, जबकि कई लोगों का मानना है कि बंदर तभी आक्रामक होते हैं जब उन्हें छेड़ा जाए. बढ़ती शिकायतों के बीच पार्क में आने वाले लोग स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं.
विकास झा/फरीदाबाद: बल्लभगढ़ का सिटी पार्क शहर की पहचान बन चुका है. सुबह की ताजी हवा हो, शाम की सैर हो या दोपहर का खाली समय, हर वक्त यहां लोगों की चहल-पहल देखने को मिल जाती है. बच्चे झूलों पर खेलते नजर आते हैं बुजुर्ग टहलते हैं और युवा अपने दोस्तों के साथ समय बिताने पहुंचते हैं. लेकिन इन दिनों इस पार्क में एक ऐसी समस्या चर्चा का विषय बनी हुई है जिसने आने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है. कई लोगों का कहना है कि पार्क में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ रहा है जबकि कुछ लोग मानते हैं कि बंदर तभी हमला करते हैं जब उन्हें छेड़ा जाए.
Local18 से बातचीत में पार्क आने वाले लोगों ने बंदरों को लेकर अलग-अलग अनुभव साझा किए. कुछ लोगों ने इसे गंभीर समस्या बताया तो कुछ ने इंसानों की गलती को इसकी वजह माना.
बंदरों का आतंक सुबह-शाम ज्यादा
मनोज कुमार बताते हैं मैं अक्सर यहां सिटी पार्क आता रहता हूं. बंदरों का जो आतंक है वो सुबह-शाम ज्यादा देखने को मिलता है. अभी गर्मी ज्यादा है तो दिन में कम निकलते हैं, लेकिन शाम करीब 5 से 6 बजे के बाद काफी संख्या में दिखाई देने लगते हैं. कई बार खेलते हुए बच्चों को पकड़ लेते हैं नाखून मार देते हैं और कभी-कभी काट भी लेते हैं. यह समस्या कई सालों से बनी हुई है. यहां एक-दो बार जाल भी लगाए गए थे लेकिन अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ. कई बार शिकायत भी की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई.
भेलपुरी बेचने वाले हैं परेशान
पार्क में भेलपुरी बेचने वाले अशोक बताते हैं यहां बंदरों का बहुत आतंक है. मेरा टमाटर, प्याज और खाने का सामान उठाकर भाग जाते हैं. इनका कोई टाइम टेबल नहीं है. जब मन करता है तब आ जाते हैं. एक साथ 8 से 10 बंदर घूमते रहते हैं. हम बेचने वालों को काफी परेशानी होती है. कई बार ग्राहक भी डर जाते हैं.
जब कोई उन्हें छेड़ेगा तो वो बंदर काटेंगे ही
यासीन सैफी बताते हैं मैं सिटी पार्क में अक्सर घूमने के लिए जाता हूं. मेरे हिसाब से बंदरों का आतंक नहीं है. आदमी खुद बंदरों को परेशान करता है. जब कोई उन्हें छेड़ेगा तो वो बंदर काटेंगे ही काटेंगे अगर बंदर आपस में लड़ रहे हों तो उनसे दूरी बनाकर रखनी चाहिए.
जेपी कौशिक बताते हैं मैं बल्लभगढ़ का रहने वाला हूं और अक्सर यहां घूमने आता हूं. मेरे को लगता है जैसे कोई मुझे तंग करेगा तो मैं भी जवाब दूंगा. बंदर भी तभी काटते हैं जब कोई उन्हें छेड़ता है. ऐसे बिना वजह किसी को परेशान नहीं करते.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें