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कम पानी में ज्यादा सिंचाई, स्प्रिंकलर विधि से होगी 60 प्रतिशत पानी...


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कम पानी में ज्यादा सिंचाई, स्प्रिंकलर विधि पर सरकार दे रही 90% सब्सिडी

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Jharkhand Sprinkler Irrigation Subsidy: झारखंड के पलामू समेत सूखा प्रभावित इलाकों में स्प्रिंकलर से सिंचाई करना एक बेहतरीन विकल्प है क्योंकि इससे 60 प्रतिशत तक कम पानी लगता है. श्रम और समय की बचत होती है और सरकार इस पर 90 परसेंट तक सब्सिडी दे रही है.

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पलामू. झारखंड राज्य के अंतर्गत पलामू जिला समेत राज्य के अधिकांश इलाके आज भी वर्षा आधारित कृषि पर निर्भर हैं. वहीं, खरीफ सीजन की शुरुआत हो चुकी है. विशेष रूप से पलामू का क्षेत्र सूखा प्रभावित और कम वर्षा वाला माना जाता है. यहां के किसान दलहन, तिलहन, सब्जी और दूसरी फसलों की खेती में पारंपरिक सतही सिंचाई पद्धति का उपयोग करते हैं, जिसमें पानी की अधिक खपत होती है और समय व श्रम भी ज्यादा लगता है. बदलते दौर में किसानों को मौसम और लगातार घटते भूजल स्तर को देखते हुए अब आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाना बेहद जरूरी है.

जल संकट के बीच उपयोगी तकनीक
जिला कृषि विज्ञान केंद्र, पलामू के विनोद पांडे ने लोकल 18 को बताया कि देश के कई राज्यों, जैसे झारखंड, ओडिशा, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में पानी की कमी गंभीर चुनौती बनी हुई है. झारखंड का अधिकांश भाग पठारी क्षेत्र होने के कारण यहां भूजल स्तर अपेक्षाकृत नीचे रहता है. ऐसे में किसानों को खेती के लिए उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करना जरूरी हो जाता है. इसमें स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली कम पानी में अधिक क्षेत्र की सिंचाई करने में सक्षम है और जल संरक्षण का प्रभावी माध्यम बन सकती है.

60 प्रतिशत तक पानी की होगी बचत
वे आगे कहते हैं कि स्प्रिंकलर प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें सतही सिंचाई की तुलना में करीब 60 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है. इसमें पाइप और नोजल के माध्यम से फसलों पर वर्षा जैसी सिंचाई की जाती है, जिससे पानी का समान वितरण होता है. इससे खेत में जलभराव की समस्या भी नहीं होती और पौधों को जरूरी मात्रा में नमी और पानी मिलता है. धान को छोड़कर लगभग सभी फसलों में इसका सफल उपयोग किया जा सकता है.

समय और मजदूरी दोनों की बचत
पारंपरिक सिंचाई में किसानों को तीन से चार मजदूरों की जरूरत पड़ती है और पूरे खेत की सिंचाई में काफी समय लगता है. वहीं, स्प्रिंकलर प्रणाली के माध्यम से लगभग आधे घंटे में एक एकड़ भूमि की सिंचाई संभव है. इससे किसानों का समय बचता है, श्रम लागत कम होती है और सिंचाई का काम अधिक सुविधाजनक बन जाता है. किसान केवल यह सुनिश्चित करें कि सभी पाइप और नोजल से पानी का प्रवाह सही तरीके से हो रहा हो.

90 प्रतिशत अनुदान का लाभ
सरकार किसानों को आधुनिक सिंचाई तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है. स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली पर किसानों को 90 प्रतिशत तक अनुदान का लाभ उपलब्ध कराया जा रहा है. जिन किसानों के पास तालाब, कुआं, आहर, चेकडैम या बोरिंग जैसी जल स्रोत सुविधाएं हैं, वे इस योजना का लाभ लेकर कम पानी में बेहतर खेती कर सकते हैं. अधिक जानकारी और आवेदन के लिए किसान अपने संबंधित जिला कृषि कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं. इस योजना का लाभ ले सकते हैं.

About the Author

Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें



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