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कल से हाजिर होगा मिसिंग लिंक, बदल जाएगा मुंबई से पुणे का...


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मिसिंग लिंक के रास्‍ते मुंबई-पुणे एक्‍सप्रेसवे पर कल से आवाजाही शुरू हो जाएगी. मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस नवनिर्मित कॉरिडोर का उद्घाटन करेंगे. मिसिंग लिंक की क्‍या खासियत है और इसमें आपका सफर कैसा होने वाला है, जानने के लिए पढ़ें कॉमिक गैलरी.

सुबह का वक्त था. मुंबई से पुणे की ओर जाने वाले एक्सप्रेसवे पर हल्की धूप फैल रही थी. कार में बैठे रोहित और उसकी पत्नी शुची एक लंबे समय बाद साथ में रोड ट्रिप पर निकले थे. ‘रोहित, आज ट्रैफिक कुछ कम लग रहा है, है ना?’ शुची ने खिड़की से बाहर देखते हुए कहा.

रोहित मुस्कुराया, ‘अरे, तुमने खबर नहीं देखी क्या? आज से मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे का ‘मिसिंग लिंक’ शुरू हो गया है. अब वही पुराना खोपोली-लोणावला वाला झंझट खत्म!’<br />‘सच में? वही घाट वाला हिस्सा, जहां हमेशा जाम लगता था?’ शुची ने उत्सुकता से पूछा.

‘हां, बिल्कुल वही,’ रोहित ने जवाब दिया, ‘उसी को बायपास करने के लिए ये नया रास्ता बनाया गया है. अब सीधा, चौड़ा और काफी सुरक्षित रूट मिल गया है.’<br />कार धीरे-धीरे नई सुरंग की ओर बढ़ने लगी. सामने विशाल टनल का प्रवेश द्वार दिखाई दे रहा था.

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‘वाह! ये सुरंग तो बहुत बड़ी लग रही है,’ शुची ने आश्चर्य से कहा.<br />रोहित ने समझाया, ‘ये कोई छोटी-मोटी सुरंग नहीं है. इसमें दो बड़ी टनल हैं—एक करीब 8.92 किलोमीटर और दूसरी 1.75 किलोमीटर लंबी.

और सुनो, ये दुनिया की सबसे चौड़ी सुरंगों में भी गिनी जाती हैं.’<br />‘इतनी चौड़ी?’ शुची ने हैरानी से कहा.<br />‘हां, करीब 23.75 मीटर चौड़ी,’ रोहित ने जवाब दिया, ‘ताकि गाड़ियां आराम से और बिना रुकावट के चल सकें.

और सबसे खास बात—इनमें से एक सुरंग लोणावला झील के नीचे से गुजरती है.’<br />‘कमाल है! सच में टेक्नोलॉजी ने बहुत तरक्की कर ली है,’ शुची ने कहा.<br />कार अब सुरंग के अंदर प्रवेश कर चुकी थी. रोशनी और साफ-सुथरी सड़क देखकर शुची को सफर काफी आरामदायक लग रहा था.

‘पहले इसी रास्ते पर कितनी दिक्कत होती थी,’ शुची ने याद करते हुए कहा, ‘तेज मोड़, बारिश में फिसलन और ऊपर से जाम… कितना समय बर्बाद होता था.’<br />रोहित ने सिर हिलाया, ‘सही कहा तुमने. लेकिन अब देखो, इस नए मिसिंग लिंक से मुंबई-पुणे की दूरी करीब 6 किलोमीटर कम हो जाएगी.

और लगभग 30 मिनट का समय भी बचेगा.’ ‘मतलब हम जल्दी पहुंच जाएंगे?’ शुची ने खुश होकर पूछा. ‘बिल्कुल,’ रोहित हंसा, ‘और सिर्फ समय ही नहीं, ईंधन की भी बचत होगी. जाम में फंसना नहीं पड़ेगा, तो गाड़ी स्मूद चलेगी.’

‘ये तो सच में बहुत बड़ा फायदा है,’ शुची ने कहा, ‘और सुरक्षा भी बढ़ेगी, है ना?’<br />‘हां, यही तो सबसे बड़ी बात है,’ रोहित ने गंभीर होकर कहा, ‘पुराने घाट सेक्शन में हादसे ज्यादा होते थे. लेकिन अब सीधे और चौड़े रास्ते की वजह से दुर्घटनाएं काफी कम होंगी.’<br />सुरंग से बाहर निकलते ही सामने टाइगर वैली का खूबसूरत नजारा दिखा.

ऊंचाई पर बना केबल-स्टेड ब्रिज देखकर शुची की आंखें चमक उठीं.<br />‘ये ब्रिज तो फिल्म जैसा लग रहा है!’ शुची ने कहा.<br />रोहित ने बताया, ‘ये करीब 182 मीटर ऊंचा है. इस पूरे प्रोजेक्ट को बनाना आसान नहीं था, लेकिन अब इसका फायदा हम जैसे लाखों लोगों को मिलेगा.’

‘और टोल?’ शुची ने तुरंत सवाल किया.<br />रोहित मुस्कुराया, ‘सबसे अच्छी बात—इस पर कोई अतिरिक्त टोल नहीं लगेगा.’<br />‘वाह, मतलब फायदा ही फायदा!’ शुची हंस पड़ी.

थोड़ी देर चुप रहने के बाद शुची बोली, ‘सोचो, इससे सिर्फ हमारा ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य का फायदा होगा. मुंबई और पुणे के बीच सफर आसान होगा, तो कारोबार भी तेजी से बढ़ेगा.’<br />‘बिल्कुल,’ रोहित ने सहमति जताई, ‘लॉजिस्टिक्स, व्यापार—सबको फायदा मिलेगा. यही तो असली विकास है.’

कार तेजी से अपने गंतव्य की ओर बढ़ रही थी. रास्ता अब पहले से ज्यादा आसान, सुरक्षित और तेज महसूस हो रहा था.<br />शुची ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘सच में, ये ‘मिसिंग लिंक’ नहीं, बल्कि हमारी जिंदगी का ‘सुकून लिंक’ है.’<br />रोहित ने हंसते हुए कहा, ‘बिल्कुल सही कहा तुमने.’



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