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लखनऊ के कोचिंग सेंटर में अगलगी और छात्रों की मौत के बाद रांची नगर निगम पूरी तरह रेस है। नगर आयुक्त के निर्देश पर टाउन प्लानिंग के अफसरों ने बुधवार को लगातार दूसरे दिन शहर के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित कोचिंग सेंटरों की जांच की। टाउन प्लानर संजीव कुमार और रामबदन सिंह के नेतृत्व में लालपुर, हिनू स्थित इंदिरा पैलेस, साउथ ऑफिस पाड़ा में स्थित कोचिंग संस्थानों की जांच की गई। इस दौरान कोई कोचिंग सेंटर आवासीय भवन में चलता मिला तो कहीं पर फायर एनओसी नहीं मिली। कोचिंग संस्थानों के पास आग लगने से सुरक्षा के लिए लगाए गए फायर एक्सटिंगिवीशर की रिफिलिंग की अवधि भी समाप्त मिली। निगम की टीम लालपुर क्षेत्र में चल रहे एक कोचिंग सेंटर की जांच करने गई तो टीम के सदस्य भी चौंक गए। क्योंकि, वह कोचिंग सेंटर जिस बिल्डिंग में चल रहा था, उसका नक्शा आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया है। चार तल्ले के इस भवन की छत पर जीआई शीट से बनी अवैध लाइब्रेरी भी चल रही थी। इसके बाद संचालक को भवन का स्वीकृत नक्शा और अन्य आवश्यक दस्तावेज निगम कार्यालय में जमा करने का निर्देश दिया गया। इसके बाद हिनू में इंदिरा पैलेस और साउथ ऑफिस पाड़ा में संचालित गोल इंस्टीच्यूट, फिजिक्सवाला ट्यूशन सेंटर, ब्रदर्स एकेडमी और फिट्जी इंस्टीच्युट की जांच में भी काफी खामियां मिलीं। कुछ कोचिंग सेंटर में पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं मिला तो कहीं सुरक्षा मानक के अनुरूप सीसीटीवी कैमरे नहीं मिले। पर्याप्त पार्किंग की भी व्यवस्था नहीं मिली। ऐसे कोचिंग संचालकों को फायर से एनओसी लेने का निर्देश दिया गया। दूसरे राज्य में आग लगने के बाद ही शुरू होती है जांच रांची नगर निगम सिर्फ भवनों का नक्शा पास करता है। इसके बाद बिल्डिंग प्लान के अनुसार भवन बना है या नहीं, इसकी जांच नहीं होती। जबकि, निगम की जवाबदेही है कि जब तक बिल्डिंग का ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी नहीं होता है, तब तक उस बिल्डिंग में रहने की छूट नहीं दी जाए। लेकिन निगम उस समय किसी तरह की कार्रवाई नहीं करता। ऐसे में सवाल उठता है कि जब दूसरे राज्य में अगलगी की घटना होती है, तभी निगम को नियम -कानून याद क्यों आते हैं।
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