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पतरातू सुपर थर्मल पावर प्लांट की 800 मेगावाट क्षमता वाली दूसरी यूनिट का बुधवार रात 12 बजे वाणिज्यिक संचालन शुरू हो गया। इनमें से 85 प्रतिशत यानी 680 यूनिट बिजली झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) को मिलेगी। इससे पहले 5 नवंबर 2025 को इसकी पहली यूनिट शुरू हुई थी, जिससे झारखंड को 680 मेगावाट बिजली मिल रही है। इस तरह यहां से झारखंड को अब 1360 मेगावाट बिजली मिलने लगी है। पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (पीवीयूएनएल) के सीईओ अशोक कुमार सहगल ने जेबीवीएनएल और छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी को पत्र लिखकर दूसरी यूनिट के शुरू होने की जानकारी दी है। डीवीसी-जेबीवीएनएल के संयुक्त उपक्रम के गठन की प्रक्रिया शुरू डीवीसी कमांड एरिया में बिजली वितरण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए डीवीसी और जेबीवीएनएल के संयुक्त उपक्रम के गठन की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हाल ही में रांची में हुई समीक्षा बैठक में इस पर सहमति बनी थी। यह संयुक्त उपक्रम धनबाद, बोकारो, हजारीबाग, गिरिडीह, कोडरमा, रामगढ़ और चतरा जिले की बिजली वितरण व्यवस्था का अध्ययन कर दीर्घकालिक समाधान तैयार करेगा। अधिकारियों का मानना है कि इससे डीवीसी क्षेत्र में आपूर्ति व्यवस्था मजबूत होगी। डीवीसी और राज्य सरकार के बीच बकाया भुगतान को लेकर उत्पन्न होने वाले विवादों को कम करने में भी मदद मिल सकती है। मांग 3000 मेगावाट, उपलब्धता 3885 मेगावाट, अब बेची जा सकती है बिजली राज्य में अभी मौसम और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण बिजली की मांग करीब 3000 मेगावाट तक पहुंच रही है। वहीं जेबीवीएनएल के पास अपने स्रोत, निजी क्षेत्र और केंद्रीय क्षेत्र से मिलाकर 2525 मेगावाट बिजली उपलब्ध है। साथ ही पीवीयूएनएल की दोनों यूनिट से 1360 मेगावाट बिजली मिल रही है। यानी झारखंड के पास कुल 3885 मेगावाट बिजली उपलब्ध है। हालांकि पावर परचेज एग्रीमेंट के तहत केंद्रीय क्षेत्र से बिजली लेना जेबीवीएनएल की बाध्यता है। विशेषज्ञों का मानना है कि नॉन पीक आवर्स में जेबीवीएनएल अतिरिक्त बिजली दूसरे राज्यों को बेच सकता है। डीवीसी कमांड एरिया को बिजली कटौती से मिलेगी राहत इस यूनिट के शुरू होने से दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) कमांड एरिया को विशेष रूप से राहत मिलेगी। अभी धनबाद, बोकारो, हजारीबाग, गिरिडीह, कोडरमा, रामगढ़ और चतरा जिले में बिजली कटौती की समस्या आ रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल को पत्र लिखकर डीवीसी क्षेत्र के लिए 200 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मुहैया कराने का आग्रह किया था। ऐसे में नई यूनिट के शुरू होने से इन इलाकों को विशेष राहत मिलने की उम्मीद है।
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