रांची डीवीसी कमांड एरिया में एलटी (घरेलू एवं कमर्शियल) उपभोक्ताओं को डीवीसी से सीधे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जेबीवीएनएल और दामोदर वैली कॉरपोरेशन (डीवीसी) के बीच ज्वाइंट वेंचर कंपनी बन सकती है। जेबीवीएनएल के सुझाव पर केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने डीवीसी के समक्ष यह प्रस्ताव रखा है। यदि डीवीसी इसे स्वीकार करता है तो कमांड एरिया के सात जिलों के घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं की वर्षों पुरानी समस्या दूर हो सकती है। 19 जून को रांची दौरे पर आए केंद्रीय विद्युत एवं शहरी विकास मंत्री के समक्ष जेबीवीएनएल ने डीवीसी क्षेत्र में बिजली वितरण व्यवस्था का मुद्दा उठाया था। मंत्री ने डीवीसी को ज्वाइंट वेंचर का प्रस्ताव दिया, हालांकि अब तक डीवीसी की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। प्रस्ताव पर सहमति बनने के बाद राज्य सरकार कैबिनेट से मंजूरी लेकर दोनों संस्थाओं के बीच एमओयू कर सकती है। सात जिलों में 600 मेगावाट बिजली की आपूर्ति करता है डीवीसी डीवीसी धनबाद, बोकारो, हजारीबाग, गिरिडीह, कोडरमा, रामगढ़ और चतरा जिले में औद्योगिक उपभोक्ताओं को करीब 600 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराता है, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली जेबीवीएनएल अपने 11 केवी फीडर नेटवर्क के माध्यम से सप्लाई करता है। क्यों पड़ी ज्वाइंट वेंचर की जरूरत फिलहाल डीवीसी अपने कमांड एरिया के सात जिलों में केवल एचटी (औद्योगिक) उपभोक्ताओं को 33 केवी ग्रिड के माध्यम से बिजली देता है। उसके पास 11 केवी फीडर नेटवर्क नहीं होने के कारण घरेलू और कॉमर्शियल उपभोक्ताओं तक बिजली आपूर्ति जेबीवीएनएल अपने नेटवर्क से करता है। यानी एक ही क्षेत्र में दो अलग-अलग व्यवस्थाओं से बिजली वितरण हो रहा है। इसी व्यवस्था को सरल बनाने के लिए जेबीवीएनएल ने सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं तक एकीकृत प्रणाली से बिजली आपूर्ति का सुझाव दिया है। विवाद के स्थायी समाधान की जताई जा रही है उम्मीद जेबीवीएनएल के सुझाव और उसमें केंद्रीय मंत्री के दखल के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि डीवीसी और जेबीवीएनएल के बीच वर्षों से जारी विवाद का स्थाई हल हो जाएगा। मगर यह सबकुछ डीवीसी के अगले कदम पर निर्भर होगा। हालांकि इससे डीवीसी को भी फायदा होगा। क्योंकि उसे अपने कमांड एरिया में घरेलू कंज्यूमरों को बिजली आपूर्ति करने के लिए जेबीवीएनएल का 11 केवी फीडर सबस्टेशन का बड़ा नेटवर्क मिल जाएगा।
Source link