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कैबिनेट ने नाम बदला, नोटिफिकेशन अटका, नाम को रात में मिटाने का...



रांची कॉलेज को आठ साल पहले अपग्रेड कर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय बनाया गया था। इसके साथ ही नाम को लेकर विरोध शुरू हो गया। लगभग 16 महीने पहले राज्य कैबिनेट ने डीएसपीएमयू का नाम बदलकर वीर शहीद बुधु भगत विवि करने का फैसला लिया, लेकिन अब तक अधिसूचना जारी नहीं हुई। इसी बीच गुरुवार को झारखंड छात्र अधिकार मोर्चा के बैनर तले नामकरण समारोह आयोजित कर विवि के नवनिर्मित मुख्य द्वार पर वीर शहीद बुधु भगत विश्वविद्यालय लिख दिया गया, जिसे रात के अंधेरे में मिटा दिया गया। शुक्रवार सुबह इसकी जानकारी मिलते ही छात्र संगठनों का आक्रोश फूट पड़ा। सुबह 10:30 बजे से प्रदर्शन और नारेबाजी शुरू हुई। छात्र सड़क पर धरने पर बैठ गए और जाम कर दिया। प्रदर्शनकारी छात्रों के सहयोग से मुख्य द्वार पर दोबारा वीर शहीद बुधु भगत विश्वविद्यालय लिख दिया गया। इधर, पूरे घटनाक्रम के बीच विवि प्रशासन ने 6 नवंबर को अवकाश की घोषणा की। शाम करीब पांच बजे पूर्व शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की भी आंदोलन स्थल पर पहुंचे। नाम मिटाने वाले की पहचान बताने वाले को 51 हजार प्रदर्शन में केंद्रीय सरना समिति के अजय तिर्की ने कहा कि नाम मिटाने वाले की पहचान बताने वाले को 51 हजार रुपए इनाम दिया जाएगा। प्रदर्शन में संजय महली, झारखंड छात्र अधिकार मोर्चा के दयाराम, बादल भोक्ता, सुनील सोरेन, राकेश रोशन समेत अन्य शामिल थे। विश्वविद्यालय में छुट्टी घोषित करने पर उठ रहे सवाल प्रदर्शन और छात्रों के बढ़ते आक्रोश के बीच डीएसपीएमयू प्रशासन ने विवि बंद रखने की घोषणा की। शिक्षकों के व्हाट्सएप ग्रुप में 10.54 बजे रजिस्ट्रार द्वारा कुलपति के हवाले से जारी संदेश में 6 नवंबर को अवकाश की जानकारी दी गई। अवकाश का कारण तीन दिनी युवा महोत्सव का संपन्न होना बताया गया। बड़ा सवाल यह है कि छुट्टी की सूचना गुरुवार दी जा सकती थी। विवि खुलने के समय बंद की सूचना की खूब चर्चा हो रही है। विश्वविद्यालय बनने के समय से नाम को लेकर हो रहा विरोध विवि के नामकरण को लेकर विवाद रांची कॉलेज के डीएसपीएमयू बनने के बाद से ही जारी है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विवि नाम रखे जाने के बाद विभिन्न छात्र संगठनों ने इसका विरोध किया। वीर शहीद बुधु भगत के नाम पर विश्वविद्यालय का नामकरण करने की मांग उठती रही। इसके बाद पिछले साल जुलाई में राज्य कैबिनेट ने नाम बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। लेकिन कैबिनेट की स्वीकृति के बाद भी आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई।



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