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कोडरमा के अंशुमान सिंह बने IFS अधिकारी:छठे प्रयास में आया देश में...




कोडरमा जिले के झुमरीतिलैया स्थित सीएच स्कूल रोड निवासी अंशुमान कुमार सिंह ने यूपीएससी द्वारा आयोजित भारतीय वन सेवा (IFS) परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया रैंक-2 हासिल कर इतिहास रच दिया। परिणाम घोषित होने के बाद जैसे ही वे रविवार को अपने घर पहुंचे, पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। पड़ोसी, रिश्तेदार और मित्र बड़ी संख्या में उनके आवास पर पहुंचे और उन्हें बधाई दी। वार्ड नंबर 10 स्थित शांति भवन के पास रहने वाले अंशुमान की इस उपलब्धि पर वार्ड पार्षद पिंकी जैन समेत शहर के कई गणमान्य लोगों ने गर्व जताया। यह सफलता न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे झारखंड के लिए गौरव का विषय बन गई है। छठे प्रयास में मिली ऐतिहासिक सफलता अंशुमान की सफलता के पीछे संघर्ष और धैर्य की लंबी कहानी है। उन्होंने यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में लगातार पांच बार असफलता का सामना किया, लेकिन हार नहीं मानी। हर असफलता से सीख लेते हुए उन्होंने अपने प्रयास को और मजबूत किया। दिन में नौकरी और रात में पढ़ाई उनकी दिनचर्या बन गई थी। बीते वर्ष उन्होंने अपनी नौकरी से ब्रेक लेकर पूरी तरह तैयारी में खुद को झोंक दिया। आखिरकार छठे प्रयास में उन्होंने देश में दूसरा स्थान हासिल कर यह साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प और निरंतर मेहनत से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। पिता का सपना किया पूरा अंशुमान ने अपनी सफलता का श्रेय अपने स्वर्गीय पिता विनय कुमार सिंह, माता सुनीता देवी, पत्नी श्यामभवि सिंह और पूरे परिवार को दिया। उनके पिता एक शिक्षक थे। वे चाहते थे कि बेटा सिविल सेवा में जाए। वर्ष 2018 में पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ीं, लेकिन उनकी मां ने हमेशा उन्हें प्रेरित किया। अंशुमान कहते हैं कि अगर आज उनके पिता जीवित होते तो सबसे ज्यादा गर्व उन्हें ही होता। उनकी पत्नी ने भी हर कठिन समय में उनका साथ दिया और लक्ष्य से भटकने नहीं दिया। 12वीं में रहे हैं जिला टॉपर अंशुमान की शुरुआती पढ़ाई डीएवी कोडरमा से हुई। 12वीं उन्होंने ग्रिजली स्कूल से किया। जहां वे 2011 में जिला टॉपर रहे। इसके बाद उन्होंने दिल्ली के रामजस कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरा किया। वर्ष 2015 में उन्होंने इंडियन कोस्ट गार्ड में असिस्टेंट कमांडेंट के रूप में सेवा शुरू की। वर्तमान में डिप्टी कमांडेंट पद पर कार्यरत हैं। उनके छोटे भाई अभिनव सिंह पटना में “मार्को डिफरेंस अकादमी” चलाकर हजारों युवाओं को सेना में जाने की तैयारी करा रहे हैं। बहन नेहा सिंह के पति भी भारतीय नौसेना में कमांडेंट हैं। अंशुमान की यह सफलता आज उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो छोटे शहरों से निकलकर बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।



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