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राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने गुरुवार तड़के कोडरमा, डोमचांच और नवलशाही में छापेमारी की। इस दौरान विस्फोटक कारोबारी बतडीहा निवासी शंकर यादव व डोमचांच के नावाडीह निवासी महेश मेहता को गिरफ्तार कर लिया। छापेमारी में 16.07 लाख रुपए और 22 जमीनों के कागजात जब्त किया। यह मामला पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा में दो साल पहले हुए विस्फोट से जुड़ा है। 8 अक्टूबर 2024 को धनबाद से बाइक पर विस्फोटक लेकर जा रहे जयदेव मंडल की विस्फोट में मौत हो गई थी। प्रारंभिक जांच में पता चला था कि विस्फोटक वैध दस्तावेज पर धनबाद भेजा गया था। लेकिन उसका कुछ हिस्सा अवैध रूप से बांकुड़ा ले जाया जा रहा था। बाद में इस मामले की जांच एनआईए को सौंप दी गई थी। पिता का कारोबार बंद होने पर भी महेश विस्फोटक व्यवसाय से जुड़ा रहा
गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों को NIA आगे की कार्रवाई के लिए कोलकाता ले गई है। महेश मेहता के पिता, स्वर्गीय बंशी मेहता का भी मरकच्चो के दसारो में एक मैगजीन (विस्फोटक रखने का भंडार) था। महेश शुरू से ही अपने पिता के विस्फोटक व्यवसाय से जुड़ा हुआ था। पिता का मैगजीन बंद होने के बाद भी महेश इस धंधे में सक्रिय रहा। बाद में, वह डेटोनेटर और जिलेटिन के अवैध परिवहन में शामिल हो गया। महेश मेहता विभिन्न मैगजीनों से विस्फोटक खरीदकर उन्हें ऊंची कीमतों पर कई स्थानों पर बेचता था। महेश का छोटा भाई पिंटू मेहता भी अवैध गतिविधियों में लिप्त रहा है और चोरी के एक मामले में जेल जा चुका है। सूत्रों के माने तो महेश मेहता फिलहाल शंकर यादव के साथ मिलकर इस धंधे को बढ़ा रहा था। जिस समय बांकुरा में मोटरसाइकिल पर विस्फोट हुआ था और विस्फोटक का तार कोडरमा से जुड़ा था, उसमें शंकर यादव के साथ इसकी भी संलिप्तता सिद्ध हुई थी। ट्रक ड्राइवर का बेटा बना मैगजीन का मालिक
NIA द्वारा गिरफ्तार शंकर यादव भी विस्फोटक के अवैध खरीद बिक्री में संलिप्तता प्रमाणित हो चुकी है। शंकर के पिता लखन यादव पेशे से एक ट्रक चालक थे। फिलहाल वह किसानी करते हैं। शंकर को शुरू से ही बड़ा बिजनेसमैन बनने का शौक था। साथ ही वह दिखावे की जिंदगी जीने का भी शौकीन रहा है। इसके पास 4 अलग-अलग ब्रांड की कार व लग्जरी गाड़ियां घर पर लगी हुई हैं। शंकर पहले अवैध उत्खनन जिसमें ढिबरा, ब्लू स्टोन सहित अन्य मामले थे, उससे जुड़ा रहा है। इसके बाद वह जमीन की खरीद बिक्री और विस्फोटक के सप्लाई से भी जुड़ गया। बताया जाता है कि विस्फोटक के कारोबार से जुड़ने के बाद उसे यह धंधा काफी पसंद आया। यही वजह रही कि उसने जय मां दुर्गा इंटरप्राइजेज (पहले कोई और नाम) जो पहले किसी और के द्वारा संचालित किया जाता था, उसे 3 वर्ष पूर्व इसने अपने नाम पर ले लिया। यहीं से शंकर के जिंदगी में बदलाव आने शुरू हो गए। महेश इसके साथ जुड़ा और धंधा अवैध रूप से फलने फूलने लगा। सूत्रों की मानें तो महेश और शंकर द्वारा कई बार भारी मात्रा में विस्फोटकों को अलग-अलग जगहों पर सप्लाई किया गया है। कई महीने तक आसनसोल में छिपा रहा महेश और शंकर इधर, NIA द्वारा छापेमारी के बाद यह बातें सामने आईं कि जब बांकुरा विस्फोट के मामले का तार कोडरमा के शंकर और महेश से जुड़ा तो NIA इन दोनों की खोजबीन में जुट गई। इसकी भनक लगते ही दोनों कई महीनों तक पश्चिम बंगाल के आसनसोल में छिपा रहा। कुछ दिनों पूर्व ही दोनों वापस कोडरमा लौटे थे। जैसे ही NIA को इसकी सूचना मिली, उसने गुरुवार को इनके अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
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