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Ranchi Lemongrass Farming: झारखंड की राजधानी रांची से सटे खूंटी के गुनी गांव में लगभग 120 एकड़ में लेमन ग्रास की खेती की जा रही है. इस गांव की खासियत यह है कि लेमन ग्रास का तेल निकालने के लिए प्लांट खेतों के बीच में ही स्थापित किया गया है. यह तेल पत्तियों के भाप से तैयार होता है. आइये जानते हैं इसके बारे में…
लेमन ग्रास की खेती करने वाले किसान इंद्र ने लोकल 18 को बताया कि एसेंशियल ऑयल के रूप में इस्तेमाल होने वाला यह तेल चार प्रक्रियाओं में तैयार होता है. पत्तियों की कटाई और भाप का निर्माण।
सबसे पहले लेमन ग्रास की ताजी या थोड़ी मुरझाई हुई पत्तियों को काटा जाता है. इन पत्तियों को साफ करके डिस्टिलेशन टैंक (भाप बर्तन) में कसकर भरा जाता है. इसके बाद एक बड़े बॉयलर में पानी उबालकर उच्च दबाव वाली भाप तैयार की जाती है.
यह भाप टैंक के नीचे से अंदर छोड़ी जाती है और ऊपर की ओर बहती है. भाप की गर्मी से पत्तियों की कोशिकाओं में मौजूद तेल वाष्पीकृत हो जाता है. तेल और भाप का यह मिश्रण एक ठंडे पानी की कुंडली (कंडेंसर) से गुजरता है, जिससे ठंडक मिलने पर भाप और तेल का वाष्प वापस तरल रूप में बदल जाता है.
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इस तरल को एक सेपरेटर (फ्लोरेंटाइन सेपरेटर) में भेजा जाता है. लेमन ग्रास का तेल पानी से हल्का होता है, इसलिए यह पानी के ऊपर एक अलग परत बना लेता है. इसके बाद तेल को पानी की सतह से अलग कर लिया जाता है.
तेल को अलग करने के बाद उसकी गुणवत्ता की जांच की जाती है, जिसमें रंग, खुशबू और डेंसिटी जैसे कारक शामिल होते हैं. गुणवत्ता जांच के बाद तेल को बाजार में बेचने के लिए पैक किया जाता है.