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खेती में अब आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. इससे किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफा मिल रहा है. खासकर खरीफ सीजन में धान और अन्य फसलों की बुआई के लिए नई तकनीकें किसानों का काम आसान बना रही हैं. पारंपरिक खेती में खेत की कई बार जुताई करनी पड़ती है, जिससे डीजल, मजदूरी और समय अधिक लगता है. वहीं आधुनिक मशीनों की मदद से किसान कम समय में बुआई कर सकते हैं और खेती की लागत भी घटा सकते हैं.
पलामू: खेती अब केवल पारंपरिक तरीकों तक सीमित नहीं रह गई है. बदलते समय के साथ किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाकर कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. खासकर खरीफ सीजन में धान और अन्य फसलों की बुआई किसानों के लिए बड़ी चुनौती होती है. खेत की जुताई, मजदूरी और समय की अधिक जरूरत के कारण खेती की लागत बढ़ जाती है. ऐसे में जीरो टिलेज मशीन किसानों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रही है.
बिना जुताई किए बीजों की बुआई
पलामू जिले में इन दिनों किसान खरीफ सीजन की तैयारियों में जुटे हुए हैं. पारंपरिक खेती में बुआई से पहले खेत की कई बार जुताई करनी पड़ती है, जिससे डीजल, मजदूरी और समय की खपत बढ़ जाती है. वहीं, सीड ड्रिल या जीरो टिलेज तकनीक इस प्रक्रिया को काफी आसान बना रही है. इस मशीन की मदद से बिना जुताई किए सीधे खेत में बीजों की बुआई की जा सकती है.
यह तकनीक अधिक लाभदायक
क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, चियांकी के कृषि वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश शाह ने बताया कि जीरो टिलेज मशीन ट्रैक्टर से संचालित होने वाली आधुनिक तकनीक है, जो किसानों की लागत को काफी हद तक कम करती है. उन्होंने कहा कि धान की खेती में इस तकनीक का उपयोग करने से किसानों को बेहतर लाभ मिल सकता है. मशीन खेत में मौजूद फसल अवशेषों के बीच ही बीज की बुआई कर देती है. बाद में यही अवशेष सड़कर प्राकृतिक खाद का काम करते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है. यही कारण है कि जैविक खेती करने वाले किसानों के लिए यह तकनीक अधिक लाभदायक मानी जाती है.
सिंचाई की जरूरत कम
उन्होंने बताया कि जीरो टिलेज मशीन से केवल धान ही नहीं, बल्कि अरहर, गेहूं, चना समेत कई फसलों की बुआई की जा सकती है. इसी वजह से इसे मल्टी क्रॉप मशीन भी कहा जाता है. इस तकनीक से समय की बचत होती है, सिंचाई की जरूरत कम पड़ती है और उत्पादन लागत में कमी आती है, जिससे किसानों का मुनाफा बढ़ता है.
कीमत करीब 50 हजार रुपये
कृषि वैज्ञानिक के अनुसार बाजार में इस मशीन की कीमत करीब 50 हजार रुपये से लेकर 1.5 लाख रुपये तक है. कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत किसान इस मशीन पर अनुदान का लाभ भी प्राप्त कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों को अपनाकर किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल कर खेती को अधिक लाभकारी बना सकते हैं. जीरो टिलेज तकनीक इसी बदलाव की एक महत्वपूर्ण कड़ी बनकर उभर रही है.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें