भास्कर न्यूज|गुमला मानसून की फुहारें जहां किसानों के लिए जीवनदायिनी मानी जाती हैं, वहीं शुक्रवार को गुमला जिले के लिए यह दिन मातम और खौफ का मंजर लेकर आया। जिले के अलग-अलग इलाकों में आसमान से गिरी आफत (वज्रपात) ने दो हंसते-खेलते परिवारों को हमेशा के लिए अंधेरे में धकेल दिया। खेत में काम कर रही एक युवती और मवेशी चरा रहे एक बुजुर्ग की मौत से पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ गई है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची। शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम और कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। वहीं, जिला प्रशासन ने बरसात के मौसम में लोगों से सतर्कता बरतने की अपील की है।
पहली घटना बसिया प्रखंड के मामरला महाराजगंज गांव में घटी, जहां 24 वर्षीया सुचिता कुमारी अपने खेत में कांदा (प्याज) रोपने में व्यस्त थी। तभी अचानक आसमान में काले घने बादल छा गए और देखते ही देखते तेज गर्जना के साथ वज्रपात हो गया। बिजली का प्रहार इतना भीषण था कि सुचिता को संभलने का मौका तक नहीं मिला और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। मृतका के पति हरि चीक बड़ाइक का रो-रोकर बुरा हाल है। पल भर में उनकी गृहस्थी उजड़ गई। वहीं, वज्रपात का दूसरा कहर सिसई प्रखंड के छरदा गांव में टूटा, जहां 65 वर्षीय शिवव्रत गोप रोज की तरह अपने मवेशियों को चराने खेत की ओर गए थे। दोपहर में अचानक बदले मौसम और कड़कड़ाती बिजली ने उन्हें काल के गाल में समा दिया। सूचना मिलते ही उनके पुत्र नागेंद्र गोप और परिजन मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। एक पिता का साया सिर से उठ जाने के बाद पूरे गांव में मातम पसर गया। प्रशासन की अपील: गरज-चमक के दौरान खुले खेतों में काम करने से बचें। पेड़ों के नीचे, बिजली के खंभों और जलाशयों के पास शरण न लें। सुरक्षित पक्के भवन में रहें और मौसम सामान्य होने तक बाहर न निकलें।
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