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खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले किसान खेतों की तैयारी में जुट गए हैं. अच्छी पैदावार के लिए किसान उन्नत बीज, खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसके बावजूद कई बार फसलों से उम्मीद के मुताबिक उत्पादन नहीं मिल पाता. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे मिट्टी की गुणवत्ता और उसका पीएच स्तर भी एक बड़ा कारण हो सकता है. इसलिए बुवाई से पहले खेत की मिट्टी की जांच और उचित उपचार करना किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.
पलामू: खरीफ सीजन को लेकर किसान पूरी तरह तैयारियों में जुट गए हैं. बुवाई शुरू होने से पहले खेतों की तैयारी तेज हो गई है. अधिकांश किसान अच्छी उपज की उम्मीद में उन्नत बीज, खाद और उर्वरकों का उपयोग करते हैं. हालांकि, इन सब के बाद भी कई बार अपेक्षित उत्पादन नहीं मिल पाता. इसकी एक बड़ी वजह मिट्टी की गुणवत्ता और उसका पीएच स्तर हो सकता है. ऐसे में खरीफ फसलों की बुवाई से पहले खेत का उपचार करना बेहद जरूरी है. खासकर पलामू क्षेत्र की अम्लीय मिट्टी में भूमि सुधार के उपाय अपनाकर किसान उत्पादन बढ़ा सकते हैं.
अधिकांश भूमि की प्रकृति अम्लीय
कृषि विज्ञान केंद्र, चियांकी (पलामू) के कृषि वैज्ञानिक डॉ. दिलीप पांडे ने लोकल18 को बताया कि पलामू की अधिकांश भूमि अम्लीय प्रकृति की है. ऐसी मिट्टी में कई आवश्यक पोषक तत्व मौजूद होने के बावजूद वे पौधों को पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हो पाते. इसका असर फसलों की वृद्धि पर पड़ता है और उत्पादन कम हो जाता है. मक्का, अरहर समेत कई खरीफ फसलों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है. ऐसे में केवल खाद और उर्वरक डालना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मिट्टी का उपचार करना भी जरूरी है.
फसलों की बढ़वार बेहतर
उन्होंने बताया कि मिट्टी के सुधार के लिए चूना का प्रयोग एक प्रभावी उपाय है. खेत में उचित मात्रा में चूना डालने से मिट्टी का पीएच स्तर बढ़कर 6 से 7 के बीच पहुंच जाता है, जिसे अधिकांश फसलों की वृद्धि के लिए आदर्श माना जाता है. पीएच संतुलित होने पर मिट्टी में पहले से मौजूद पोषक तत्व पौधों को आसानी से उपलब्ध होने लगते हैं. इससे फसलों की बढ़वार बेहतर होती है और उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि होती है.
चूना का छिड़काव
डॉ. पांडे ने किसानों को सलाह दी कि वे केवल बुझा हुआ चूना (स्लेक्ड लाइम) ही इस्तेमाल करें. यह गर्मी पैदा नहीं करता और खेत के लिए सुरक्षित माना जाता है. बुवाई से लगभग 40 से 45 दिन पहले खेत में चूना का छिड़काव करना चाहिए. प्रति कट्ठा 4 से 5 किलोग्राम चूना की दर से इसे खेत में समान रूप से फैलाने से बेहतर परिणाम मिलते हैं. इसके बाद जुताई कर चूना को मिट्टी में अच्छी तरह मिला देना चाहिए.
चूना उपचार का प्रभाव
डॉ. पांडे के मुताबिक, चूना उपचार का प्रभाव केवल एक वर्ष नहीं, बल्कि लगभग तीन वर्षों तक बना रह सकता है. इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और रासायनिक उर्वरकों, विशेषकर नत्रजन आधारित खादों की आवश्यकता भी कम हो जाती है. ऐसे में खरीफ सीजन से पहले खेत का उपचार किसानों के लिए काफी लाभकारी साबित हो सकता है. साथ ही, कम लागत में अधिक उत्पादन हासिल करने का रास्ता खोल सकता है.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें