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USS कोल पर अटैक: कैसे अक्टूबर 2000 में यमन पोर्ट के पास...


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USS Cole Attack 2000: अक्टूबर 2000 में यमन के एडन बंदरगाह पर सुबह 11 बजकर 48 म‍िनट पर अचानक एक भीषण धमाका होता है और फ‍िर धुएं का गुबार आसमान में फैल जाता है. यह अमेर‍िकी नौसेना के जंगी जहाज USS कोल पर अल-कायदा का बड़ा हमला था जिसमें 17 अमेरिकी नाविक मारे गए और 37 घायल हो गए. एफबीआई की जांच में सामने आया क‍ि आतंकवादी संगठन अल कायदा और ओसामा बिन लादेन ने इस आत्मघाती हमले की योजना बनाई थी.

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USS कोल पर अटैक: कैसे 2000 में यमन पोर्ट पर अमेरिकी जंगी जहाज पर हुआ हमला Zoom

USS कोल पर अटैक: कैसे अक्टूबर 2000 में यमन पोर्ट के पास अमेरिकी जंगी जहाज पर हुआ हमला, मारे गए 17 लोग, किसका था हाथ?

USS Cole Attack 2000: 12 अक्टूबर, साल 2000 की उस सुबह करीब 9:30 बजे पूरे अमेरिका में सब कुछ सामान्य था. लोग अपने-अपने घरों से दफ्तरों के लिए निकल रहे थे. बच्चे स्कूलों में थे. सड़कों पर भीड़ थी. अमेरिकी सेनाएं अपने-अपने मिशन और ट्रेनिंग में लगी थीं. वहीं दूसरी ओर यमन के एडन बंदरगाह पर भी सब सामान्य लग रहा था. यहां अमेरिकी नौसेना का मिसाइल डिस्ट्रॉयर युद्धपोत यूएसएस कोल ईंधन लेने के लिए रुका था. उस वक्त जहाज की कमान कमांडर किर्क लिपोल्ड के हाथ में थी. ठीक सुबह 9:30 बजे जहाज बर्थ पर लग गया.

हर तरफ काम में लगे हुए सैनिक और बंदरगाह कर्मचारी थे. कमांडर लिपोल्ड भी निश्चिंत थे. इसी दौरान 10:30 बजे युद्धपोत में ईंधन भरना शुरू हुआ. ईंधन भरने की प्रक्रिया थोड़ी देर में पूरी होती है ऐसे में सैनिक लगातार काम में लगे थे और ऐसा होते-होते कब 48 मिनट बीत गईं पता भी नहीं चला.

इसी दौरान 11:18 मिनट हुए थे कि जहाज के बायीं तरफ एक छोटी सी फाइबरग्लास नाव आ गई.उस नाव में दो युवक सवार थे. उन्होंने जहाज के नाविकों को मुस्कुराते हुए हाथ हिलाया. नाविकों ने भी जवाब में हाथ हिलाया और मुस्कुरा दिए और सोच भी नहीं पाए कि जहाज के इतने करीब ये नाव क्यों आई है, इतने में ही अगले ही पल एक जोरदार धमाका हुआ.

धमाका इतना तेज था कि आसमान में धुएं का गुबार फैल गया. युद्धपोत में आग लग गई और इतनी भयंकर आवाज हुई कि उसने समुद्री जीवों में हलचल कर दी हो. हर तरफ चीख-पुकार और अफरातफरी मच गई. जब तक कोई कुछ समझ पाता, सैनिक खड़े-खड़े लाशों में तब्दील हो गए.

जो नाव टकराई थी उसमें लगभग 200-300 किलोग्राम विस्फोटक भरे थे. विस्फोट इतना तेज था कि जहाज के बायीं तरफ पानी की सतह के पास करीब 40 फीट चौड़ा और 40-60 फीट ऊंचा छेद हो गया. कई नाविक जो नीचे डेक पर खाना खा रहे थे या ड्यूटी पर थे, इसमें स्वाहा हो गए.

इस हमले में मारे गए 17 अमेरिकी नाविक
इस भीषण हमले में 17 अमेरिकी नाविकों की मौत हो गई जबकि 37 अन्य घायल हो गए. जहाज का पूरा संतुलन बिगड़ चुका था और वह डूबने के कगार पर पहुंच गया था, हालांकि वहां मौजूद चालक दल ने बहादुरी दिखाई और वे पूरे साहस से आग बुझाने के लिए कूद पड़े. उन्होंने सबसे पहले पानी रोकने का काम किया जिससे जहाज बच गया, लेकिन वे सैनिकों को नहीं बचा पाए.

किसने किया था हमला?
इस हमले की सूचना आग की तरह पूरी दुनिया में फैल गई. इस हमले से सबसे पहला शक नाव पर गया और फिर यह पता चला कि यह आतंकियों का आत्मघाती हमला था. तुरंत अमेरिकी जांच एजेंसियां काम पर लग गईं और जो पहली बात निकलकर आई वह ये कि यह हमला प्रमुख आतंकी संगठन अल-कायदा ने किया था. ओसामा बिन लादेन ने खुद इसकी योजना बनाई थी. इससे पहले जनवरी 2000 में अल-कायदा ने उसी बंदरगाह पर एक और अमेरिकी जहाज यूएसएस द सलिवन्स पर हमला करने की कोशिश की थी, लेकिन वह नाव भारी होने की वजह से डूब गई थी. उसी नाव और विस्फोटक को सुधारकर कोल पर इस्तेमाल किया गया.

About the Author

प्रिया गौतमSenior Correspondent

Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …

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