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बाबा जागेश्वर नाथ मंदिर के निर्माण में गाजीपुर के प्रसिद्ध इत्र कारोबारी गुरुचरण राम गया राम की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी. मंदिर के निर्माण से जुड़े स्थानीय और सामाजिक लोगों के सहयोग की भी चर्चा की जाती है. यही वजह है कि यह मंदिर सिर्फ पूजा का स्थान नहीं, बल्कि गाजीपुर की पुरानी सामाजिक और धार्मिक विरासत का हिस्सा माना जाता है. जागेश्वर नाथ मंदिर की सबसे खास बात इसका गंगा घाट के बिल्कुल करीब होना है, मंदिर परिसर से घाट और गंगा का दृश्य इसे शहर के दूसरे मंदिरों से अलग बनाता है। सुबह के समय यहां लोग पूजा-पाठ के साथ योग और ध्यान करते भी नजर आते हैं.
गाजीपुरः गंगा किनारे बसे गाजीपुर के गोला घाट की पहचान सिर्फ घाट और गंगा की खूबसूरती तक सीमित नहीं है, यहां करीब दो सदी पुराना बाबा जागेश्वर नाथ मंदिर आज भी आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है. स्थानीय मान्यता के अनुसार यहां विराजमान शिवलिंग को स्वयंभू शिव माना जाता है. सावन के महीने में मंदिर में भक्तों की भीड़ बढ़ जाती है, वहीं सामूहिक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए भी यह मंदिर खास पहचान रखता है.
शिलालेख में दर्ज है पुराने बरामदे का इतिहास
मंदिर की प्राचीनता को लेकर स्थानीय लोगों के पास सिर्फ मान्यता ही नहीं, बल्कि मंदिर परिसर में मौजूद शिलालेख भी एक महत्वपूर्ण संकेत देता है. मंदिर के सामने बने बरामदे से जुड़े शिलालेख में इसके निर्माण से संबंधित जानकारी दर्ज होने की बात स्थानीय लोग बताते हैं. स्थानीय जानकार शैलेंद्र तिवारी के अनुसार, यह बरामदा करीब 100 वर्ष पुराना माना जाता है. तिवारी बताते हैं कि मंदिर का एक हिस्सा कभी बाढ़ की वजह से क्षतिग्रस्त होकर गिर गया था, बाद में उसका दोबारा निर्माण कराया गया. गंगा किनारे स्थित होने की वजह से मंदिर और घाट का यह रिश्ता इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान को और खास बनाता है.
इत्र कारोबारी ने कराया था मंदिर का निर्माण
स्थानीय इतिहास से जुड़े लोगों के मुताबिक बाबा जागेश्वर नाथ मंदिर के निर्माण में गाजीपुर के प्रसिद्ध इत्र कारोबारी गुरुचरण राम गया राम की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी. मंदिर के निर्माण से जुड़े स्थानीय और सामाजिक लोगों के सहयोग की भी चर्चा की जाती है. यही वजह है कि यह मंदिर सिर्फ पूजा का स्थान नहीं, बल्कि गाजीपुर की पुरानी सामाजिक और धार्मिक विरासत का हिस्सा माना जाता है. जागेश्वर नाथ मंदिर की सबसे खास बात इसका गंगा घाट के बिल्कुल करीब होना है, मंदिर परिसर से घाट और गंगा का दृश्य इसे शहर के दूसरे मंदिरों से अलग बनाता है। सुबह के समय यहां लोग पूजा-पाठ के साथ योग और ध्यान करते भी नजर आते हैं. गंगा किनारे बैठकर ध्यान करने और मंदिर में दर्शन करने की यह परंपरा स्थानीय लोगों के लिए धार्मिक अनुभव के साथ-साथ मानसिक शांति से भी जुड़ी हुई है.
सावन में बढ़ जाती है रौनक
सावन में बाबा जागेश्वर नाथ मंदिर में भक्तों की आवाजाही बढ़ जाती है, इसके अलावा जब भी शहर में सामूहिक भक्ति या सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं. मंदिर परिसर उसका केंद्र बन जाता है. इन दिनों यहां कजरी गायन का आयोजन भी हो रहा है. यानी सदियों पुराना यह मंदिर सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि गाजीपुर की लोक-संस्कृति और सामूहिक परंपराओं को भी अपने परिसर में जगह देता है. स्थानीय लोगों के मुताबिक मंदिर सुबह करीब 5 बजे खुल जाता है और सुबह 10:30 बजे तक दर्शन का समय रहता है. भक्तों की लगातार आवाजाही होने पर दिन में दर्शन चलते रहते हैं और शाम को मंदिर दोबारा करीब 5 बजे खुलता है.
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