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पलामू के सोनू कुमार गुप्ता ने ग्रेजुएशन के बाद खेती को चुना. उन्होंने पारंपरिक फसलों की जगह सब्जी उत्पादन शुरू किया. वे करेला, कद्दू और खीरा जैसी मौसमी सब्जियां उगाते हैं. आज वे सालाना 4 लाख रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं. सोनू अब आधुनिक तकनीक से खेती का दायरा बढ़ाना चाहते हैं.
पलामूः आज के समय में जहां अधिकांश युवा पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश में बड़े शहरों की ओर रुख करते हैं. वहीं पलामू जिले के खामडीह निवासी युवा किसान सोनू कुमार गुप्ता ने खेती को ही अपना करियर बनाया. ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने नौकरी की दौड़ में शामिल होने के बजाय सब्जी की खेती को अपना लिया. आज उनकी मेहनत न सिर्फ परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है, बल्कि आसपास के युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है.
पिता के साथ खेतों में काम करते-करते बढ़ा खेती से लगाव
सोनू ने लोकल18 को बताया कि वर्ष 2018 में उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. पढ़ाई के दौरान ही वे अपने पिता के साथ खेतों में हाथ बंटाते थे. इसी दौरान उन्हें खेती की बारीकियां सीखने का अवसर मिला. ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने पूरी तरह खेती को ही अपना व्यवसाय बनाने का निर्णय लिया. शुरुआत में परिवार धान और गेहूं की खेती करता था, लेकिन उसमें अपेक्षित लाभ नहीं मिलने के कारण उन्होंने सब्जी उत्पादन पर विशेष ध्यान देना शुरू किया.
सब्जी की खेती ने बदली परिवार की आर्थिक तस्वीर
सोनू ने आगे कहा कि घर की आर्थिक स्थिति पहले काफी कमजोर थी. खेती से पर्याप्त आमदनी नहीं होने के कारण कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था. ऐसे में उन्होंने करैला, नेनुआ, झिंगी, कद्दू, खीरा सहित कई मौसमी और सालभर उगाई जाने वाली सब्जियों की खेती शुरू की. आज करीब एक से डेढ़ एकड़ भूमि पर सालभर विभिन्न प्रकार की सब्जियां उगाकर वे लागत निकालने के बाद सालाना तीन से चार लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं. इससे परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है.
आधुनिक खेती अपनाने की है योजना
युवा किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक और समेकित कृषि मॉडल अपनाना चाहते हैं. उनका सपना ट्रिपल लेयर खेती विकसित करना है, जिससे एक ही भूमि पर अलग-अलग स्तरों पर कई फसलों का उत्पादन कर आय को और बढ़ाया जा सके. उनका मानना है कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक खेती अपनाकर कम जमीन से भी बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है.
सरकारी सहयोग और सोलर पंप की जरूरत
सोनू ने आगे बताया कि अब तक उन्हें सब्जी की खेती के लिए किसी विशेष सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पाया है. यदि जिला प्रशासन और सरकार की ओर से योजनाओं का सहयोग मिले तो वे खेती का दायरा और बढ़ा सकते हैं. उन्होंने बताया कि क्षेत्र में बिजली की समस्या काफी गंभीर है, जिससे सिंचाई प्रभावित होती है. वर्तमान में वे सतही सिंचाई के माध्यम से फसलों की सिंचाई कर रहे हैं. यदि सोलर पंप की सुविधा उपलब्ध हो जाए तो सिंचाई आसान होगी, लागत घटेगी और सब्जी उत्पादन को नई ऊंचाई तक पहुंचाया जा सकेगा.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.