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Jharkhand Politics: जेएमएम की पृष्ठभूमि से निकलकर बीजेपी में शामिल हुईं दिशोम गुरु शिबू सोरेन की बड़ी बहू सीता सोरेन पिछले कुछ हफ्तों से लगातार संताल परगना के विभिन्न जिलों का दौरा कर रही हैं. लेकिन, इसी बीच जामा विधानसभा क्षेत्र से तीन बार की पूर्व विधायक सीता सोरेन ने इसी बीच ऐसी बात कह दी है जिस को लेकर सियासी कयासबाजी शुरू हो गई है. दरअसल, एक तरफ जहां अपनी पुरानी पार्टी जेएमएम और ‘घर’ के प्रति उनकी भावुकता दिखी, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी में अपनी मौजूदा स्थिति और सांगठनिक जिम्मेदारी को लेकर उन्होंने एक बेबाक और स्पष्ट संदेश भी दे दिया है.
संथाल में एक्टिव सीता सोरेन बोलीं- JMM घर है, लेकिन BJP में पूरी ईमानदारी से काम कर रही हूं
रांची. झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में आईं पूर्व विधायक सीता सोरेन का अपनी पुरानी पार्टी को लेकर दर्द छलक पड़ा. न्यूज 18 से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि “JMM मेरा घर था, इसलिए उसकी याद तो आती है.” हालांकि, इसके आगे उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह भारतीय जनता पार्टी में पूरी निष्ठा और निस्वार्थ भाव से काम कर रही हैं. बता दें कि सीता सोरेन झारखंड आंदोलन के कद्दावर नेता स्वर्गीय दुर्गा सोरेन की पत्नी हैं और उनका सोरेन परिवार से गहरा नाता रहा है. वर्तमान में वह बीजेपी में हैं. पिछले कुछ हफ्तों से संथाल परगना में लगातार सक्रिय हैं और आदिवासियों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठा रही हैं और लगातार इसको लेकर मुखर हैं.
भाजपा नेत्री और जेएमएम की पूर्व विधायक सीता सोरेन ने कहा कि संथाल परगना में आदिवासियों की आबादी लगातार घट रही है. इसी मुद्दे को लेकर वह लगातार क्षेत्र का दौरा कर रही हैं और लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझ रही हैं. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि “घर यानी JMM की याद तो आती है, लेकिन आज मैं जिस पार्टी में हूं, वहां पूरी ईमानदारी और निस्वार्थ भाव से काम कर रही हूं.” उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य पद नहीं, बल्कि जनता के मुद्दों को उठाना है.
भाजपा में अब तक कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिलने के सवाल पर सीता सोरेन ने कहा कि “जिम्मेदारी देना पार्टी का अधिकार है, जब पार्टी उचित समझेगी, जिम्मेदारी देगी. फिलहाल मैं बिना किसी अपेक्षा के संगठन और जनता के लिए काम कर रही हूं.” उन्होंने दोहराया कि संथाल क्षेत्र में आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दे उनकी प्राथमिकता हैं और आगे भी वह इन्हें मजबूती से उठाती रहेंगी.
संताल की राजनीति में सीता सोरेन की सक्रियता के मायने
राजनीति के जानकारों का मानना है कि संताल परगना में सीता सोरेन की यह ताबड़तोड़ सक्रियता आने वाले दिनों में झारखंड के सियासी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है. जेएमएम के इस पारंपरिक गढ़ में घुसकर आदिवासी अस्मिता और आबादी घटने के मुद्दों को उठाना सीधे तौर पर हेमंत सोरेन सरकार की नीतियों को चुनौती देना है. अब देखना यह होगा कि बीजेपी नेतृत्व सीता सोरेन को कब और कितनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपता है.
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