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चावल का साबुन, मसूर दाल का स्क्रब… वारखा ने नौकरी छोड़, शुरू...


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Jamshedpur’s Warkha Success Story: जमशेदपुर की बेटी वारखा, हैदराबाद में अच्छी-खासी नौकरी कर रही थी पर उनका मन जॉब में नहीं लगा. उन्होंने अपना स्टार्टअप शुरू किया और शुरुआती संघर्ष साथ ही कड़ी मेहनत के बाद आज उस मुकाम पर हैं, जहां देश ही नहीं विदेशों में भी उनके ग्राहक हैं.

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जमशेदपुर. आज के दौर में जहां अधिकांश युवा अच्छी नौकरी और ऊंचे वेतन को ही सफलता का पैमाना मानते हैं, वहीं जमशेदपुर की वारखा ने एक अलग राह चुनकर यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो अपने सपनों को साकार किया जा सकता है. हैदराबाद की एक प्रतिष्ठित कॉरपोरेट कंपनी में अच्छी-खासी सैलरी वाली नौकरी करने के बावजूद उन्हें अपने काम से संतुष्टि नहीं मिल रही थी. इसी दौरान उन्होंने महसूस किया कि लोगों में त्वचा संबंधी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं और बाजार में मिलने वाले कई उत्पादों में रासायनिक तत्वों का अधिक उपयोग किया जाता है.

नौकरी छोड़ी, शुरू किया स्टार्टअप
यहीं से उनके मन में कुछ नया करने का विचार आया. उन्होंने नौकरी छोड़ने का साहसिक निर्णय लिया और अपनी मां के साथ मिलकर ‘डिवाइन क्राफ्ट बाय वारखा’ नाम से एक स्टार्टअप की शुरुआत की. शुरुआत में संसाधन सीमित थे और ग्राहकों तक पहुंच बनाना भी आसान नहीं था, लेकिन वारखा ने हार नहीं मानी. उन्होंने पूरी तरह प्राकृतिक और हर्बल सामग्री से बने उत्पाद तैयार करने पर ध्यान केंद्रित किया.

चावल से बना साबुन, मसूर दाल का स्क्रब
उनके उत्पादों में कुमकुमादी सीरम, मसूर दाल से बना फेस स्क्रब, चावल से बने साबुन और स्क्रब, हर्बल फेस पैक, प्राकृतिक क्रीम और लिप ग्लॉस शामिल हैं. इन उत्पादों को तैयार करने में लैवेंडर, गुलाब और अन्य प्राकृतिक जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है. वारखा का मानना है कि प्रकृति में हर समस्या का समाधान मौजूद है, बस उसे सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने की जरूरत है.

विदेशों में भी हैं ग्राहक
शुरुआती दिनों में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. ग्राहकों का विश्वास जीतना, उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखना और बाजार में अपनी अलग पहचान बनाना आसान नहीं था. लेकिन उनकी मेहनत और उत्पादों की गुणवत्ता ने धीरे-धीरे लोगों का भरोसा जीत लिया. आज उनके ग्राहक केवल भारत के विभिन्न राज्यों में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी हैं.

वारखा बताती हैं कि उनके अधिकांश ग्राहक ऐसे हैं, जो एक बार उत्पादों का इस्तेमाल करने के बाद दोबारा ऑर्डर जरूर करते हैं. यही उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है. उनका कहना है कि जब लोगों को प्राकृतिक उत्पादों के फायदे समझ में आने लगते हैं, तो वे रासायनिक उत्पादों से दूरी बनाना शुरू कर देते हैं.

नवाचार के दम पर बनाई पहचान
आज वारखा उन युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई हैं, जो अपने दम पर कुछ नया करना चाहती हैं. उन्होंने यह साबित कर दिया है कि सफलता केवल नौकरी में ही नहीं, बल्कि अपने जुनून को पहचानकर उसे व्यवसाय में बदलने में भी मिल सकती है. जमशेदपुर की यह बेटी आज न सिर्फ आत्मनिर्भर बनी है, बल्कि अपनी मेहनत और नवाचार के दम पर देश-विदेश में अपनी अलग पहचान भी स्थापित कर रही है.

About the Author

Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें



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