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चैंपियंस के साथ ये कैसा सलूक? इतिहास रचने वाले खिलाड़ियों को ई-रिक्शा...


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Bhopal News: इस स्पर्धा में देव कुमार मीणा ने गोल्ड मेडल तो कुलदीप ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया. इस उपलब्धि के महज कुछ घंटों बाद दोनों खिलाड़ियों को खुद अपने पोल ई-रिक्शा पर लादकर ले जाने पड़े, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

चैंपियंस के साथ ये कैसा सलूक? इतिहास रचने वालों को ई-रिक्शा में ढोने पड़े पोलZoom

पोल्स को ई-रिक्शा में रखते देव कुमार मीणा और कुलदीप कुमार.

भोपाल/रांची. पोल वॉल्ट मुकाबले में भाग लेने वाले मध्य प्रदेश अकादमी भोपाल के युवा एथलीट देव कुमार मीणा और कुलदीप कुमार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देख हर कोई दंग है. सिस्टम पर तमाम तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं. वायरल वीडियो में दोनों खिलाड़ियों को सड़क किनारे देखा जा सकता है. देव और कुलदीप अपने-अपने फाइबरग्लास पोल ई-रिक्शा में लादकर होटल ले जाते दिख रहे हैं. यह तस्वीर तब के चंद घंटों बाद की है, जब दोनों खिलाड़ियों ने एथलेटिक्स में इतिहास रचा और फिर उन्हें बदहाल सिस्टम के चलते ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा.

दरअसल देव कुमार मीणा और कुलदीप कुमार ने रांची के बिरसा मुंडा स्टेडियम में आयोजित फेडरेशन कप में पुरुष पोल वॉल्ट में 5.45 मीटर की समान छलांग लगाकर नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया और कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए क्वालिफाई कर लिया. इस स्पर्धा में देव कुमार ने गोल्ड तो कुलदीप ने सिल्वर मेडल (काउंटडाउन के आधार पर) अपने नाम किया. इस उपलब्धि के कुछ घंटों बाद दोनों खिलाड़ियों को खुद अपने पोल ई-रिक्शा पर लादकर ले जाने पड़े, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. देश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों के साथ इस तरह के सलूक को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.

टीटीई ने ट्रेन से उतारा
इसी साल ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप से लौटते समय देव कुमार मीणा और कुलदीप कुमार को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में स्थित पनवेल स्टेशन पर टीटीई ने ट्रेन से उतार दिया था. दरअसल टीटीई ने उनके पोल्स के साथ यात्रा करने पर आपत्ति जताई थी. कहासुनी के बाद टीटीई ने उन्हें यात्रा करने से रोक दिया था. मजबूरन उन्हें ट्रेन से उतरना पड़ा. इस वजह से दोनों वहां करीब पांच घंटे तक फंसे रहे थे. टीटीई द्वारा की गई बदतमीजी के बाद देव कुमार मीणा ने एक भावुक वीडियो शेयर किया था. उन्होंने आपबीती सुनाते हुए कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के साथ ऐसा सलूक हो सकता है, तो सोचिए जूनियर लेवल के खिलाड़ियों साथ क्या होता होगा.

बताते चलें कि पोल वॉल्ट स्पर्धा में इस्तेमाल होने वाले पांच मीटर लंबे ये पोल बेहद खास और संवेदनशील होते हैं. इन्हें संभालना और एक जगह से दूसरी जगह ले जाना आसान काम नहीं होता है.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



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