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जमशेदपुर करणी नेता हत्याकांड मामला:बार संचालक के घर पहुंची पुलिस, तलाश में...




जमशेदपुर बिष्टुपुर स्थित डबल डाउन बार के बाहर करणी सेना के युवा जिलाध्यक्ष हिमांशु सिंह की पुलिस वैन से खींचकर हत्या के मामले में प्रशासन और परिजनों के बीच चला आ रहा गतिरोध बुधवार को आखिरकार समाप्त हो गया। इधर, हत्याकांड में पुलिस को संदेह है कि बार में हुए हंगामे में शामिल लोगों को सबक सिखाने के लिए बार संचालक नीरज सिंह ने दो बदमाश कदमा के राहुल दुबे और गम्हरिया के विश्वनाथ मंडल को बुलाया था। इस मामले में पुलिस ने बुधवार की शाम नीरज सिंह के मानगो स्थित घर पर छापेमारी भी की। मौके पर नीरज मौजूद नहीं थे। पुलिस वहां से उनकी डिफेंडर और किया कार जब्त कर थाने ले आई है और उनकी तलाश में जुट गई है। पुलिस बदमाशों और बार संचालक की कॉल डिटेल की जांच कर रही है। पहले हुई वार्ता, फिर हुआ अंतिम संस्कार पुलिस की ओर से मृतक हिमांशु सिंह का बुधवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे पोस्टमार्टम कराए जाने से परिजन नाराज थे। यही वजह थी कि वे शव को लेकर नहीं गए थे। मामले को सुलझाने के लिए नाराज परिजनों से वार्ता को पहुंचे अधिकारियों से परिजन उलझ गए। बाद में सरायकेला उपायुक्त नीतीश कुमार और कोल्हान डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा के साथ करीब दो घंटे चली बार्ता के बाद सहमति बनी। इसके बाद पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त राजीव रंजन की ओर से लिखित आश्वासन दिए जाने पर परिजन शव लेने को तैयार हुए। देर शाम कड़ी सुरक्षा के बीच घर से बर्निंग घाट तक पैदल शवयात्रा निकली। बिष्टुपुर स्थित पार्वती घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। परिवार ने उपायुक्त को सौंपे मांग पत्र परिवार की और से सरायकेला और पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त के नाम तीन सूत्री मांगपत्र सौंपा गया। इसमें घटनास्थल पर मौजूद पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई, मामले की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई और मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी दिलाने की मांग शामिल थी। वार्ता के बाद उपायुक्त राजीव रंजन ने पोस्टमार्टम हाउस में लिखित आश्वासन सौंपा, जिसके बाद गतिरोध समाप्त हो गया। शहर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे तनाव को देखते हुए शहर भर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। जिला प्रशासन ने शहर के छह इलाकों में निषेधाज्ञा लागू कर दी थी। हर चौक-चौराहे पर पुलिस बल तैनात रहा। दिनभर हिमांशु के घर पर प्रशासनिक अधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं का आना जाना लगा रहा। सभी ने परिजनों को ढांढस बंधाया और हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया। कई गणमान्य लोग पहुंचे मिलने सुबह पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास हिमांशु के घर पहुंचे। उन्होंने दोषियों पर कार्रवाई की मांग करते हुए बढ़ते अपराध के खिलाफ 3 जुलाई को शहर बंद करने की घोषणा की। उनके अलावा पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता, उनकी पत्नी मेयर सुधा गुप्ता समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं का भी आना-जाना लगा रहा। टीएमएच गोलचक्कर में थी घेराबंदी, फोर्स रही तैनात जानकारी के मुताबिक बुधवार की सुबह साढ़े पांच बजे सीओ, एसडीपीओ और आदित्यपुर थाना प्रभारी हिमांशु के घर पहुंचे। वहां परिजनों को शव का पोस्टमार्टम हो जाने की जानकारी दी गई, जिसके बाद हिमांशु की बहन का गुस्सा फूट पड़ा। इसके करीब आधे घंटे बाद जिला प्रशासन के अधिकारी दोबारा वार्ता के लिए पहुंचे। इस दौरान परिजन टीएमएच पहुंचकर शव नहीं सौंपे जाने पर बिष्टुपुर थाना में अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग पर अड़ गए। इसे देखते हुए टीएमएच गोलचक्कर के पास पुलिस बल तैनात कर दिया गया। वहीं आदित्यपुर में दूसरी बार वार्ता के लिए पहुंचे अधिकारियों को उम्र भीड़ ने लौटा दिया। तीसरी बार भी वार्ता विफल रही और चौथी बार सहमति बन सकी। क्या था पूरा मामला 27 जून की रात बिष्टुपुर स्थित डीडी बार में छेड़खानी को लेकर दो गुटों के बीच विवाद हुआ था। इस पर हिमांशु अपने साथियों के साथ बीच-बचाव करने पहुंचे। बाद में बाउंसरों ने दोनों पक्षों को शांत करा दिया। कुछ देर बाद हिमांशु और प्रत्युष पार्किंग से बाइक लेकर घर लौटने की तैयारी कर रहे थे, तभी दूसरे पक्ष के करीब छह-सात लोग वहां पहुंचे और दोनों से मारपीट करने लगे। पुलिस ने हिमांशु की पुलिस वाहन में बैठा लिया। तभी प्रत्युष पर चाकू से हमला करने वालों ने हिमांशु को पुलिस वैन से खींचकर चाकू और चापड़ से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। मायलों को इलाज के लिए टीएमएच ले जाया गया। वहां हिमांशु के साथी की हालत गंभीर होने पर अगले दिन उर्स कोलकाता रेफर कर दिया गया, जहां उसकी स्थिति खतरे से बाहर है। कहीं मंगलवार को इलाज के दौरान हिमांशु सिंह की मौत हो गई। मौत के बाद भड़का लोगों का आक्रोश हिमांशु सिंह की मौत की खबर मिलते ही लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतर आए और पुलिस प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान सिटी एसपी के वाहन में भी तोड़फोड़ की गई। हालात को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ी। वहीं घटना के दूसरे दिन बिष्टुपुर थाना प्रभारी आलोक कुमार दुबे और घटनास्थल पर मौजूद दी एएसआई व एक जवान को निलंबित किया जा चुका है।



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