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जमशेदपुर का 100 साल पुराना पेड़ नहीं ऐसेट से कम, तना इतना...


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Jamshedpur 100 Year Old Tree: जमशेदपुर में साकची के पास सौ साल से भी अधिक पुराना कहा जाने वाला अफ्रीकन बाओबाब पेड़ है. यह इतना खास है कि टाटा स्टील ने इसे संरक्षित किया है. एक्सपर्ट कहते हैं कि इसकी उम्र 3000 साल तक होती है. इसकी जड़ें इतनी मोटी और फैली हैं कि अंदर की सुरंग में 3-4 लोग बैठ जाएं. सालों से इस पेड़ को देखने लोग आते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए इस कल्पतरु को सुरक्षित रखने का पूरा इंतजाम भी किया गया है.

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जमशेदपुर. भारत जैव विविधता के मामले में दुनिया के सबसे समृद्ध देशों में गिना जाता है. यहां कई ऐसे दुर्लभ और अनोखे पेड़-पौधे पाए जाते हैं, जिनका इतिहास सदियों पुराना है. झारखंड भी प्राकृतिक संपदा और विशाल वृक्षों के लिए जाना जाता है. इन्हीं दुर्लभ वृक्षों में एक है अफ्रीकन बाओबाब (Baobab) का पेड़, जो जमशेदपुर के साकची थाना क्षेत्र के पास स्थित है. अपनी विशालकाय संरचना और ऐतिहासिक महत्व के कारण यह पेड़ शहरवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.

संरक्षित किया गया है पेड़
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह वृक्ष पिछले 100 वर्षों से भी अधिक समय से इस क्षेत्र में मौजूद है. इसकी विशाल आकृति और अनोखी बनावट इसे सामान्य पेड़ों से अलग बनाती है. टाटा स्टील द्वारा इस ऐतिहासिक वृक्ष को संरक्षित किया गया है और इसके चारों ओर सुरक्षा व्यवस्था की गई है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस प्राकृतिक धरोहर को देख सकें. वर्षों से यह पेड़ शहर के विकास का साक्षी रहा है और आज भी मजबूती के साथ खड़ा है.

भारत में कहते हैं कल्पतरु
जानकारों के अनुसार, बाओबाब दुनिया के सबसे लंबे समय तक जीवित रहने वाले वृक्षों में से एक माना जाता है. अफ्रीका में इसकी कुछ प्रजातियों की आयु हजारों वर्षों तक बताई जाती है. इसी कारण इसे कई स्थानों पर ‘ट्री ऑफ लाइफ’ यानी जीवन का वृक्ष भी कहा जाता है. भारत में कई लोग इसे कल्पतरु के नाम से भी जानते हैं. इसकी विशाल तना संरचना, मोटी छाल और असाधारण जल भंडारण क्षमता इसे बेहद खास बनाती है.

छाल, पत्ती, फल सबका इस्तेमाल
शहर के वरिष्ठ पत्रकार और इतिहास प्रेमी विकास श्रीवास्तव बताते हैं कि इस वृक्ष का महत्व केवल इसकी उम्र या आकार तक सीमित नहीं है. पौराणिक और सांस्कृतिक संदर्भों में भी ऐसे वृक्षों का उल्लेख मिलता है. बाओबाब की छाल, पत्तियां और फल विभिन्न प्रकार की पारंपरिक औषधियों में उपयोग किए जाते रहे हैं. इसके फल में विटामिन-सी और अन्य पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जबकि इसकी छाल और पत्तियों का उपयोग कई देशों में औषधीय उद्देश्यों के लिए किया जाता है.

पेड़ में प्राकृतिक सुरंग, बैठ सकते हैं 3-4 लोग
इस वृक्ष की सबसे अनोखी विशेषता इसका विशाल तना है. बाओबाब का तना इतना चौड़ा होता है कि उसके भीतर प्राकृतिक रूप से एक सुरंगनुमा स्थान बन जाता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इसके अंदर आराम से तीन से चार व्यक्ति बैठ सकते हैं. यही नहीं, यह वृक्ष अपने तने में बड़ी मात्रा में पानी संग्रहित करने की क्षमता रखता है, जिससे यह लंबे समय तक सूखे की स्थिति में भी जीवित रह सकता है. वैज्ञानिक अध्ययनों में भी बाओबाब की जल संचयन क्षमता का उल्लेख मिलता है.

आने वाली पीढ़ियों को देगा संदेश
आज जमशेदपुर का यह बाओबाब वृक्ष केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि शहर की प्राकृतिक और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक बन चुका है. यह लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है और बताता है कि प्रकृति की अनमोल धरोहरों को बचाना कितना जरूरी है. तेजी से बढ़ते शहरीकरण के दौर में यह विशाल कल्पतरु आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति से जुड़ने और उसकी महत्ता समझने की प्रेरणा देता रहेगा.

About the Author

Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें



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