जमशेदपुर. शहर में ऑटो से सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए अब यात्रा पहले की तुलना में महंगी होने जा रही है. चार वर्षों के लंबे अंतराल के बाद ऑटो किराए में बढ़ोतरी की गई है. बढ़ते पेट्रोल और सीएनजी के दाम, वाहन रखरखाव की बढ़ती लागत, स्पेयर पार्ट्स की महंगाई और अन्य परिचालन खर्चों को देखते हुए शिक्षित बेरोजगार टेंपो चालक-चालक संघ ने किराए में संशोधन का फैसला लिया है. नई दरें 12 जून से लागू होने की संभावना है. इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा, जो रोजाना नौकरी, व्यवसाय, पढ़ाई या अन्य कामों के लिए ऑटो का उपयोग करते हैं.
अधिकतर रूटों में बढ़े 5 रुपये
शहर के अधिकांश लोकल रूटों पर किराए में 5 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है. देखने में यह बढ़ोतरी भले ही छोटी लगे, लेकिन रोजाना दो से चार बार ऑटो का उपयोग करने वाले यात्रियों के लिए यह हर महीने अतिरिक्त सैकड़ों रुपये का खर्च बढ़ा देगी. साकची से भालूबासा, एग्रीको और सिद्धगोड़ा का किराया 10 रुपये से बढ़कर 15 रुपये हो गया है.
वहीं बागुनहातु का किराया 15 से 20 रुपये, बारीडीह बस्ती और टेल्को स्टेशन का किराया 20 से 25 रुपये तथा मानगो चौक और गोलमुरी टिनप्लेट का किराया 10 से बढ़ाकर 15 रुपये कर दिया गया है. इसी तरह आदित्यपुर का किराया 20 से 25 रुपये, छोटा गोविंदपुर का 40 से 45 रुपये और कांड्रा का 55 से बढ़ाकर 60 रुपये कर दिया गया है.
लंबे रूट हुए और महंगे
हालांकि, सबसे अधिक चर्चा लंबी दूरी के रूटों पर बढ़े किराए को लेकर हो रही है. टाटानगर रेलवे स्टेशन के एक ऑटो संचालक ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि पहले जमशेदपुर से एनआईटी तक जाने के लिए यात्रियों को लगभग 300 रुपये खर्च करने पड़ते थे, लेकिन अब यही किराया बढ़कर 330 से 370 रुपये तक पहुंच गया है.
यानी एक ही सफर में 30 से 70 रुपये तक अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है. वहीं एमजीएम अस्पताल तक जाने वाले यात्रियों की जेब पर भी बड़ा असर पड़ा है. पहले जहां विभिन्न इलाकों से एमजीएम अस्पताल पहुंचने के लिए करीब 350 रुपये देने पड़ते थे, अब वही किराया बढ़कर 450 से 500 रुपये तक हो गया है.
किराया बढ़ाना मजबूरी
ऑटो चालकों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में पेट्रोल और सीएनजी की कीमतों में लगातार इजाफा हुआ है. इसके अलावा टायर, बैटरी, इंजन ऑयल, सर्विसिंग और अन्य स्पेयर पार्ट्स की कीमतों में भी भारी वृद्धि हुई है. ऐसे में पुराने किराए पर वाहन चलाना आर्थिक रूप से कठिन होता जा रहा था. चालकों का कहना है कि किराए में यह वृद्धि उनकी मजबूरी है, क्योंकि बढ़ती लागत के बीच परिवार का भरण-पोषण और वाहन का संचालन दोनों चुनौतीपूर्ण हो गया था.
महीने के अंत तक बढ़ेगा भार
दूसरी ओर यात्रियों का मानना है कि पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे लोगों के लिए यह फैसला अतिरिक्त बोझ लेकर आया है. खासकर छात्र, नौकरीपेशा लोग और मरीजों के परिजन इससे अधिक प्रभावित होंगे, क्योंकि उन्हें प्रतिदिन या नियमित रूप से ऑटो का सहारा लेना पड़ता है. कई यात्रियों का कहना है कि अगर रोजाना आने-जाने में 10 से 20 रुपये अतिरिक्त खर्च होंगे, तो महीने के अंत तक यह राशि 300 से 600 रुपये तक पहुंच सकती है.
नए सिरे से लगाना होगा हिसाब
शहर में ऑटो किराए में औसतन 20 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. ऐसे में अब यात्रियों को सफर पर निकलने से पहले अपनी जेब का हिसाब भी नए सिरे से लगाना होगा. चार साल बाद हुए इस बदलाव ने जहां ऑटो चालकों को कुछ राहत दी है, वहीं आम यात्रियों के लिए रोजमर्रा की यात्रा को थोड़ा और महंगा बना दिया है. आने वाले दिनों में यह बढ़ा हुआ किराया शहर की परिवहन व्यवस्था और लोगों के मासिक बजट दोनों पर असर डालता नजर आएगा.