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जांच के 18 दिन बाद भी रजिस्ट्रेशन के बिना चलाए जा रहे...




भास्कर न्यूज | महुआडांड़ बकरीद पर्व को लेकर महुआडांड़ प्रखंड में तैयारियां तेज हो गई हैं। गांवों से लेकर बाजारों तक मुस्लिम समाज में उत्साह और आस्था का माहौल देखा जा रहा है। मस्जिदों, घरों और बाजारों में पर्व की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। वहीं कुर्बानी के लिए बकरों की खरीदारी भी जोरों पर चल रही है, जिससे पशु बाजारों में चहल-पहल देखी जा रही है। इस्लामी मान्यता के अनुसार बकरीद हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की महान कुर्बानी की याद में मनाई जाती है। यह पर्व त्याग, समर्पण, भाईचारा और सामाजिक जिम्मेदारियों का संदेश देता है। धर्मगुरुओं ने लोगों से अपील की है कि पर्व को सादगी, शांति और आपसी सौहार्द के साथ मनाएं तथा जरूरतमंदों की सहायता करें। बाजार सहित आसपास के क्षेत्रों में बकरों की अलग-अलग नस्लें लोगों को आकर्षित कर रही हैं। पशु विक्रेताओं के अनुसार इस बार बाजार में अच्छी मांग देखने को मिल रही है। लोग अपनी क्षमता के अनुसार कुर्बानी के लिए पशुओं की खरीदारी कर रहे हैं। भास्कर न्यूज | महुआडांड़ महुआडांड़ में बगैर रजिस्ट्रेशन के 9 निजी क्लीनिक चलाए जा रहे हैं। लेकिन जांच के 18 दिन बाद भी किसी क्लीनिक को सील नहीं किया गया। कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई। स्वास्थ्य विभाग की टीम दोबारा जांच करने भी नहीं पहुंची। जांच में गड़बड़ी साबित होने और क्लीनिक को बंद रखने का आदेश मिलने के बाद भी क्लीनिक खोले जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि इन्हें किसी का संरक्षण मिला हुआ है। इसी कारण नोटिस जारी होने के बाद भी निजी क्लीनिक धड़ल्ले से चल रहे हैं। गौरतलब है कि क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत प्रशासन की जांच में 9 निजी क्लीनिकों के पास वैध कागजात नहीं मिले थे। इस दौरान दो क्लीनिक बंद रहने के कारण उनके दस्तावेजों का सत्यापन नहीं हो सका। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा जारी पत्र के अनुसार ये निजी क्लीनिक बिना मान्यता, बिना पंजीकरण धड़ल्ले से चल रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार सूर्या क्लीनिक का पंजीकरण काफी समय पहले ही समाप्त हो चुका था। फिर भी यहां धड़ल्ले से मरीजों का इलाज किया जा रहा था। निंजा डेंटल क्लीनिक, फैज ड्रग्स, आस्था नर्सिंग होम, मुस्कान क्लीनिक, मेडिकेयर डेंटल क्लीनिक, न्यू आई केयर, भगवती मेडिकल, चांदसी दवाखाना में भी जांच के दौरान कोई वैध पंजीकरण प्रमाण पत्र नहीं मिला था। गेट वेल हॉस्पिटल, सेवा सदन बंद मिले थे। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने सख्त निर्देश दिया था कि वैध पंजीकरण प्रमाण पत्र मिलने तक सभी निजी संस्थान पूरी तरह बंद रहेंगे। लेकिन जमीन पर स्थिति उलट है। नोटिस के बावजूद क्लीनिक रोज खुल रहे हैं। मरीज देखना, इलाज करना, सब पहले जैसा जारी है। टीम के निरीक्षण से मच गया था हड़कंप एक संयुक्त टीम ने क्षेत्र के विभिन्न निजी क्लीनिकों और अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया था। टीम के अचानक पहुंचने से अवैध रूप से स्वास्थ्य केंद्र चलाने वाले संचालकों में हड़कंप मच गया था। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य विभाग के नियमों की जमकर धज्जियां उड़ती पाई गईं। कई बड़े, नामचीन क्लीनिकों के पास अनिवार्य पंजीकरण प्रमाण पत्र तक नहीं थे। ^सभी क्लीनिक संचालकों को रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र प्राप्त करने का निर्देश दिया गया है। जब तक प्रमाण पत्र नहीं लिया जाता, तब तक क्लीनिक बंद रखने को कहा गया है। अन्यथा कानूनी कार्रवाई की जाएगी।^ अमित खलखो, चिकित्सा प्रभारी



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