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करूर भगदड़ मामले की जांच फिलहाल सीबीआई के पास है और यह मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है. डीएमके की इस नई याचिका ने सीएम विजय के लिए परेशानी बढ़ा दी है.
करूर रैली में हुई भगदड़ में 41 लोगों की मौत हो गई थी. (पीटीआई)
नई दिल्ली. करूर भगदड़ मामले में तमिलनाडु की राजनीति अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है. द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के संगठन सचिव आर.एस. भारती ने सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दाखिल कर मांग की है कि मामले की जांच पूरी होने तक तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय, मंत्री आधव अर्जुना और अन्य आरोपियों को इस मामले पर सार्वजनिक बयान देने से रोका जाए.
आर.एस. भारती ने अपनी याचिका में कहा है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) करूर भगदड़ मामले की जांच कर रही है और ऐसे समय में आरोपियों द्वारा सार्वजनिक टिप्पणियां करना जांच की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है. उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि जांच पूरी होने तक सभी आरोपियों की सार्वजनिक बयानबाजी पर रोक लगाई जाए.
याचिका में यह भी मांग की गई है कि जांच के दौरान मुख्यमंत्री, मंत्री और अन्य आरोपी पीड़ित परिवारों से सीधे संपर्क या मुलाकात न करें, क्योंकि इससे जांच की दिशा प्रभावित होने या गवाहों पर दबाव पड़ने की आशंका पैदा हो सकती है. डीएमके नेता ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि वह लंबित करूर भगदड़ मामले की सुनवाई में उन्हें हस्तक्षेपकर्ता (इंटरवीनर) के रूप में शामिल करने की अनुमति दे और जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करे.
डीएमके की इस नई याचिका ने मामले को एक नया राजनीतिक और कानूनी मोड़ दे दिया है. LiveLaw के अनुसार, यह अर्ज़ी उस स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) में दायर की गई है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने 13 अक्टूबर, 2025 के अपने आदेश के ज़रिए करूर में 27 सितंबर, 2025 को हुई भगदड़ की जांच CBI को सौंप दी थी. इस जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अजय रस्तोगी की अध्यक्षता वाली एक कमेटी कर रही है.
तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) की एक जनसभा के दौरान भगदड़ मच गई, जिसमें 41 लोगों की मौत हो गई और 142 लोग घायल हो गए. अर्जी में राज्य की शुरुआती जांच का ज़िक्र है, जिसमें घटना के लिए कई वजहें बताई गई हैं: उम्मीद से कम भीड़ की जानकारी देना, बताई गई संख्या से ज़्यादा कार्यकर्ताओं का जुटना, विजय का देर से पहुंचना, बुनियादी सुविधाओं की कमी, पुलिस के सुरक्षा निर्देशों का पालन न करना और पहले से ही खचाखच भरी जगह पर कैंपेन गाड़ी का ले जाना.
याचिका में कहा गया है कि जिन लोगों के खिलाफ़ पहले चार्जशीट दाखिल की गई थी, उनमें से कई अब 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद तमिलनाडु कैबिनेट के सदस्य हैं. इसमें यह भी बताया गया है कि CBI ने मुख्यमंत्री विजय और TVK के कई नेताओं से पूछताछ की है और जांच अभी भी जारी है. भारती ने मंत्री आधव अर्जुन की 2 जुलाई, 2026 की कथित टिप्पणियों पर आपत्ति जताई है. इन टिप्पणियों में उन्होंने कहा था कि करूर त्रासदी का “हिसाब चुकता करना” बाकी है और पिछली DMK सरकार पर आरोप लगाया था कि उसने “पुलिस के ज़रिए करूर के लोगों की जान ली.”
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें