भास्कर एक्सक्लूिसव झारखंड का स्वास्थ्य विभाग भ्रष्टाचार और रसूखदारों की मनमानी का अखाड़ा बन चुका है। इसका उदाहरण बोकारो जिले में सामने आया है, जहां स्वास्थ्य विभाग के निदेशक प्रमुख के कड़े आदेश और जांच समिति की ब्लैकलिस्टेड रिपोर्ट को सीधे तौर पर कूड़ेदान में फेंक दिया गया है। एक साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी भ्रष्टाचार के आरोपी जिला लेखा प्रबंधक अमित कुमार, जिला डाटा मैनेजर (डीडीएम) कंचन कुमारी और जिला एनसीडी के लेखा प्रबंधक मुकेश कुमार न सिर्फ कार्रवाई से बचे हुए हैं, बल्कि मलाइदार पदों पर बैठकर सरकारी तंत्र को ठेंगा दिखा रहे हैं। भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का दम भरने वाली सरकार की नाक के नीचे बोकारो का यह स्वास्थ्य सिंडिकेट फल-फूल रहा है। इसको लेकर आज सिविल सर्जन कार्यालय के समक्ष सिविल सर्जन के भ्रष्टाचार के खिलाफ महाधरना है। विरोध में कई संगठनों ने सिविल सर्जन के विरूद्ध मोर्चा खोल दिया है। जांच समिति की रिपोर्ट को बनाया रद्दी का टुकड़ा ऐसा नहीं है कि यह मामला दबा हुआ था। इस सिंडिकेट के खिलाफ बकायदा उच्चस्तरीय दो सदस्यीय जांच समिति बैठी थी। जांच समिति ने इन तीनों को गंभीर रूप से दोषी पाया और अपनी रिपोर्ट में इन्हें तुरंत पद से हटाने व कार्रवाई करने का कड़ा निर्देश दिया था। इस रिपोर्ट पर मुहर लगाते हुए स्वास्थ्य विभाग के निदेशक प्रमुख ने भी कार्रवाई की फाइल पर हस्ताक्षर किए थे। इस संबंध में पत्रांक 112, दिनांक 10 मार्च 2025 और पत्रांक संख्या 197(डी) दिनांक 16 जून 2025 को जारी हुआ है। जानकारी लेकर हर संभव कार्रवाई की जाएगी – डॉ. इरफान अंसारी, स्वास्थ्य मंत्री, झारखंड। जिला डाटा मैनेजर कंचन कुमारी पर लगे आरोप बेहद संगीन हैं। उन्होंने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए अयोग्य निजी अस्पतालों को क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट का प्रमाण पत्र (लाइसेंस) बांट दिया, जिनके पास मरीजों के इलाज का न्यूनतम इंफ्रास्ट्रक्चर तक नहीं था। उन्होंने जांच समिति के समक्ष इस बात को स्वीकार भी किया है। कंचन कुमारी वर्ष 2008 से बोकारो में अंगद की तरह पैर जमाए बैठी हैं। आखिर किस रसूख के दम पर इनका तबादला तक नहीं होता। वहीं मुकेश कुमार की नियुक्ति के कागजात ही जांच समिति को नहीं दी गई थी। मुकेश कुमार, डीडीएम कंचन कुमारी के सहोदर बड़े भाई हैं। उनकी नियुक्ति 2013 में हुई थी, तब से वह बोकारो में इसी पद पर कार्यरत हैं। जिला लेखा प्रबंधक अमित कुमार पर सरकारी खजाने में सेंधमारी और सरेआम भाई-भतीजावाद का आरोप है। जांच में यह साबित हो चुका है कि अमित कुमार ने गड़बड़ी की है। अमित कुमार बोकारो में मई 2009 से पदस्थापित हैं। जांच में स्पष्ट हुआ, अयोग्य निजी अस्पतालों को लाइसेंस बांट दिया
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