देवघर. वर्तमान समय में बाजार में मछली की मांग लगातार बढ़ रही है. शहर हो या गांव, हर जगह लोग मछली खाना पसंद कर रहे हैं. यही कारण है कि मछली पालन आज के समय में किसानों और युवाओं के लिए आय का एक बेहतर साधन बनकर उभर रहा है. सबसे अच्छी बात यह है कि मछली बेचने के लिए ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता, क्योंकि बाजार में इसकी खपत हमेशा बनी रहती है.
इसके अलावा मछली पालन व्यवसाय शुरू करने के लिए बहुत अधिक पूंजी की भी जरूरत नहीं होती है. कम खर्च में इस व्यवसाय से अच्छा उत्पादन और बेहतर मुनाफा प्राप्त किया जा सकता है. यही वजह है कि छोटे किसान से लेकर बड़े निवेशक तक मछली पालन की ओर आकर्षित हो रहे हैं.
क्या कहते हैं मत्स्य विशेषज्ञ
देवघर के मत्स्य विशेषज्ञ वकील यादव ने लोकल 18 के संवाददाता से बातचीत करते हुए कहा कि मछली पालन शुरू करने के लिए जून और जुलाई का महीना सबसे उपयुक्त माना जाता है. इस दौरान मानसून की बारिश शुरू हो जाती है और तालाबों में पर्याप्त मात्रा में पानी भर जाता है.
मछलियों के विकास के लिए पानी सबसे महत्वपूर्ण तत्व है, इसलिए बारिश का मौसम मछली पालन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है. अगर इस समय सही योजना और वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन की शुरुआत की जाए, तो अच्छा उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है.
इस जिले में मुख्य रूप से दो तालाब पाए जाते हैं
देवघर जिले की बात करें तो यहां मुख्य रूप से दो प्रकार के तालाब पाए जाते हैं. पहला मौसमी तालाब और दूसरा सदाबहार तालाब. मौसमी तालाब में केवल कुछ महीनों तक ही पानी रहता है, इसलिए इसमें सीमित अवधि के लिए मछली पालन किया जा सकता है. वहीं, सदाबहार तालाब में पूरे वर्ष पानी उपलब्ध रहता है, जिसके कारण सालभर मछली पालन संभव होता है. हालांकि दोनों प्रकार के तालाबों में मछली पालन किया जा सकता है, लेकिन लंबे समय तक उत्पादन और बेहतर लाभ के लिए सदाबहार तालाब अधिक उपयुक्त माना जाता है.
मछली डालने से पहले कर लें तालाब तैयार
विशेषज्ञों के अनुसार, मछली छोड़ने से पहले तालाब की सही तैयारी करना बेहद जरूरी है. मानसून आने से पहले तालाब की अच्छी तरह सफाई कर लेनी चाहिए. तालाब के अंदर मौजूद खरपतवार, बेकार घास और अन्य अनचाही चीजों को हटाना चाहिए. इसके बाद तालाब में आवश्यक मात्रा में चूना डालना चाहिए, जिससे पानी की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है. साथ ही सरसों की खल्ली और अन्य जैविक तत्वों का उपयोग करने से तालाब में प्राकृतिक भोजन की उपलब्धता बढ़ती है, जो मछलियों के विकास में मदद करती है.
ये प्रजाति की मछलियां डालें तालाब में
जब तालाब में पर्याप्त पानी भर जाए, तब फिंगरलिंग यानी छोटी मछलियों को छोड़ा जाता है. देवघर के बाजार को देखते हुए रोहू, कतला, मृगल और कॉमन कार्प जैसी मछलियां सबसे अधिक लाभदायक मानी जाती हैं. इन मछलियों की स्थानीय बाजार में अच्छी मांग रहती है, इसलिए किसानों को इन्हें बेचने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती. अगर सही अनुपात में इन मछलियों का पालन किया जाए, तो उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ सकते हैं.
प्राकृतिक नहीं, वैज्ञानिक तरीके से करें मत्स्य पालन
मछलियों के बेहतर विकास के लिए समय-समय पर पूरक आहार देना भी जरूरी होता है. धान का भूसा, सरसों की खल्ली और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ मछलियों को खिलाए जा सकते हैं. इसके अलावा तालाब के पानी की गुणवत्ता पर भी लगातार नजर रखनी चाहिए. विशेषज्ञों का कहना है कि पारंपरिक तरीके की बजाय वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन करने पर सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है.
सही प्रबंधन, संतुलित आहार और नियमित निगरानी से किसान कम लागत में अच्छा उत्पादन पा सकते हैं. वहीं, बिना जानकारी और वैज्ञानिक सलाह के मछली पालन करने पर नुकसान होने की संभावना भी बनी रहती है. इसलिए मछली पालन शुरू करने से पहले विशेषज्ञों की सलाह जरूर लेनी चाहिए, ताकि यह व्यवसाय किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सके.