Last Updated:
Palamu Paddy Farming: झारखंड में जून-जुलाई में कम बारिश के बाद अगस्त में अच्छी वर्षा हुई है, जिससे कृषि विशेषज्ञ किसानों को कम अवधि वाले धान के प्रभेद का चयन करने की सलाह दे रहे हैं. इससे कम समय में बेहतर उत्पादन मिल सकता है. सूखे की स्थिति में हाइब्रिड धान और टांड़ खेतों में खेती का विकल्प भी फायदेमंद हो सकता है.
पलामू. झारखंड में जून-जुलाई के दौरान मौसम की अनिश्चितता और कम बारिश का असर खरीफ फसलों पर देखने को मिला है. इसका सबसे अधिक प्रभाव धान की खेती पर पड़ा है. कई क्षेत्रों में समय पर बारिश नहीं होने के कारण किसान धान की रोपाई नहीं कर पाए हैं. वहीं अगस्त के महीने में अच्छी वर्षा हुई है. ऐसे में कृषि विशेषज्ञ किसानों को कम अवधि वाले धान के प्रभेद का चयन करने की सलाह दे रहे हैं, ताकि कम समय में फसल तैयार कर किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें.
कम अवधि के धान का करें चयन
क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र चियांकी के कृषि वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश शाह ने कहा कि किसानों के लिए कम अवधि वाले धान की खेती बेहतर विकल्प हो सकती है. किसान ब्राउन बोरा जैसे कम अवधि वाले प्रभेद का चयन कर सकते हैं. इसके अलावा हाइब्रिड धान में 100 से 105 दिन में तैयार होने वाले प्रभेद भी किसानों के लिए उपयोगी हैं. इनमें पीएससी-807 प्रभेद का चयन किया जा सकता है. कम अवधि के धान की खासियत यह है कि इसे देर से भी लगाया जाए तो फसल को तैयार होने के लिए अपेक्षाकृत कम समय की जरूरत होती है.
सूखे की स्थिति में हाइब्रिड धान फायदेमंद
उन्होंने कहा कि लंबी अवधि वाले धान की खेती में मौसम का साथ मिलना जरूरी होता है. अगर फसल की फ्लावरिंग के समय पर्याप्त नमी नहीं मिली तो दाने बनने और फसल की उत्पादकता पर असर पड़ सकता है. वहीं हाइब्रिड धान के कुछ प्रभेदों में सूखा सहने की क्षमता बेहतर होती है. ऐसे में कम बारिश या नमी की कमी वाले क्षेत्रों में किसान हाइब्रिड धान का विकल्प अपना सकते हैं.
टांड़ खेतों में भी खेती का विकल्प
आगे कहा कि पलामू समेत आसपास के क्षेत्रों में टांड़ वाले खेतों में पहले से ही कम अवधि वाली धान की खेती का प्रचलन रहा है. ऐसे खेतों में किसान ऐसी किस्मों का चयन करते रहे हैं, जो कम समय में तैयार हो जाएं. वर्तमान मौसम को देखते हुए इसी तरह की कम अवधि वाली किस्मों को बढ़ावा देना किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है.
अगस्त में सीधी बुआई का विकल्प
उन्होंने बताया कि अगस्त महीने में जिन क्षेत्रों में पर्याप्त बारिश हो चुकी है और खेतों में नमी उपलब्ध है, वहां किसान धान की सीधी बुआई भी कर सकते हैं. इसके लिए मशीन का इस्तेमाल किया जा सकता है. सीधी बुआई से रोपाई में लगने वाला समय और श्रम दोनों कम हो सकते हैं. किसान 100 से 105 दिन में तैयार होने वाले धान के प्रभेदों का चयन कर कम समय में फसल तैयार कर सकते हैं. इससे देर से शुरू हुई धान की खेती में भी किसानों को बेहतर उत्पादन और मुनाफे की संभावना मिल सकती है.
About the Author
Raina Shukla is an experienced journalist and content professional with nearly two decades of experience in print and digital media. She holds a Master’s degree in Mass Communication and Journalism from Bundelk…
और पढ़ें