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जेयूटी के नाम पर 40 घंटे की ट्रेनिंग का मेल:छात्रों से मांगे...




विवाद बढ़ा तो यूनिवर्सिटी ने कहा-मेल ही फर्जी है झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (जेयूटी) के नाम से 40 घंटे के इंडस्ट्रीयल रेडी सर्टिफिकेशन प्रोग्राम संबंधित एक एक ईमेल संबद्ध इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों को भेजा गया। ईमेल में सभी सेमेस्टर के डिप्लोमा और बीटेक छात्रों के लिए रजिस्ट्रेशन कराने की बात कही गई थी। इसके लिए प्रति छात्र 3000 रुपए शुल्क निर्धारित किए गए थे। यह ईमेल राज्य के 60 से अधिक संबद्ध इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों तक पहुंचा। इन कॉलेजों के लगभग वाले करीब 10 हजार छात्रों को रजिस्ट्रेशन कराने के लिए कहा गया था। 24 घंटे के अंदर दूसरा ईमेल जारी कर जेयूटी ने कहा कि ईमेल विश्वविद्यालय या उसके प्लेसमेंट सेल की ओर से जारी नहीं किया गया है। विश्वविद्यालय ने इसे फर्जी बताया। ईमेल में क्या कहा गया था पहले ईमेल में कहा गया था कि विश्वविद्यालय ने कहा कि टेक स्किल इंडिया रांची के सहयोग से 40 घंटे का इंडस्ट्री-आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू कर रहा है। इसका उद्देश्य छात्रों की तकनीकी दक्षता, इंटरव्यू की तैयारी और कैंपस प्लेसमेंट की संभावनाओं को बेहतर बनाना है। ईमेल में सभी कॉलेजों के प्राचार्यों, प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट अधिकारियों और विभागाध्यक्षों से छात्रों का पंजीकरण सुनिश्चित करने के लिए कहा गया था। इसके लिए गूगल फॉर्म का लिंक भेज दिया गया था। केवल विवि के आधिकारिक माध्यमों से जारी सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील विश्वविद्यालय ने जारी किया स्पष्टीकरण विवाद बढ़ने के बाद जेयूटी ने स्पष्ट किया कि उक्त ईमेल विवि की ओर से जारी नहीं किया गया है। किसी अनधिकृत व्यक्ति ने उसके नाम का उपयोग करते हुए यह ईमेल भेजा है। सभी कॉलेजों और संबंधित पक्षों से कहा गया कि वे इस ईमेल को आधार बनाकर कोई कदम न उठाएं। केवल विश्वविद्यालय के आधिकारिक माध्यमों से जारी सूचनाओं पर ही भरोसा करें, अन्य किसी सूचनाओं पर नहीं। प्रशिक्षण जरूरी नहीं, इच्छुक छात्र पंजीकरण करें विश्वविद्यालय के प्लेसमेंट अधिकारी धनंजय कुमार सिंह ने कहा कि ईमेल भेजने वाले व्यक्ति ने नन मैंडेटरी की जगह मैंडेटरी लिख दिया, जिसके कारण इस तरह की भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई। उनके अनुसार यह प्रशिक्षण कार्यक्रम अनिवार्य नहीं है। केवल वही छात्र इसमें पंजीकरण करें, जो इसे अपने लिए उपयोगी समझते हों। उन्होंने छात्रों को ऐसे ईमेल से सावधान रहने को कहा।



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