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साल 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट के दोषी अबू सलेम की समय से पहले रिहाई को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत में हलचल तेज हो गई है. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ के सामने अबू सलेम की याचिका पर अहम सुनवाई हुई. इस दौरान अबू सलेम के वकील ने कोर्ट में कड़ा रुख अख्तियार करते हुए जेल प्रशासन के काम करने के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए.
जेल में कैद अबू सलेम की समय से पहले रिहाई की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली. 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में दोषी ठहराए गए अबू सलेम की समय से पहले रिहाई (Premature Release) की याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने की. सुनवाई के दौरान अबू सलेम की ओर से पेश वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि टाडा (TADA) कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि विचाराधीन कैदी के तौर पर जेल में बिताई गई पूरी अवधि का सेट-ऑफ (Set-off) दिया जाए. हालांकि, वकील के मुताबिक जेल प्रशासन की ओर से अब तक उस अवधि का लाभ नहीं दिया जा रहा है. अबू सलेम की याचिका में इसी आधार पर समय-पूर्व रिहाई का लाभ देने की मांग की गई है. मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जारी है.
11 नवंबर 2005 को पुर्तगाल से भारत लाया गया था
अबू सलेम को 11 नवंबर 2005 को पुर्तगाल से भारत लाया गया था. इस मामले में पहले हुई सुनवाई के दौरान भी उसकी ओर से यह दलील दी जाती रही है कि भारत-पुर्तगाल संधि के तहत उसकी कुल सजा 25 साल से अधिक नहीं हो सकती.
फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?
इससे पहले फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने अबू सलेम की रिहाई की सीधी याचिका खारिज कर दी थी. हालांकि, अदालत ने उसे बॉम्बे हाईकोर्ट जाने की स्वतंत्रता दी थी. अब सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में उसकी समयपूर्व रिहाई की याचिका पर फिर सुनवाई हुई है. इस बार उसकी ओर से जेल में बिताई गई अंडरट्रायल अवधि का सेट-ऑफ नहीं मिलने को आधार बनाया गया है.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…
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