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Palamau Tiger Reserve: पलामू टाइगर रिजर्व झारखंड का एकमात्र टाइगर रिजर्व है, जहां घने जंगलों के बीच सैकड़ों प्रजातियों के पेड़-पौधे, औषधीय वनस्पतियां और समृद्ध जैव विविधता मौजूद है. ऐसे में जंगलों का संरक्षण केवल नए पौधे लगाने से नहीं, बल्कि उन्हें बड़ा करने और सुरक्षित रखने से संभव है. यही सोच इस नई पहल की सबसे बड़ी ताकत है.
पलामू: पेड़ हमारे पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी हैं. हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर लाखों पौधे लगाए जाते हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि आखिर इनमें से कितने पौधे जीवित बचे? किसने पौधा लगाया? कब लगाया? और उन पौधों की देखभाल कौन कर रहा है? अब इन सवालों का जवाब झारखंड का इकलौता पलामू टाइगर रिजर्व (PTR) तकनीक की मदद से देने जा रहा है.
यहां हैं सैकड़ों प्रजातियों के पेड़-पौधे
दरअसल, पलामू टाइगर रिजर्व झारखंड का एकमात्र टाइगर रिजर्व है, जहां घने जंगलों के बीच सैकड़ों प्रजातियों के पेड़-पौधे, औषधीय वनस्पतियां और समृद्ध जैव विविधता मौजूद है. ऐसे में जंगलों का संरक्षण केवल नए पौधे लगाने से नहीं, बल्कि उन्हें बड़ा करने और सुरक्षित रखने से संभव है. यही सोच इस नई पहल की सबसे बड़ी ताकत है.
बता दें कि पीटीआर ने पौधारोपण को केवल अभियान तक सीमित नहीं रखा है. बल्कि अब हर पौधे की पूरी जीवन यात्रा को डिजिटल रूप से रिकॉर्ड करने की तैयारी की है. इसके लिए ‘पीटीआर ट्री ट्रैकर’ सिस्टम विकसित किया गया है, जिसके तहत लगाए गए प्रत्येक पौधे को एक यूनिक क्यूआर (QR) कोड दिया जाएगा. इस पहल के बाद हर पेड़ की अपनी अलग डिजिटल पहचान होगी.
PTR के डिप्टी डायरेक्टर ने दी जानकारी
डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जेना ने लोकल 18 को बताया कि इस ट्रैकिंग के जरिए कोई भी व्यक्ति मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन करते ही उस पौधे की पूरी जानकारी देख सकेगा. इसमें यह दर्ज होगा कि पौधा किस व्यक्ति या संस्था ने लगाया, किस तारीख को रोपण हुआ, यह किस प्रजाति का है. इसकी विशेषताएं क्या हैं और समय के साथ इसकी बढ़वार कितनी हुई. यानी पौधे की पूरी ग्रोथ हिस्ट्री एक क्लिक में सामने होगी.
उन्होंने आगे कहा कि इतना ही नहीं, पीटीआर ने पौधों के प्रबंधन को भी वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया है. प्रत्येक पौधे की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी. यदि किसी पौधे की वृद्धि धीमी होती है या वह सूखने लगता है, तो उसकी जानकारी भी रिकॉर्ड होगी, ताकि समय रहते उसकी देखभाल की जा सके. इससे केवल पौधारोपण के आंकड़े नहीं बढ़ेंगे, बल्कि पौधों के जीवित रहने की दर में भी सुधार होगा.
वन क्षेत्रों के लिए मिसाल बन सकता है यह मॉडल
पीटीआर का यह मॉडल भविष्य में देश के अन्य वन क्षेत्रों के लिए भी मिसाल बन सकता है. क्योंकि अब पौधारोपण केवल फोटो खिंचवाने या संख्या बताने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हर पेड़ का डिजिटल रिकॉर्ड होगा और उसकी जिम्मेदारी भी तय होगी. यदि यह पहल सफल होती है, तो आने वाले समय में जंगल संरक्षण और हरित अभियान को नई दिशा मिलेगी, जहां हर पौधे का हिसाब होगा और हर पेड़ की अपनी अलग पहचान.
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बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत, दैनिक भास्कर के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से Hindi.News18.com<…
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